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कोरोना वायरस से बचना है तो साबुन से बेहतर कुछ भी नहीं, जानिए कैसे ?

नई दिल्ली- कोरोना वायरस को अब वैश्विक महामारी घोषित किया जा चुका है। दुनियाभर के लगभग हर हिस्से में इसका प्रकोप बढ़ता जा रहा है। लेकिन, इसकी कहीं भी कोई दवा मौजूद नहीं है। यानि, बचाव ही इससे बचने का एकमात्र उपाय है और ऐसे में सवाल उठता है कि एक सामान्य इंसान ऐसा क्या करे, जिससे वह इस वायरस की चपेट में आने से बच सके। इस पर ऑस्ट्रेलिया के एक प्रोफेसर ने हाल में काफी काम किया है और उन्होंने बताया है कि अगर कोरोना को हराना है तो साबुन से बेहतर कोई विकल्प इस वक्त मौजूद नहीं है। हम आपके लिए ऑस्ट्रेलिया के साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ केमिस्ट्री के प्रोफेसर पाल थॉर्डर्सन से मिली जानकारी के आधार पर कोरोना से निपटने में साबुन की खासियत सामने लेकर आए हैं, जिसमें उन्होंने वो सारे कारण बताएं हैं कि कैसे एक साबुन आपकी सारी चिंताओं को दूर करते हुए आपको कोरोना जैसी महामारी से रक्षा करने में सक्षम है।

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    कोरोना वायरस की संरचना समझिए

    कोरोना वायरस की संरचना समझिए

    कोरोना वायरस से बचाव के लिए साबुन सबसे सस्ता, सुलभ और सुरक्षित उपाय कैसे है, इसपर चर्चा करने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि यह वायरस किन चीजों से मिलकर बना है। कोरोना समेत ज्यादातर वायरस आएनए, प्रोटीन और लिपिड से मिलकर ब्लॉक्स के रूप में बने होते हैं। हालांकि, इन तीनों का आपस में जुड़ाव बहुत ही कमजोर होता है। इनमें लिपिड की भूमिका सबसे अहम होती है, जो तीनों को आपसे में जोड़े रहता है, लेकिन ये भी सच है कि लिपिड की वजह से ही वायरस का बाहरी हिस्सा सबसे कमजोर रहता है और वह लिपिड ही होता है। ये तीनों मिलकर खतरनाक वायरस का काम करते हैं। लेकिन, क्योंकि इनकी आपसी संरचना बहुत ही कमजोर होती है, इसीलिए इन्हें अलग-अलग करके नष्ट करने के लिए भी ज्यादा शक्तिशाली केमिकल की जरूरत नहीं है।

    किसी भी सतह से कैसे चिपकता है कोरोना वायरस ?

    किसी भी सतह से कैसे चिपकता है कोरोना वायरस ?

    किसी भी दूसरे वायरस की तरह कोरोना वायरस का आकार भी 50 से 200 नैनोमीटर के बीच का होता है। जब इससे संक्रमित व्यक्ति खांसता है या छींकता है तो उससे निकले छोटे-छोट बूंद किसी भी सतह पर जाकर चिपक जाते हैं और तुरंत सुखने भी लगते हैं। लेकिन, उसमें मौजूद वायरस तब भी ऐक्टिव ही रहता है। खासकर लकड़ी, कपड़ों और त्वचा पर यह वायरस बहुत ही ज्यादा सक्रिय रहता है। इनमें भी त्वचा इसके लिए सबसे आदर्श जगह होती है, जिसपर मौजदू डेड सेल के प्रोटीन और फैटी एसिड फौरन कोरोना वायरस से घुलमिल जाते हैं। मान लीजिए कोई वायरस किसी सतह पर मौजूद है और आप हाथ से उस सतह को छूते हैं तो वह वायरस आपके हाथ में चला आता है।

    हाथ के जरिए संक्रमण के ज्यादा आसार

    हाथ के जरिए संक्रमण के ज्यादा आसार

    हाथ में वायरस होने के बावजूद भी आप कोरोना वायरस के संक्रमण से बचे रह सकते हैं, जब तक कि आप उस हाथ से अपने चेहरे का कोई भाग नहीं छूते। दिक्कत यहीं से शुरू होती है। यहां से वायरस सांस या मुंह और आंखों के आसपास मौजूद म्यूकस मेम्बरेन्स के माध्यम से आपको संक्रमित कर देता है, यदि आपका इम्यून सिस्टम इतना मजबूत न हो कि वह इस वायरस को खत्म कर सके। माना जा रहा है कि यह कोरोना वायरस अनुकूल सतह पर कुछ घंटों से लेकर 24 घंटे तक सक्रिय रह सकता है। अलबत्ता, नमी, सूरज की रोशनी और ज्यादा तापमान इसको ज्यादा देर तक जिंदा नहीं रहने देते।

    साबुन आपका रक्षक साबित हो सकता है

    साबुन आपका रक्षक साबित हो सकता है

    अधिकतर इंसान दो से पांच मिनट में कम से कम एक बार अपना चेहरा जरूर छू लेते हैं। अगर एक बार कोरोना आपके हाथ तक पहुंच गया तो फिर आपको संक्रमण से बच पाना मुश्किल है। इसीलिए जरूरी है कि आपका हाथ सिर्फ पानी से नहीं, बल्कि साबुन से अच्छी तरह धुला हुआ हो। साबुन से हाथ धोना एक तरह से इस वायरस से बचने का रामबाण उपाय है। इसकी वजह ये है कि साबुन में जो amphiphiles नाम के तैलीय पदार्थ मौजूद होते हैं, उसकी संरचना बहुत हद तक वायरस के ऊपरी सतह पर मौजूद लिपिड की तरह होती है। जैसे ही दोनों मिलते हैं वायरस की पूरी संरचना बिखर जाती है और साबुन एवं पानी के साझा असर से त्वचा से अलग होकर धुल जाता है। हाथ को अच्छे से रगड़-रगड़ कर धोने की सलाह देने की भी वजह यही है कि अगर किसी भी कोने में वायरस चिपका हो तो वहां तक साबुन पहुंचे और वायरस बिखर कर खत्म हो जाए।

    सैनिटाइजर और वाइप्स भी हैं कारगर

    सैनिटाइजर और वाइप्स भी हैं कारगर

    कीटाणुनाशक, वाइप्स या जेल भी कोरोना वायरस को दूर रखने में कारगर हो सकते हैं, बशर्ते कि उनमें अल्कोहल की मात्रा ज्यादा हो। अगर आप वाइप्स या जेल से हाथ साफ करते हैं तो उसमें मौजूद इथेनॉल को हाथ के हर हिस्से और कोने-कोने में पहुंचाना उतना आसान नहीं रहता। लेकिन, साबुन से वह काम ज्यादा आसानी और सुरक्षित तरीके से संभव है। यही नहीं इन चीजों में मौजूद एंटी-बैक्ट्रियल एजेंट्स भी वायरस की संरचना को तोड़ने में ज्यादा असरदार साबित नहीं होते। यानि, साबुन सबसे बेहतर विकल्प है, लेकिन अल्कोहल आधारित वाइप्स भी सही है, क्योंकि साबुन का इस्तेमाल हर जगह करना मुमकिन नहीं है।

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