WB में क्यों तार-तार हो गया INDIA ब्लॉक? पहले TMC अलग हुई, अब कांग्रेस-लेफ्ट में भी तलाक!
West Bengal Politics: कांग्रेस पार्टी और लेफ्ट पार्टियों के बीच बंगाल में बीते आठ वर्षों से अधिक से रिश्तेदारी निभाई जा रही थी। केरल में ये दोनों भले ही एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बने रहे, लेकिन पश्चिम बंगाल में दांतों काटी रोटियां खाने से भी परहेज नहीं किया। लेकिन, केरल में वायनाड लोकसभा का उपचुनाव क्या हुआ, यहां भी इनके बीच सियासी तलाक हो गया। टीएमसी तो देशभर में इंडिया ब्लॉक में इनके साथ है, लेकिन बंगाल में इनकी कट्टर दुश्मनी पहले से जारी है।
पश्चिम बंगाल में 13 नवंबर को विधानसभा की 6 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। मंगलवार रात को कांग्रेस ने इन सभी सीटों के लिए एकतरफा 6 उम्मीदवारों के नाम घोषित करके सीपीएम और लेफ्ट फ्रंट के साथ 2021 के विधानसभा चुनावों से चली आ रही दोस्ती को औपचारिक तौर पर ब्रेक लगा दिया है।

बंगाल उपचुनाव में में इंडिया ब्लॉक के दलों के बीच ही घमासान
इसकी शुरुआत लेफ्ट फ्रंट की ओर से सोमवार को ही हो गई थी। लेफ्ट फ्रंट ने 5 सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिए और कांग्रेस को पूछा तक नहीं। बल्कि, उसने अपने गठबंधन में बिहार में ज्यादा सक्रिय सीपीआई (एमएल) को शामिल करके सबको चौंका दिया।
इस तरह से विधानसभा उपचुनाव में बंगाल में जो इस बार सीन बना है, उसमें एक तरफ बीजेपी होगी और दूसरी तरफ इंडिया ब्लॉक में शामिल पार्टियां आपस में ही गुत्थमगुत्था करती नजर आएंगी। माना जा रहा है कि लेफ्ट फ्रंट ने हरोआ की जिस सीट पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है, वह भी उसने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के लिए रखी है।
बीजेपी के खिलाफ बना है विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और तमाम वामपंथी पार्टियां राष्ट्रीय स्तर पर इस बार के लोकसभा चुनाव से पहले बने विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं। इस विपक्षी गठबंधन का मूल लक्ष्य बीजेपी का विरोध करना है, लेकिन बंगाल में यह गठबंधन आपस में ही टुकड़ों में बट गया है।
बंगाल में कैसे दोस्ती-दुश्मनी करते रहा है बीजेपी-विरोधी विपक्ष
2011 में टीएमसी कांग्रेस के साथ मिलकर लेफ्ट फ्रंट का विरोध करके सत्ता में आई थी। लेकिन, बाद में कांग्रेस ने ममता का साथ छोड़ दिया और 2016 में उसी लेफ्ट फ्रंट का लाल झंडा थाम लिया, जिसके खिलाफ उसने दशकों संघर्ष किया था। लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट में बात नहीं बनी तो लेफ्ट फ्रंट ने कांग्रेस की जीती हुई दो सीटें बहरामपुर और मालदा साउथ छोड़कर बाकी जगह अपने उम्मीदवार उतार दिए।
लोकसभा चुनाव में फीका रहा कांग्रेस-लेफ्ट का प्रदर्शन
2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक में सहयोगी होने के बावजूद टीएमसी ने कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट को भाव नहीं दिया, तो दोनों पार्टियां फिर से मिलकर चुनाव लड़ीं। लेकिन, सिर्फ कांग्रेस को ही एक सीट मिल पाई। बाकी 29 टीएमसी और 12 बीजेपी जीत गई।
सीपीएम की ओर उम्मीदों से देखती रह गई कांग्रेस
लेफ्ट फ्रंट के साथ गठबंधन टूटने के बाद अधीर रंजन चौधरी की जगह बंगाल में कांग्रेस के नए अध्यक्ष बने शुभंकर सरकार ने कहा है, 'हमारा सीपीएम के साथ गठबंधन था और सीटों के बंटवारे पर फैसले के लिए हमने उनका इंतजार किया। 2021 में सीताई से हम लड़े थे, इसलिए यह उपचुनाव घोषित होने के बाद हम उम्मीद कर रहे थे कि सीपीएम हमसे संपर्क करेगी।'
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि शुरू में सीपीएम के साथ नैहाटी सीट के लिए बात हुई थी; और इस तरह का प्रस्ताव था कि वहां से सिविल सोसाइटी से किसी को उम्मीदवार बनाया जाएगा। लेकिन, अब सरकार का कहना है, 'यह परिपक्व नहीं रहा कि सीपीएम ने सीपीआई (एमएल) के लिए सीट छोड़ने का फैसला कर लिया। हम गठबंधन में लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन अब रणनीति बदल जाएगी।'
वायनाड की वजह से हुआ बंगाल में कांग्रेस-लेफ्ट में तलाक!
दरअसल, लोकसभा चुनाव में जब केरल की वायनाड सीट पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ सीपीआई ने पार्टी महासचिव डी राजा की पत्नी एनी राजा को उतारा था, तब भी दोनों के बीच काफी खटपट हुई थी। अब जब लेफ्ट फ्रंट ने फिर से वायनाड लोकसभा उपचुनाव में राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है तो बंगाल कांग्रेस के नेता और कार्यकरताओं में अजीब सीट बेचैनी नजर आ रही थी।
बंगाल में अब बीजेपी बनाम ऑल!
माना जा रहा है कि बंगाल में गठबंधन टूटने के पीछे वायनाड के सियासी गणित का ही असर है। हालांकि, सीपीएम और कांग्रेस दोनों का आगे बंगाल में फिर कोई गठबंधन नहीं होगा, यह कहना मुश्किल है। वैसे कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र बता रहे हैं कि राहुल गांधी की अगुवाई वाला कांग्रेस आलाकमान इसके बारे में महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों के बाद कोई फैसला ले सकता है।
बहरहाल, इतना तो साफ है कि पश्चिम बंगाल में एक तरफ तो प्रदेश में मुख्य विपक्षी बीजेपी है और दूसरी तरफ इंडिया ब्लॉक का पूरा कुनबा उसी के खिलाफ खुद को मुख्य प्रतिद्वंद्वी साबित करने में जुट गया है।
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