गोपालकृष्ण गांधी ने कहा, मैं फांसी में यकीन नहीं रखता, शिवसेना को दिया जवाब
गोपालकृष्ण गांधी ने कहा, मैं फांसी में यकीन नहीं रखता, शिवसेना को दिया जवाब
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन करने के बाद गोपालकृष्ण गांधी ने शिवसेना की तरफ से लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। शिवसेना नेता संजय राउत ने आरोप लगाया था कि गोपालकृष्ण ने मुंबई में सीरियल ब्लास्ट के गुनहगार याकूब मेमन की फांसी का विरोध किया था।

यूपीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी ने आज कहा कि फांसी मध्यकालीन समाज की याद दिलाती है, ये आज के दौर में ठीक नहीं है। मैं फांसी की सजा के खिलाफ हूं क्योंकि महात्मा गांधी और भीमराव अंबेडकर भी फांसी की सजा के खिलाफ थे। शिवसेना के आरोप पर उन्होंने कहा कि जो शिवसेना ने कहा, वो तो उन्हें कहना ही था।
गांधी ने कहा कि गांधी ने हमेशा फांसी का विरोध किया और यहां तक कि उनके बेटे उनके हत्यारों को फांसी दिए जाने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा कि किसी एक फांसी की बात नहीं है, मैंने निजी हैसियत से खत लिखकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति से कुलभूषण जाधव को फांसी ना दिए जाने की भी बात कही, जो कि वहां जासूसी के आरोपों में बंद हैं। उन्होंने कहा कि मैं निजी तौर पर मौत की सजा का पक्षधर नहीं हूं, चाहे वो किसी भी देश मे हो।
गोपालकृष्ण गांधी ने कहा कि वो एक आम नागरिक हैं और किसी पार्टी का हिस्सा नहीं हैं, ऐसे में उनके विचार किसी पार्टी के नहीं बल्कि निजी हैं। उन्होंने कहा कि वो सिद्धांतों के लिए इलेक्शन लड़ रहे हैं क्योंकि ये संख्याबल की नहीं सिद्धांतों पर डटे रहने की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि जनता और राजनीति के बीच एक खाई बन चुकी है और मैं उसे कम करना चाहता हूं।
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शिवसेना ने उठाया है गांधी की दावेदारी पर सवाल
आपको बता दें कि सोमवार को देश के अगले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए यूपीए के गोपालकृष्ण गांधी को अपना उम्मीदवार बनाने के फैसले की आलोचना करते हुए शिवसेना ने कहा था कि जिस व्यक्ति ने देश पर हमला करने वाले याकूब मेमन की फांसी का विरोध किया था और देश की भावना के खिलाफ काम किया था, यूपीए आखिर कैसे ऐसे व्यक्ति को देश के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर आगे कर सकती है।












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