TMC Crisis: 'सारे बागी गद्दार, जनता के सामने क्या हैसियत रह जाएगी', पार्टी कलह पर बोले सौगत रॉय
TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय अपने सबसे बड़े आंतरिक राजनीतिक संकट से जूझ रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद सौगत रॉय ने बागी धड़े पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'गद्दारों की टीम' करार दिया है।मालूम हो कि टीएमसी के करीब 20 बागी सांसदों ने लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का दावा किया है।
इन सांसदों ने एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) के साथ विलय की घोषणा की है। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने खुद को 'असली टीएमसी' के रूप में मान्यता देने की मांग भी उठाई है।

सौगत रॉय के तीखे बाण: 'जोड़ा फूल' बनाम 'पेन की निब'
सौगत रॉय ने बागी गुट पर निशाना साधते हुए पार्टी की स्थिति को दो खेमों में बांटा। उन्होंने कहा कि 'आज केवल दो ही टीमें हैं—एक असली टीएमसी और दूसरी गद्दारों की टीम। वरिष्ठ सांसद ने जोर देकर कहा कि असली टीएमसी का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि बागी धड़ा परोक्ष रूप से भाजपा के इशारे पर चल रहा है।'
टीएमसी नेता ने दोनों गुटों के प्रतीकों का जिक्र करते हुए कहा कि 'ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल पार्टी का चुनाव चिह्न जनता का पसंदीदा 'जोड़ा फूल' है। वहीं, बागी टीम का नया चुनावी चिह्न 'पेन की निब' बनने जा रहा है।'
सौगत रॉय ने विधानसभा चुनावों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी ने केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के बावजूद बंगाल में लगभग 41 प्रतिशत वोट हासिल किए । उन्होंने सवाल किया कि बंगाल की जनता के इस भारी जनादेश के सामने इन बागियों की क्या हैसियत रह जाएगी?
संसद के भीतर कानूनी लड़ाई और दलबदल कानून
इस पूरे मामले में अब देश के संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून की भूमिका अहम हो गई है। दलबदल कानून के तहत सांसदों को अपनी सदस्यता बचाने के लिए कम से कम दो-तिहाई बहुमत के साथ किसी अन्य पार्टी में विलय करना जरूरी होता है। यही वजह है कि बागी गुट ने 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया है।
बागी सांसदों के इस कदम के बाद गेंद अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पाले में है। सूत्रों के मुताबिक, स्पीकर किसी भी अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों की दलीलें सुनेंगे। यदि स्पीकर बागियों के दो-तिहाई बहुमत के दावे को स्वीकार कर लेते हैं, तो उनकी संसद सदस्यता बच जाएगी और वे एनसीपीआई के बैनर तले एनडीए का समर्थन कर सकेंगे। लेकिन अगर यह दावा खारिज हुआ, तो ये सभी सांसदों पर अयोग्य घोषित करार दिए जा सकते हैं।














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