केरल के पूर्व CM V.S Achuthanandan का निधन, भारत के 'फिदेल कास्त्रो' के नाम से थे चर्चित
V.S Achuthanandan Death: केरल के पूर्व सीएम और सीपीएम के वरिष्ठ नेता वी. एस. अच्युतानंदन का 101 साल की उम्र में निधन हो गया है। एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे थे और सार्वजनिक जीवन से दूर थे। 2006 से 2011 तक वह राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। विधानसभा चुनाव 2016 में जब उन्हें सीएम नहीं बनाया गया, तब सीतीराम येचुरी ने कहा था कि वह भारत के फिदेल कास्त्रो हैं। लेफ्ट पार्टी को उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन की जरूरत हैं।
'वीएस' के नाम से मशहूर अच्युतानंदन 1964 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) से अलग हुए थे। सीपीआई से अलग होकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) बनाने वाले 32 संस्थापकों में से एक थे। अच्युतानंदन को उनकी संगठन क्षमता के लिए जाना जाता है। 82 साल की उम्र में उन्होंने 2006 विधानसभा चुनाव में पार्टी को चुनावी सफलता दिलाई थी।

V.S Achuthanandan के निधन पर पीएम मोदी ने जताया शोक
केरल के पूर्व सीएम और वरिष्ठ सीपीएम नेता के निधन पर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने शोक जताया है। सीपीएम ने निधन की पुष्टि करते हुए पोस्ट जारी कर शोक में झंडा झुकाने की बात कही है। तिरुअनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने भी उनके निधन की खबर पर प्रतिक्रिया दी है।
Mourning the passing of former Chief Minister V.S. Achuthanandan (here, releasing my book "The Elephant, the Tiger & the Cellphone" in Kerala, 2008).
A giant of Keralas Communist movement, "VS" rose from humble origins to become a hugely popular mass leader and Chief Minister… pic.twitter.com/upehl7vFeQ
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) July 21, 2025
केरल में वीएस के नाम से चर्चित पूर्व सीएम अपनी सादगी और उसूलों के लिए जाने जाते थे। पिछले कई सालों से वह तिरुअनंतपुरम में अपने बेटे के घर पर रह रहे थे। साल 2008 में उनके बेटे वी.ए. अरुण कुमार की नियुक्ति पर आरोप लगे थे। उन्होंने विधानसभा समिति से आरोपों की जांच कराने का निर्देश दिया था। पार्टी हित में उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए दशकों मेहनत की थी। केरल के गांव-गांव तक उनका कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद होता था।
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छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे थे
वीएस छात्र जीवन से ही प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो गए थे। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने अलप्पुझा में सामंती ज़मींदारों और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध आंदोलन में हिस्सा लिया था। स्कूली जीवन से ही वह लेफ्ट विचारधारा से प्रभावित थे। उनकी शुरुआती राजनीति किसानों और मजदूरों के मुद्दों पर आधारित थी। छात्र जीवन में ही कुट्टनाड में गिरमिटिया खेतिहर मजदूरों और एस्पिनवॉल फैक्टरी मज़दूरों को एकजुट करने के लिए आंदोलन चलाया था। वीएस की पहचान जमीन से जुड़े नेता की रही, लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने तकनीक आधारित शिक्षा और केरल में वैश्विक निवेश की पहल के लिए भी काम किया था। वीएस शिक्षा और खास तौर पर स्त्री शिक्षा के मुद्दों को बहुत प्राथमिकता देते थे।
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V.S Achuthanandan का राजनीतिक सफर
वीएस 3 बार केरल विधानसभा में नेता विपक्ष रहे और एक बार प्रदेश के सीएम रहे। 44 साल की उम्र में पहली बार वह विधायक चुने गए और उसके बाद लगातार चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे। केरल में वामपंथी संगठन को मजबूत करने की दिशा में उन्होंने अहम कदम उठाए थे। जिला ईकाई से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पार्टी के अहम पदों पर रहे। साल 2018 में स्ट्रोक की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई और फिर वह सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए। पिछले महीने दिल का दौरा पड़ने की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था।












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