वो दो फैसले जिनमें दिखी मोदी की दबंगई, नहीं चली अमेरिकी दादागिरी
नई दिल्ली। पिछले 24 घंटे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो समीकरण बदलें हैं, वह काफी हैरान करने वाले हैं। ये समीकरण भारत से ही जुड़े हुए हैं और इसके केंद्र में है मोदी सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन दो दिनों की भारत यात्रा पर आए और इसके बाद जो कुछ हुआ वह हर किसी ने देखा। नई दिल्ली और मॉस्को के बीच 39,000 करोड़ की एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ट्राइम्स की डील को सील किया। इसके साथ ही भारत ने इसी समय फैसला लिया कि वह चार नवंबर के बाद भी ईरान से तेल का आयात जारी रखेगा। निर्णय आपको सुनने में हो सकता है साधारण लग रहे हों लेकिन दोनों ही फैसलों ने विदेश नीति को लेकर भारत की एक नई छवि दुनिया के सामने पेश की है। भारत ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा और अपने हितों के मामले पर किसी के भी आगे नहीं झुकेगा, फिर चाहे वह अकंल सैम यानी अमेरिका ही क्यों न हो। ये भी पढ़ें-एस-400 ट्राइम्फ मिसाइल डील: सबसे बड़ा सौदा फिर भी क्यों चुप रहे मोदी और पुतिन?

एस-400 डील-प्रतिबंधों का डर फिर भी डील सील
शुक्रवार को हैदराबाद हाउस में मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई। इस मुलाकात में भारत ने रूस के साथ पांच एस-400 ट्राइम्स मिसाइल शील्ड सिस्टम की डील को साइन कर ही डाला। सौदे के साथ ही इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) की ताकत में दोगुना इजाफा होगा। पांच बिलियन डॉलर यानी 39,000 करोड़ रुपए की इस डील के बाद भारत को पांच सिस्टम मिलेंगे। गौर करने वाली बात यह है कि इस डील पर ही अमेरिका की ओर से मंगलवार को प्रतिबंधों की धमकी आई थी। पिछले दिनों इसी डील के चलते अमेरिका ने चीन पर काटसा कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिए हैं। सूत्रों की मानें तो गुरुवार को पुतिन से डिनर पर मुलाकात करने के बाद शुक्रवार की सुबह तक पीएम मोदी यह फैसला ले चुके थे कि वह इस डील को मुकाम पर पहुंचाकर रहेंगे। हुआ भी यही यहां तक कि अमेरिका की तरफ से शाम होते-होते बयान आ गया कि काटसा कानून का मतलब मित्रों की ताकत को नुकसान पहुंचाना नहीं है। आपको बता दें कि इस कानून के तहत अमेरिकी ने हर उस देश पर प्रतिबंधों का विकल्प खुला रखा है जो रूस के साथ किसी भी तरह के रक्षा संबंध में शामिल होंगे।

ईरान से तेल का आयात रहेगा जारी
एस-400 डील के बाद ही खबर आई कि भारत, ईरान से तेल का आयात जारी रखेगा। शुक्रवार को इसका पहला उदाहरण उस समय देखने को मिला जब पब्लिक सेक्टर की कंपनियों इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी) तथा मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोरसायन लि. (एमआरपीएल) ने ईरान से 12.5 लाख टन कच्चे तेल के आयात के लिये कॉन्ट्रैक्ट किया । कंपनियां डालर की जगह रुपए में तेल का व्यापार करने की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक इन कंपनियों ने नवंबर में ईरान से आयात के लिये 12.5 लाख टन तेल के लिये कॉन्ट्रैक्ट किया किया है। उसी माह से ईरान के तेल क्षेत्र पर पाबंदी शुरू होगी। चार नवंबर से ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंध शुरू हो जाएंगे। अमेरिका ने भारत समेत उन तमाम देशों को चेतावनी दी है जो ईरान के साथ व्यापार जारी रखे हैं। अमेरिका ने कहा था कि चार नवंबर तक भारत समेत बाकी देशों को ईरान से व्यापार जीरो करना होगा।

विदेश नीति पर सख्त भारत
रूस और भारत के संबंध करीब छह दशक पुराने हैं। यही हाल भारत और ईरान के संबंधों का है। रूस अभी तक भारत के लिए हथियार सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है। रणनीतिक मसलों के जानकार आरआर सुब्रहमण्यम ने कहा है, 'रूस हमारा बहुत अच्छा दोस्त रहा है और समय-समय पर हम उसे परख चुके हैं। मैं बहुत खुश हूं कि अब भारत की तरफ से थोड़ी हिम्मत दिखाई जा रही है।' उन्होंने कहा कि भारत इस बार साफ कर देगा कि वह किसी भी दबाव में नहीं आएगा। यूनाइटेड नेशंस (यूएन) में अमेरिकी राजदूत निकी हेले जब भारत दौरे पर आई थीं तो उन्होंने पीएम मोदी को संदेश दिया था। यह संदेश ईरान से जुड़ा था और बताया जा रहा है कि अमेरिका ने भारत से स्पष्ट कहा है कि ईरान के साथ अपने संबंधों पर दोबारा सोचे। साफ है कि पीएम मोदी और उनकी सरकार ने अमेरिका की परवाह न करते हुए भी साहसिक फैसले लेने में हिचक नहीं दिखाई।
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