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एस-400 ट्राइम्‍फ मिसाइल डील: सबसे बड़ा सौदा फिर भी क्‍यों चुप रहे मोदी और पुतिन?

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नई दिल्‍ली। शुक्रवार को भारत और अमेरिका के बीच 39,000 करोड़ रुपए की कीमत वाली एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की डील फाइनल हो गई। सभी हैरान थे कि जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमिर पुतिन कई घंटों तक चली मुलाकात के बाद साझा बयान जारी कर रहे थे तो दोनों की तरफ से इस डील का कोई जिक्र क्‍यों नहीं किया गया। सिर्फ इतना ही नहीं विदेश मंत्रालय की ओर से भी जो बयान जारी किया गया है उसमें भी सिर्फ एक लाइन में ही इस डील का जिक्र है। राफेल फाइटर जेट के विवादों में घिरी केंद्र सरकार कहीं न कहीं इस बार सेफ गेम खेलना चाहती थी। बिजनेड स्‍टैंडर्ड की ओर से दी गई जानकारी की मानें तो राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल की वजह से सरकार ऐसा करने पर मजबूर हुई। ये भी पढ़ें-S-400 Triumf missile:लाहौर से होने वाला हर हमला कुछ सेकेंड्स में होगा फेल

पीएम मोदी ने कब-कब जवानों के बीच पहुंचकर सबको चौंकाया ?

अमेरिका की ओर से दी गई चेतावनी

अमेरिका की ओर से दी गई चेतावनी

एस-400 की डील भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी और अहम डिफेंस डील साबित हुई है। बिजनेस स्‍टैंडर्ड में अजय शुक्‍ला की रिपोर्ट पर अगर यकीन करें तो जहां रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण इस डील के पक्ष में थीं तो वहीं एनएसए अजित डोवाल नहीं चाहते थे कि यह डील अभी हो। अमेरिका को लेकर अलर्ट डोवाल चाहते थे कि यह डील कुछ और दिनों बाद हो। डोवाल सितंबर में अमेरिका की यात्रा पर गए थे। यहां पर उन्‍होंने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपेयो, रक्षा मंत्री जिम मैटिस और अमेरिकी समकक्ष जॉन बोल्‍टन से मुलाकात की थी। रिपोर्ट की मानें तो इनकी ओर से डोवाल को चेतावनी देने के अंदाज में कहा गया था कि एस-400 की खरीद के बाद अमेरिका भारत पर काटसा कानून के तहत प्रतिबंध लगा सकता है। हालांकि डोवाल को यह भी बताया गया था कि जरूरी नहीं है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भारत को कुछ छूट देंगे। ये भी पढ़ें-एस-400 सिस्‍टम की डील से इंडियन एयरफोर्स को क्‍या होगा फायदा

डोवाल नहीं चाहते थे कोई मिलिट्री डील हो

डोवाल नहीं चाहते थे कोई मिलिट्री डील हो

डोवाल जब अमेरिका से वापस लौटे तो उन्‍होंने रोसोबोरोनेक्‍सपोर्ट से आए एक उच्‍च स्‍तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। यह रूस की रक्षा आयात एजेंसी है। डोवाल की मुलाकात मोदी-पुतिन की मीटिंग से पहले हुई और इस मीटिंग में उन्‍होंने, उन डिफेंस डील के बारे में जानकारी ली जो मोदी-पुतिन की मुलाकात के दौरान साइन होने वाली थीं। डोवाल ने एस-400 के कॉन्‍ट्रैक्‍ट को लेकर आपत्ति थी। डोवाल वर्तमान परिपेक्ष्‍य और अमेरिकी दबाव की वजह से परेशान थे। पुतिन गुरुवार को भारत पहुंचे और रूस को बता दिया गया था कि कोई भी डिफेंस डील समिट के दौरान साइन नहीं होगी। लेकिन पुतिन ने पहले गुरुवार को डिनर पर और फिर शुक्रवार को द्विपक्षीय वार्ता के दौरान रक्षा सौदों पर विस्‍तार से पीएम मोदी से चर्चा की।

विदेश मंत्रालय ने भी बस एक लाइन में दी जानकारी

विदेश मंत्रालय ने भी बस एक लाइन में दी जानकारी

बिजनेस स्‍टैंडर्ड ने वार्ता पर करीब से नजर रखे हुए एक सूत्र के हवाले से बताया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने दरअसल एस-400 के कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर शुक्रवार को सुबह निर्णय ले लिया था। वह इस कॉन्ट्रैक्‍ट पर आगे बढ़ने को तैयार थे। इसके बाद भी इस बात का ऐलान उस तरह से नहीं किया जा सका जिस तरह से साल 2015 में पीएम मोदी और पूर्व फ्रेंच राष्‍ट्रपति फ्रैंकोइस होलांद ने राफेल डील का ऐलान किया था। विदेश मंत्रालय की ओर से भी जो बयान जारी किया गया है उसमें लिखा है, 'दोनों पक्ष एस-400 एयर मिसाइल सिस्‍टम के कॉन्‍ट्रैक्‍ट के निष्‍कर्ष पर पहुंचने का स्‍वागत करते हैं।'

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English summary
Prime Minister Narendra Modi and Russian President Vladimir Putin did not mention a single word on S-400 deal in their joint statement on Friday.
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