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Dr. Ganesh Baraiya: मि‍लिए भारत के सबसे छोटे कद के डॉक्‍टर से, जिनकी कभी सर्कस वालों ने लगाई थी 5 लाख की बोली

Dr. Ganesh Baraiya:"जब हालात मुश्किल हों, तो बस एक कदम आगे बढ़ाते रहो और चलते रहो। कभी हार मत मानो।" कुछ ऐसी सोच गुजरात के भावनगर स्थित सर तख्तासिंह जी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में मरीजों का इलाज कर रहे डॉ. गणेश बरैया की है।

इनकी संघर्ष से लेकर सफलता की कहानी लाखों लोगों के प्रेरणादायी है। 72% दिव्यांगता के बावजूद चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देकर डॉ. बरैया ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और संघर्ष से किसी भी सीमा को पार किया जा सकता है।

Dr Ganesh Baraiya

भारत के सबसे छोटे कद के Dr. Ganesh Baraiya

बीबीसी को दिए हालिया इंटरव्‍यू में डॉ गणेश ने अपने जीवन के संघर्ष की जो कहानी सुनाई वो वाकई में रोंगटे खड़ी कर देने वाली हैं। उन्‍होंने खुद बताया कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में जब लोग तीन फुट के व्यक्ति को स्टेथोस्कोप लटकाकर मरीजों की जांच करते देखते हैं, तो वे अक्सर चकित होकर निहारते रह जाते हैं।

Dr. Ganesh Baraiya कौन हैं?

गोरखी गांव के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे गणेश, नौ भाई-बहनों में आठवें स्थान पर हैं। उनके परिवार में बौनेपन (ड्वार्फिज्म) से जूझने वाले अकेले सदस्य होने के बावजूद, उन्होंने बचपन में कई कठिनाइयों का सामना किया।

सर्कस में पांच लाख की लगी थी बोली लेकिन...

बीबीसी को दिए इंटरव्‍यू में डॉक्‍टर बरैया ने बताया एक समय ऐसा भी आया जब सर्कस के लोग उन्हें खरीदने का प्रयास कर रहे थे, जिसे उनके पिता ने तुरंत ठुकरा दिया। इस घटना ने परिवार को यह निश्चय करने के लिए प्रेरित किया कि गणेश को सम्मान और समान अवसरों के साथ शिक्षा दी जाएगी।

NEET क्लियर कर लिया लेकिन एडमीशन नहीं मिला

गणेश की बहनें उन्हें गोद में उठाकर स्कूल ले जाती थीं और उनके पिता कंधे पर बैठाकर पढ़ाई के लिए भेजते थे। परिवार का यह समर्थन उन्हें मजबूत बनाने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला रहा। 2018 में दिव्यांग कोटे के तहत उन्होंने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने एमबीबीएस में दाखिला देने से मना कर दिया।

डॉ. गणेश बरैया ने नहीं मार हार

MCI के फैसले के खिलाफ गणेश ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। गुजरात कोर्ट ने भी फैसला उनके खिलाफ रखा। लेकिन डॉ. दलपत कटारिया के समर्थन से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। एक साल की लंबी सुनवाई के बाद, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने गणेश के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसके बाद उन्होंने भावनगर स्थित मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की।

आसान नहीं था डॉक्‍टर बनने का सफर

पढ़ाई के दौरान गणेश को लंबी परीक्षाओं में समय की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। उनके शिक्षकों और सहपाठियों ने हर संभव मदद की, नोट्स पढ़कर सुनाने से लेकर परीक्षा में अतिरिक्त समय देने तक। उन्होंने एक ही बार में सभी सेमेस्टर की परीक्षाएं पास कर यह साबित किया कि उनका जुनून और समर्पण अद्वितीय है। डॉ. गणेश बरैया अब भावनगर के सर टी. जनरल अस्पताल में तैनात हैं। नॉन-सर्जिकल फील्ड में पोस्ट-ग्रेजुएशन की तैयारी कर रहे हैं। उनका संघर्ष और सफलता लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

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