क्या 4% मुस्लिम कोटा फिर लागू करेगी कर्नाटक की कांग्रेस सरकार? धार्मिक आधार पर आरक्षण पर SC ने क्या कहा है?
Muslim quota in Karnataka: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार बहुत जल्द मुसलमानों के लिए 4% आरक्षण की व्यवस्था लागू कर सकती है। कांग्रेस पर मुसलमानों की ओर से इसके लिए पिछले बार इसकी सरकार बनने के बाद से ही दबाव है और अब खुद मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने संकेत दे दिया है कि उनकी सरकार 4% मुस्लिम कोटा फिर से बहाल कर सकती है।
दिलचस्प बात ये है कि सीएम सिद्दारमैया 4% मुस्लिम कोटा छीनने वाली पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार पर ही उसके अदालत में दिए गए हलफनामे को इसकी बहाली का आधार बता रहे हैं। बीजेपी मुख्यमंत्री के दावे को नकार रही है।

मुस्लिम कोटे पर बीजेपी सरकार का फैसला अन्याय- सिद्दारमैया
सोमवार को जिस दिन कर्नाटक के बेलगावी में विधानसभा में मुस्लिम कोटा को लेकर सियासत हो रही थी, वहां से करीब 1,800 किलोमीटर दूर नई दिल्ली में देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि धार्मिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
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मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने विधानसभा में कहा कि बीजेपी सरकार (पूर्ववर्ती) के मुस्लिम कोटे के पुनर्वितरण के फैसले से अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा, 'पिछली बीजेपी सरकार ने पंचमसाली लिंगायतों को 2ए कोटा में नहीं शामिल किया। बल्कि, इसने 2बी श्रेणी से 4% मुस्लिम कोटा छीन लिया और उसे 2% वीरशैव-लिंगायतों और 2% वोक्कालिगा में 3ए और 3बी श्रेणियों में वितरित कर दिया।'
पंचमसाली लिंगायतों के आरक्षण की मांग के बीच कांग्रेस सरकार ने दिया संकेत
सीएम यह सब तब कह रहे थे, जब अपनी मांगों को लेकर पंचमसाली लिंगायतों की ओर से विधानसभा के घेराव की योजना पर उनकी सरकार ने रोक लगा रखी थी, जिसके खिलाफ सदन में विपक्षी बीजेपी और जेडीएस के विधायक प्रदर्शन कर रहे थे।
बीजेपी ने हलफनामा देकर मुसलमानों का कोटा बहाल रखने की बात कही- मुख्यमंत्री
सिद्दारमैया ने बीजेपी पर दो तरह की बातें करने का आरोप लगाते हुए यहां तक दावा कर दिया कि 'हालांकि, इसी बीजेपी ने बाद में सुप्रीम कोर्ट के सामने हलफनामा देकर कहा कि वह यथास्थिति बरकार रखेगी और मुसलमानों का कोटा जारी रहेगा।'
सीएम ने सदन में हलफनामा पेश करने की किया है दावा
जब सीएम के दावे पर विपक्ष के नेता आर अशोका और सीएन अश्वथनारायण समेत बीजेपी के विधायकों ने सबूत मांगा तो सिद्दारमैया ने कहा, 'मैं कल (मंगलवार) पिछली सरकार की ओर से दायर हलफनामा पेश करूंगा,जिसमें उन्होंने पिछली आरक्षण नीति को बनाए रखना स्वीकार किया है।'
इसी दौरान बीजेपी नेता बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने अनुरोध किया है हलफनामे को बुधवार तक सदन में पेश ना करें। उन्होंने इसके लिए पंचमसाली लिंगायतों के आंदोलन का हवाला दिया, जो अलग से 2ए आरक्षण की मांग कर रहे हैं। इसपर सिद्दारमैया ने सहमति जता दी।
धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता- सुप्रीम कोर्ट
जिस दिन कर्नाटक की कांग्रेस सरकार राज्य विधानसभा में मुसलमानों को पहले मिल चुके 4% आरक्षण को फिर से बहाल करने का संकेत दे रही थी, उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के एक फैसले से जुड़े मामले में मौखिक टिप्पणी में कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
यह मामला वहां 77 जातियों को ओबीसी में शामिल करने के ममता सरकार के फैसले से जुड़ा है, जिनमें से अधिकतर मुसलमान हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन ने इसी पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है।
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कर्नाटक में मुसलमानों के लिए ओबीसी आरक्षण के तहत बनी 2बी श्रेणी में पहले 4% आरक्षण का प्रावधान था। लेकिन, 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले तत्कालीन बसवराज बोम्मई की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने मुसलमानों के आरक्षण का प्रावधान खत्म कर दिया और उसे लिंगायतों और वोक्कालिगा समुदायों में बराबर-बराबर में बांट दिया, जिनका क्रमश: 3ए और 3बी में वर्गीकरण किया गया है।












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