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Global Supply Chain हलचल के बीच करन अडानी ने बताया भारत का रोडमैप, कहा- इंफ्रास्ट्रक्चर बचाएगा अर्थव्यवस्था

Karan Adani News: दुनिया भर में सप्लाई चेन बार-बार झटके झेल रही है और इसका असर वैश्विक व्यापार से लेकर अर्थव्यवस्थाओं तक दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क ही किसी देश को स्थिरता दे सकते हैं। यही बात अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन के मैनेजिंग डायरेक्टर करन अडानी ने एक लीडरशिप समिट में कही।

नई दिल्ली में एक मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित वार्षिक लीडरशिप समिट में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव और बदलते व्यापार मार्गों ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। ऐसे में देशों को अपनी लॉजिस्टिक्स क्षमता मजबूत करने और व्यापार नेटवर्क को विविध बनाना होगा।

Karan Adani

वैश्विक समुद्री रास्तों पर बढ़ता जोखिम

करन अडानी ने कहा कि हाल के पश्चिम एशिया के घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया के कुछ अहम समुद्री रास्तों पर निर्भरता कितनी जोखिम भरी हो सकती है।

उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य, स्वेज नहर और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्गों का जिक्र किया। ये रास्ते वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अगर इन क्षेत्रों में किसी तरह की रुकावट आती है तो उसका असर तुरंत वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ता है। उनके मुताबिक यही वजह है कि अब देशों को मजबूत लॉजिस्टिक्स ढांचा बनाने और वैकल्पिक व्यापार मार्ग तैयार करने पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

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2020 के बाद सप्लाई चेन को लगे कई झटके

करन अडानी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक सप्लाई चेन को लगातार झटके लगे हैं। सबसे पहले कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में व्यापार को प्रभावित किया। इसके बाद अलग-अलग क्षेत्रों में भू-राजनीतिक संघर्षों ने स्थिति को और जटिल बना दिया।

इन घटनाओं के कारण कई देशों और कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ा है। अब कंपनियां पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और क्षेत्रीय सप्लाई नेटवर्क बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।

भारत के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों है अहम?

करन अडानी के अनुसार अडानी ग्रुप द्वारा विकसित किए जा रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म केवल व्यावसायिक परियोजनाएं नहीं हैं बल्कि ये राष्ट्रीय संपत्ति की तरह हैं।उन्होंने कहा कि बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, ऊर्जा और हवाई अड्डों का मजबूत ढांचा भारत की व्यापार क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है। अगर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता है तो उसके बाद व्यापार और आर्थिक गति धियां अपने आप बढ़ने लगती हैं।

करन अडानी ने कहा कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना अभी भी एक बड़ा लक्ष्य है। इसके लिए जरूरी है कि बंदरगाह, सड़क और रेल नेटवर्क, हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक्स सिस्टम आपस में बेहतर तरीके से जुड़े हों। जब ये सभी ढांचे एकीकृत तरीके से काम करते हैं तो सप्लाई चेन ज्यादा तेज और प्रभावी बनती है। इससे उद्योग और व्यापार दोनों को फायदा मिलता है।

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अगले 5 साल में बड़ा निवेश प्लान

अडानी ग्रुप ने आने वाले वर्षों के लिए बड़ा निवेश लक्ष्य तय किया है। करन अडानी ने बताया कि कंपनी अगले पांच साल तक हर साल लगभग दो लाख करोड़ रुपये ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश करने की योजना बना रही है। इन निवेशों में नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली ट्रांसमिशन, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।

रिन्यूएबल एनर्जी और नई तकनीकों पर फोकस

करन अडानी ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी के लिए एक प्रमुख क्षेत्र बना रहेगा। इसके साथ ही बैटरी स्टोरेज जैसी नई तकनीकों पर भी काम किया जा रहा है।

ग्रुप अब सीमेंट, एल्युमिनियम, कॉपर और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रहा है, जो बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

एयरपोर्ट नेटवर्क का भी होगा विस्तार

एविएशन सेक्टर में भी अडानी ग्रुप बड़ा विस्तार करने की योजना बना रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 तक अपने एयरपोर्ट नेटवर्क की यात्री संभालने की क्षमता को 10 करोड़ से बढ़ाकर लगभग 20 करोड़ तक पहुंचाया जाए। यह विस्तार भारत के बढ़ते हवाई यातायात और पर्यटन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए अहम माना जा रहा है।

पोर्ट क्षमता भी दोगुनी करने की योजना

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन वैश्विक स्तर पर भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। कंपनी इजराइल के हाइफा पोर्ट समेत कई अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों का संचालन करती है। करन अडानी के मुताबिक कंपनी 2030 तक अपनी पोर्ट क्षमता को 600 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1,200 मिलियन मीट्रिक टन तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।

इसके साथ ही रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता को 18 गीगावॉट से बढ़ाकर 50 गीगावॉट तक और थर्मल पावर क्षमता को 17 गीगावॉट से बढ़ाकर 45 गीगावॉट तक ले जाने की योजना है।

नेतृत्व में मूल्यों की भी अहम भूमिका

करन अडानी ने कहा कि किसी भी संगठन की तेज वृद्धि के साथ-साथ मूल्यों का होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि गति और पैमाना महत्वपूर्ण हैं, लेकिन संवेदनशीलता और जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी हैं।

उन्होंने अपने पिता और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को अपने लिए प्रेरणा बताया। साथ ही अडानी फाउंडेशन के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में काम कर रहीं डॉ. प्रीति अडानी के योगदान का भी जिक्र किया।

करन अडानी ने कहा कि अडानी ग्रुप भारत की विकास यात्रा में लंबी अवधि तक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य का इंफ्रास्ट्रक्चर आज ही तैयार किया जा रहा है।

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