UN Secretary General election: कौन हैं मारिया एस्पिनोसा? यूएन महासचिव की रेस में चल रही है सबसे आगे

UN Secretary General election 2026: दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेशनल संगठन संयुक्त राष्ट्र में नए महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। मौजूदा महासचिव Antonio Guterres का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है और 1 जनवरी 2027 से UN को नया नेतृत्व मिलेगा। इसी क्रम में महासभा ने महासचिव पद की उम्मीदवार María Fernanda Espinosa के साथ इंटरएक्टिव डायलॉग आयोजित किया।

ऐसे समय में यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दुनिया यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट तनाव, क्लाइमेट चेंज, आर्थिक चुनौतियों और AI जैसी नई टेक्नोलॉजी से जुड़े मुद्दों का सामना कर रही है। नए महासचिव पर UN की साख और प्रभाव बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

UN Secretary General election 2026

कौन हैं मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा?

मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा इक्वाडोर की अनुभवी डिप्लोमैट और नेता हैं। वह पहले Ecuador की विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री रह चुकी हैं। इसके अलावा वह UN महासभा की अध्यक्ष का पद भी संभाल चुकी हैं। मई 2026 में Antigua and Barbuda ने उनके नाम का आधिकारिक समर्थन किया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों में लंबे अनुभव और UN सिस्टम की गहरी समझ के कारण उन्हें इस रेस की मजबूत उम्मीदवारों में गिना जा रहा है। उनका फोकस संगठन को ज्यादा प्रभावी और भरोसेमंद बनाने पर है।

दुनिया को सिर्फ भाषण नहीं, नतीजे चाहिए

UN महासभा में बातचीत के दौरान एस्पिनोसा ने कहा कि आज दुनिया को केवल बड़े-बड़े भाषण नहीं बल्कि ठोस रिजल्ट चाहिए। उनके मुताबिक UN को ऐसा संगठन बनना होगा जो संकट आने से पहले चेतावनी दे सके और तेजी से प्रतिक्रिया कर सके। उन्होंने कहा कि लोगों का भरोसा जीतना UN की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका मानना है कि मौजूदा समय में ग्लोबल चुनौतियों का समाधान केवल मजबूत इंटरनेशनल कोऑपरेशन और बेहतर नेतृत्व से ही संभव है।

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पांच पिलर पर आधारित है उनका विजन

एस्पिनोसा ने अपने विजन को पांच बड़े पिलर में बांटा है। पहला, शांति और सुरक्षा को मजबूत करना। दूसरा, डेवलपमेंट को तेज गति देना। तीसरा, डिजिटल और एनर्जी ट्रांजिशन को बढ़ावा देना। चौथा, फैसलों और उनके इम्प्लीमेंटेशन के बीच का गैप कम करना। पांचवां, UN की विश्वसनीयता को फिर से मजबूत बनाना। उनका कहना है कि महासचिव का काम केवल नीतियां बनाना नहीं बल्कि संगठन को ज्यादा प्रभावी तरीके से चलाने में मदद करना भी है।

महासचिव पद की रेस में कौन-कौन?

इस चुनाव में एस्पिनोसा के अलावा कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें Michelle Bachelet, Rafael Mariano Grossi, Macky Sall और Rebeca Grynspan प्रमुख हैं। हाल ही में Guyana की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिना रोड्रिग्स का नाम भी इस सूची में जुड़ा है। सभी उम्मीदवारों का अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में लंबा अनुभव रहा है, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।

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महासचिव का चुनाव कैसे होता है?

UN महासचिव का चुनाव सामान्य वोटिंग से नहीं होता। सबसे पहले United Nations Security Council उम्मीदवारों के नामों पर विचार करता है। इस प्रक्रिया में अमेरिका, चीन, रूस, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस की भूमिका सबसे अहम होती है क्योंकि इनके पास वीटो पावर है। अगर सुरक्षा परिषद किसी उम्मीदवार के नाम की सिफारिश करती है, तभी मामला UN महासभा तक पहुंचता है। इसके बाद महासभा अंतिम मंजूरी देती है। इसलिए महासचिव बनने के लिए वैश्विक समर्थन के साथ बड़ी शक्तियों की सहमति भी जरूरी होती है।

भारत और दुनिया के लिए क्यों अहम है चुनाव?

यह चुनाव सिर्फ UN के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। यूक्रेन युद्ध, गाजा संकट, क्लाइमेट चेंज और AI जैसी चुनौतियों के बीच नए महासचिव को देशों के बीच संवाद बढ़ाना होगा। भारत के लिए भी यह चुनाव खास है क्योंकि वह लंबे समय से UN सुधार और सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। नया महासचिव ग्लोबल साउथ, डेवलपमेंट, शांति मिशन और संस्थागत सुधारों पर कैसा रुख अपनाता है, इसका असर भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

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