नागरिकता केस में राहुल गांधी को बड़ा झटका, केंद्र सरकार भी अब मामले में शामिल, क्या दर्ज होगी FIR?
Rahul Gandhi Citizenship Controversy Case: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर चल रहे विवाद में अब केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया गया है। लखनऊ हाई कोर्ट की एकल पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार को शामिल करने की अनुमति देते हुए सुनवाई को सार्वजनिक न करके चैंबर में आयोजित करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई की तारीख 6 अप्रैल 2026 तय की गई है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.बी. पांडे ने अदालत से आग्रह किया कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेज अत्यंत गोपनीय हैं, इसलिए इसे सार्वजनिक अदालत में न किया जाए। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने इस अनुरोध को स्वीकार कर सुनवाई चैंबर में करने का निर्देश दिया।

गृह मंत्रालय के अवर सचिव विवेक मिश्रा और सहायक सेक्शन अधिकारी प्रणव राय दस्तावेजों के साथ मौजूद रहे। न्यायालय ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद उन्हें वापस संबंधित विभाग को सौंप दिया।
याचिकाकर्ता को मिली केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति
इस मामले में याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर, जो कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता हैं, ने केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने का अनुरोध किया था। अदालत ने इसे मंजूरी दे दी, हालांकि शिशिर की ओर से 'पार्ट हर्ड' के रूप में मामले को सूचीबद्ध करने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला अभी एडमिशन स्टेज पर है।
क्या है मामला, क्या राहुल गांधी पर क्या लगे हैं आरोप?
शिशिर ने यह याचिका लखनऊ की विशेष MP/MLA अदालत के 28 जनवरी 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की थी, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। याचिका में शिशिर ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी के नागरिकता और पासपोर्ट विवरण में कई विसंगतियां हैं। उन्होंने भारतीय दंड संहिता, पासपोर्ट अधिनियम और राजकीय गोपनीयता अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने और विस्तृत जांच की मांग की है।












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