राबड़ी देवी की बिहार के चुनाव में कितनी अहम भूमिका

पटना से करीब सत्तर किलोमीटर दूर विक्रम विधानसभा क्षेत्र में है वजीरपुर गांव. बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की पांच-सात गाड़ियों का काफिला इस गांव की पतली सड़क में मुड़ जाता है.
उनका स्वागत करने के लिए मोटरसाइकिल पर राष्ट्रीय जनता दल के कुछ युवा कार्यकर्ता नज़र आते हैं जो आगे-आगे चले रहे हैं और लालू राबड़ी जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं.
राबड़ी देवी गाड़ी में बैठे-बैठे लोगों का अभिवादन कर रही हैं और हर दो तीन घर के बाद गाड़ी रुक जा रही है. स्थानीय कार्यकर्ता लोगों से कह रहे हैं कि ''मुख्यमंत्री जी तोरा कन एलकून हन. वोट मांगे.''
उनकी गाड़ी के सामने महिलाओं की भीड़ जुट रही है, राबड़ी देवी कोशिश कर रही हैं कि सबका हाथ पकड़ पाएं. एक घर के सामने उनकी गाड़ी रुक जाती है, वह उतरती हैं, उनको गाड़ी से उतरने और चलने में दिक्कत भी महसूस हो रही है लेकिन वह पक्के वाले घर में आसानी से चली जाती हैं.
गांव के इस घर में रोकने की एक वजह स्थानीय कार्यकर्ता बताता है, ''यह घर रामकृपाल यादव जी के कार्यकर्ता का है, अब मैडम आ गई हैं तो सब ठीक हो जाएगा.''
राबड़ी देवी उस परिवार से अपनी बेटी के पक्ष में वोट मांगती हैं. कहती हैं कि लालू जी जेल में हैं.
इस सीट की अहमियत
पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र में राबड़ी देवी का ये प्रचार का अंदाज़ है. सुबह दस बजे से ही वह इलाके में डोर टू डोर कैंपेन कर रही हैं. प्रचार का यह सिलसिला रात के दस बजे तक चलता है.
राबड़ी देवी के साथ-साथ प्रचार में उनके सहायक की भूमिका निभाने वाले भोला यादव बताते हैं, "रात में लौटने का समय तो निश्चित नहीं ही रहता है. लोगों का समर्थन जिस तरह से मिल रहा है, उससे ज़ाहिर है कि मीसा भारती जी की जीत तय है."
राबड़ी देवी इस सीट की अहमियत को समझती हैं, यहां से 2009 में लालू प्रसाद यादव को जनता दल यूनाइटेड के रंजन यादव से हार का सामना करना पड़ा था जबकि 2014 में उनकी बेटी मीसा भारती को रामकृपाल यादव ने हराया था.
ये भी दिलचस्प है कि रंजन यादव कभी लालू प्रसाद यादव के सलाहकार माने जाते थे और रामकृपाल यादव उनके सहयोगी. उन चुनावी नतीजों से यह भी ज़ाहिर हुआ था कि यादव-मुस्लिम वोट केवल राजद को ही नहीं मिलते.
लिहाज़ा राबड़ी देवी इस बार कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं. दिन की शुरुआत होते ही वह जिन इलाकों में जाती हैं, उन इलाकों के उन कार्यकर्ताओं के नाम देख ले रही हैं जिसके नाराज़ होने की ख़बर उन तक पहुंच रही है, उनकी कोशिश हर हाल में उस कार्यकर्ता से मिलने की होती है.
ज़ाहिर है कि राबड़ी देवी और उनके परिवार के लिए ये सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है. बेटी मीसा भारती के अलावा, दोनों बेटे तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव इस इलाके में चुनाव प्रचार कर रहे हैं.
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इसको देखकर ही बिहार के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील मोदी कहते हैं कि पूरा परिवार, अपने भ्रष्टाचार को बचाने में जुटा है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पाटलिपुत्र लोकसभा सीट के पालीगंज की अपनी चुनावी सभा में लालू परिवार पर निशाना साधते हुए इसे बिहार का भ्रष्ट परिवार बताया.
राबड़ी देवी अपने चुनाव प्रचार के बीच में कहती हैं, "बिहार की जनता यह देख रही है कि सरकारी पैसों का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में कौन पार्टी कर रही है, कितना पैसा लुटाया जा रहा है, ये पैसा भारतीय जनता पार्टी का है, आज प्रधानमंत्री जी को कस्बों तक में सभा करनी पड़ रही है, नुक्कड़ सभा करनी पड़ रही है."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, अपनी चुनाव सभाओं में लालू परिवार के भ्रष्टाचार के साथ-साथ विपक्ष के गठबंधन को भी महामिलावटी बताते रहे हैं.
इस पर राबड़ी देवी कहती हैं, ''हमने पांच दलों से हाथ मिलाया है. उपेंद्र कुशवाहा हैं, कांग्रेस है, मांझी जी हैं, मुकेश सहनी है और राजद है, हम पांच लोगों का गठबंधन है. ये मिलावटी है तो उनका जो 40 दलों से गठबंधन है वो क्या है.''
वहीं उनके सहयोगी भोला यादव कहते हैं, ''देखिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सब के सब एक परिवार को निशाना बना रहे हैं, वह मुद्दों पर बात नहीं करना चाहते हैं. जबकि हमारे नेता तेजस्वी यादव रोज़गार, खेती-किसानी और आरक्षण जैसे मुद्दों की बात कर रहे हैं.''
हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान राबड़ी देवी आम लोगों के बीच ज़्यादा भाषण नहीं देती हैं, बस इतना ही कहती हैं कि लालू जी जेल में हैं, उनको फंसाया गया है.
कोर्ट के फैसले से लालू प्रसाद यादव को जेल की सज़ा हुई है, इस पर राबड़ी देवी कहती हैं, ''लालू जी ने पैसा खा लिया हो ऐसा तो नहीं है ना, कोई सबूत मिला है क्या इसका. उन पर षडयंत्र करने का केस है, जिसमें उनको फंसाया गया और अभी चुनाव के समय में उनको जेल से निकलने नहीं दिया गया.''
राबड़ी देवी के काफ़िले के साथ मोटरसाइकिल पर चल रहे लड़कों के बीच अचानक से गहमागहमी देखने को मिलती है, पूछने पर पता चला कि तेज प्रताप यादव भी इधर ही चुनाव प्रचार करने को निकले हैं.
मोटरसाइकिल पर सवार लड़के तेज प्रताप का स्वागत करने निकल जाते हैं. आगे चलकर मुख्य सड़क पर दोनों की भेंट होती है, इसके बाद तेज प्रताप कार से उतरकर उन युवा कार्यकर्ताओं के साथ बाइक पर आगे की ओर बढ़ जाते हैं.
राबड़ी देवी का काफिला अगले गांव में मुड़ जाता है.
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बेटों के आपसी विवाद को कैसे संभालती हैं?
एक तरफ़ नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, राम विलास पासवान की अगुवाई में बिहार में एनडीए गठबंधन ज़ोरदार जीत के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ लालू प्रसाद यादव के परिवार में दोनों भाईयों के बीच आपसी विवाद की बात भी सामने आती रही है, तो इन सबको कैसे संभाल पाती हैं राबड़ी देवी.
इस सवाल के जवाब में वह कहती हैं, ''कोई विवाद नहीं है दोनों के बीच, साथ में प्रचार तो करिए रहा है. अभी तेज प्रताप आगे गया है, तेजस्वी के साथ कल आरा और नालंदा में भी प्रचार कर रहा था.''
राबड़ी देवी ये भी बताती हैं कि लालू जी जेल में हैं और बिहार के तमाम दिग्गज नेता उनके महज़ 29 साल के बेटे तेजस्वी को टारगेट करने के लिए कई तरह के आरोप लगा रहे हैं, जिसका जवाब बिहार की जनता देगी.

'ये बराबरी की लड़ाई नहीं है'
हालांकि उन्हें इस बात का संतोष है कि तेजस्वी ने पार्टी और महागठबंधन को लड़ाई में ला दिया है. वो कहती हैं कि ये बराबरी की लड़ाई नहीं है, ये अमीर-गरीब की लड़ाई है और यहां की गरीब जनता 40 सीटों पर महागठबंधन के साथ है.
इस प्रचार के दौरान इलाके के एक यादव मतदाता ने पूछने पर बताया, ''पिछली बार रामकृपाल यादव जी को वोट दिया था, वो गलती हो गई, इस बार कोई गलती नहीं होगी.''
वहीं एक दूसरे मतदाता ने बताया कि इलाके में रामकृपाल यादव को यादवों का वोट भी मिलेगा ही, क्योंकि एक जाति का सारा का सारा वोट एक ही उम्मीदवार को कैसे मिलेगा.
विक्रम विधानसभा के एक पासवान मतदाता ने बताया, ''मोदी सरकार ने हम लोगों का आरक्षण काटकर सवर्णों को आरक्षण दे दिया है. हमारा आरक्षण चला जाएगा तो हमारे बच्चे क्या पकौड़े तलने का रोज़गार करेंगे. रामविलास जी कुछ किए ही नहीं.''
पटना से महज 70-80 किलोमीटर दूर इन गांवों की सड़कें बेहद खस्ताहाल हैं. बड़ी-बड़ी एसयूवी को सड़क पर उतारना जोखिम लेने जैसा है. विक्रम के ही कनपा के पास एक बुजुर्ग ने बताया कि रामकृपाल यादव ने कोई काम करवाया होता तब तो सड़क बन पाती.
राबड़ी देवी चुनावी प्रचार के दौरान कहीं ज़्यादा देर तक ठहरती नहीं दिखीं, ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश के लिए धीरे-धीरे ही सही पर उनका काफिला चलता रहा.
'लालू की कमी पूरी कर रही हैं राबड़ी'
भोला यादव बताते हैं, "लालू जी पार्टी के हर इलाके के लोगों को पहचानते थे, कार्यकर्ताओं को नाम से याद रखते थे, यही चुनौती मैडम निभा रही हैं. उनकी कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं. घर से सुबह ही जो नाश्ता खाकर चलती हैं, उसके बाद वक्त नहीं मिलता है, गाड़ी में ही चाय वैगरह ले लेती हैं."
पाटिलपुत्र में राबड़ी देवी अपनी बेटी के लिए वोट तो मांग रही हैं लेकिन चुनाव प्रचार में वह पटना से बाहर नहीं निकली हैं.
इसकी वजह बताते हुए भोला यादव कहते हैं, ''स्वाथ्यगत वजहों से वह बाहर नहीं निकल पा रही हैं. उनका शुगर लेवल काफ़ी बढ़ा हुआ है, बीपी बढ़ा रहता है और बीमारियां भी हैं. नहीं तो वह पूरे बिहार में ज़रूर घूमतीं."
"बिहार में नहीं घूम पाने के बावजूद भी, वह नियमित तौर पर पार्टी के अन्य ज़िलों के कार्यकर्ताओं को फोन करके फीडबैक लेती हैं और आपसी गुटबाज़ी को पीछे छोड़कर एकजुट रहने की अपील करती हैं."
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इसके अलावा वह इस चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर भी सक्रिय दिखती हैं वहां भी लोगों से अपनी बात कहती रहती हैं. हालांकि ये भी कहती हैं कि सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं देखने का वक़्त ही नहीं मिल पाता है.
लेकिन ये ज़ाहिर है कि राबड़ी देवी ये बात समझ रही हैं कि उनका परिवार बेहद मुश्किल दौर से गुज़र रहा है.
लेकिन वह यह भी जानती हैं कि मोर्चा संभाले रखना है और वह उसमें भरसक जुटी हुई हैं. चुनावी नतीजा चाहे जो भी निकले लेकिन इस मुश्किल दौर में तेजस्वी को स्थापित होते देखना उनके लिए इकलौती राहत की बात नज़र आती है.
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