स्वास्थकर्मियों की तरह किसानों ने महामारी से सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाई: गोपालकृष्ण गांधी
नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते और बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी ने महामारी के बीच स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ किसानों के योगदान को उल्लेखित करते हुए कहा कि रबी और खरीब फसलों में किसानों योगदान का काफी महत्वपूर्ण है। 1920 में महात्मा गांंधी द्वारा स्थापित गुजरात विद्यापीठ के 101वें स्थापना दिवस में मुख्य अतिथि गोपालकृष्ण गांधी ने अपने संबोधन में उक्त बातें कहां, जहां वो वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए थे।

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उन्होंने आगे कहा, देश में शहरीकरण के साथ, शहरी आबादी लगातार बढ़ रही है, जबकि किसान आबादी घट रही है। शहरी आबादी में यह असंतुलन और वृद्धि महामारी को बढ़ा रहा है। हमें अपनी आर्थिक नीतियों में दोषों को स्वीकार करना चाहिए क्योंकि हमने इस अनुपात को समाप्त कर दिया है और अपनी आर्थिक नीतियों में आवश्यक सुधार लाने की आवश्यकता है। हम किसानों को कृषि से शहरों में स्थानांतरित करने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, महामारी दूर हो सकती है या कम हो सकती है लेकिन यह असंतुलन, या असंतुलन जारी रहेगा।

गोपालकृष्ण गांधी ने कोरोनावायरस महामारी के मामलों में वृद्धि के लिए गांवों से शहरों की ओर बढ़ता पलायन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, देश में किसानों का पलायन आज सबसे बड़ी समस्या है। हमने ग्रामीण और शहरी संतुलन को नकार दिया है। एक ओर जहां डॉक्टरों, नर्सों और सैनिटरी स्टाफ ने हमारे देश को बचाया, वहीं दूसरी ओर किसानों द्वारा भी ऐसा ही किया गया। महामारी अपने चरम पर थी, लेकिन कठिनाई के साथ उन्होंने हमें रबी और खरीफ के मौसम के बीच प्रदान किया है।

बकौल गोपालकृष्ण गांधी, मैंने देखा है कि PLL (पढ़े-लिखे लोग), जिनकी आबादी शहरी क्षेत्रों में अधिक है, वहां महामारी का प्रभाव सबसे अधिक है, लोग वहां कोरोनावायरस के दिशा निर्देशों के












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