कौन सी है ये सरकारी नौकरी, कितनी मिलती है सैलरी? जिसे हासिल करने के लिए आरुषी ने सगी विधवा मां की करवाई हत्या
Jaipur Aarushi Sharma murdered mother Case: राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुई सनसनीखेज हत्याकांड ने हर किसी को हैरान कर दिया है। महज 23 साल की कलयुगी बेटी आरुषी शर्मा ने अपनी मां नीरज शर्मा की हत्या 7 लाख रुपये की सुपारी देकर करवा डाली। मां और बेटी के सबसे अनमोल रिश्ते को दागदार करने वाली आरुषि ने मां नीरज की हत्या का खूनी खेल सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए करवाई। आइए समझते हैं आखिर कौन सी है ये सककारी नौकरी और कितनी मिलती है सैलरी जिसे हासिल करने के लिए जवान बेटी ने अपनी मां की बेरहमी से हत्या करवा डाली?
मां के साथ भाई की भी हत्या करवाना चाहती थी आयुषी?
बता दें मां के नाम की सुपारी देने वाली आयुषी शर्मा की गिरफ्तारी के बाद इस केस में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। सीसीटीवी और वीडियो फुटेज में ये बात सामने आई है कि आयुषी की प्लानिंग अपनी मां के साथ अपने 16 साल के दिव्यांग भाई को भी जिंदा जलाकर मारने की थी। ताकि स्वर्गीय पिता की नौकरी के साथ करोड़ों की संपत्ति की वो अकेली मालिक बन जाए।

मां और भाई को घर में जिंदा जलाने की कोशिश
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार पहले 23 साल की आरुषी शर्मा 27 जून की दोपहर घर से बाहर चली गई और बाद में घर की सीढ़ी पर बंधा हुआ नारियल फिकवाया ताकी उसकी मां बाहर आए इसके बाद कपड़ों का बंधा हुआ आग का गोला फिकवाया ताकी उसका दिव्यांग भाई और मां जलकर मर जाए। जिसका वीडियो पुलिस के कब्जे में है।
दो बार नाकाम कोशिश, तीसरी बार स्कॉपियो से टक्कर मारकर करवा दी हत्या
ये कोशिश नाकाम हुई तो जून महीने में कार से किराए की थार जीप से एक्सीडेंट करवाया गया लेकिन उसकी मां बच गई। दो बार हत्या के असफल प्रयास के बाद 4 जुलाई को रेकी करवाई और करवाई और मां नीरज बेटे को ट्यूशन छोड़कर वापस लौट रही थी तभी 130 किमी प्रति घंटे की स्पीड से स्कॉपियो से टक्कर मारकर हत्या करवा डाली। ये हत्या भरतपुर के उसी शख्स ने की जिसको सुपारी के सात लाख रुपये एडवांस में आरूषी ने दिए थे।
कौन सी है ये सरकारी नौकरी
जयपुर में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए मां की हत्या करवाने वाली आरुषी शर्मा के पिता जयपुर कोर्ट में लोअर डिवजीन कर्ल्क (LDC) थे। एक साल पहले जब पिता की मौत हुई तब उस समय आरुषी ने 12 वीं ही पास की थी। बेटी आरुषी ये नौकरी करना चाहती थी लेकिन बेटी आरुषी और दिव्यांग बेटे की देखभाल के लिए नीरजा शर्मा यानी आरुषी की मां ने ये अनुकंपा (compassionate) के तहत सरकारी नौकरी ज्वाइन की थी।
LDC को कितनी मिलती है सैलरी?
जयपुर हाई कोर्ट (Rajasthan High Court/Subordinate Courts) में लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) की सैलरी पे मैट्रिक्स लेवल 5 के तहत आता है। प्रोबेशन के दौरान मानदेय लगभग 13 हजार से 20 हजार रुपये प्रति माह मिलता है और स्थायी नियुक्ति होने के बाद इन हैंड सैलरी 33 हजार से 40 हजार की होती है। चूंकि आरुषि के पिता की मौत के बाद ये अनुकंपा नियुक्ति हुई थी तो मूल रूप से लगभग 20 हजार से ₹25,000 के बीच मंथली सैलरी होगी।













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