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'पिछड़े नहीं हैं हम' कहकर दिग्गज बिजनेसमैन ने ठुकराया जाति जनगणना , मचा बवाल

Narayana Murthy Sudha Murty Caste Census Refusal: इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति और राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति ने कर्नाटक में चल रहे सामाजिक और शैक्षणिक सर्वे (जाति जनगणना) में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है। दंपत्ति ने सर्वे करने वालों से स्पष्ट कहा कि वे किसी पिछड़े समुदाय से नहीं हैं और इसलिए इस प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे। सुधा मूर्ति ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर अपनी असहमति दर्ज कराई।

कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दोहराया कि सर्वेक्षण वैकल्पिक (Optional) है और उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, जानकारी देने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता। यह घटनाक्रम ₹420 करोड़ की अनुमानित लागत वाले इस विवादास्पद सर्वे में एक नया मोड़ लाया है।

Narayana Murthy Sudha Murty Caste Census

नारायण मूर्ति ने क्या कहा?

सर्वे करने वाले जब नारायण मूर्ति और उनकी पत्नी सुधा मूर्ति (Murthy Family Caste Survey Refusal) के घर पहुंचे, तो उन्होंने सर्वेक्षण करवाने से इनकार कर दिया। सुधा मूर्ति ने PTI को बताया कि उन्होंने सर्वे फॉर्म पर घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि उनका परिवार किसी भी पिछड़े समुदाय से नहीं है और इसीलिए वे उन समूहों के लिए कराए जा रहे सरकारी सर्वे में भाग नहीं लेंगे।

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जाति सर्वे खत्म हो चुका है

कर्नाटक में जाति जनगणना (Karnataka Caste Census Sudha Murty) 22 सितंबर को शुरू हुई थी और इसकी अंतिम तिथि 7 अक्टूबर थी, जिसे बाद में 18 अक्टूबर तक बढ़ाया गया। यह सर्वे KSCBC द्वारा आयोजित किया जा रहा है। 25 सितंबर को, कर्नाटक हाईकोर्ट ने KSCBC को एक सार्वजनिक अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया था कि यह सर्वे ऑप्शनल है और किसी को भी निजी जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। यह न्यायिक हस्तक्षेप सुनिश्चित करता है कि नागरिकों की निजता का सम्मान किया जाए।

सर्वे की अनुमानित लागत पर बवाल

इस सर्वे की अनुमानित लागत ₹420 करोड़ है और इसमें 60 प्रश्न शामिल किए गए हैं। इसका लक्ष्य राज्य भर के लगभग 2 करोड़ घरों के 7 करोड़ लोगों को कवर करना है। आंकड़ा जुटाने के लिए राज्य के 1.75 लाख सरकारी कर्मचारियों को लगाया गया है, जिनमें अधिकांश सरकारी स्कूल के शिक्षक हैं। शिक्षकों की ड्यूटी के कारण कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में 18 अक्टूबर तक छुट्टी घोषित की गई है। डिप्टी सीएम शिवकुमार ने बच्चों की पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाने का आश्वासन दिया है। आयोग दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है।

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डेटा कलेक्शन में आधुनिक तकनीक का उपयोग

यह जनगणना डेटा कलेक्शन में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही है। हर घर को उसके बिजली मीटर नंबर के माध्यम से जियो-टैग किया जाएगा और उसे एक विशिष्ट घरेलू पहचान पत्र (UHID) दिया जाएगा। डेटा कलेक्शन के दौरान, राशन कार्ड और आधार विवरण को मोबाइल नंबरों से जोड़ा जाएगा। सर्वे के दौरान प्रमुख विवाद 2015 की प्रक्रिया पर वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत समुदायों की आपत्ति से जुड़ा है। इन दोनों प्रमुख समूहों ने पिछली गणना को अवैज्ञानिक बताया था और नए सिरे से गणना की मांग की थी। इसे देखते हुए, कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 12 जून को एक नए सर्वे को मंजूरी दी थी।

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