उल्फा से लेकर लश्कर को हथियार देता दाऊद इब्राहिम
बेंगलुरु। अभी आपने पढ़ा (CLICK ON PREVIOUS) कि कैसे आईएसआई अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को बांग्लादेश शिफ्ट करने की तैयारी में है।अब जानिए कि आखिर कब और कैसे दाऊद पहली बार बांग्लादेश पहुंचा और कैसे वह भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए उल्फा से लेकर लश्कर तक को हथियार सप्लाई करता आ रहा है।

95 में पहुंचा बांग्लादेश
दाऊद इब्राहिम मार्च 1993 में हुए मुंबई ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान भाग गया था। इसके बाद वर्ष 1995 में आईएसआई ने दाऊद को ढाका में एक गैंगस्टर से मिलवाया जिसका नाम कुली खान था।
खान से मिलने के बाद दाऊद ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी छोटा शकील को उसके साथ एक डील फाइनल करने के लिए बांग्लादेश भेजा। डील फाइनल होने के बाद डी गैंग ने अब्दुर रऊफ के साथ जहीर नाम से एक और ऑपरेटिव को बांग्लादेश में अपने कामकाज के लिए अप्वाइंट किया।
आईएसआई ने ली पूरी जिम्मेदारी
पाक की इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश में दाऊद के कामकाज का जिम्मा संभाल रही थी और यहां तक उसने इन लोगों की यात्रा के लिए जरूरी सभी फेक डॉक्यूमेंट्स तक तैयार कराए।
रऊफ जिसे बांग्लादेश पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार किया है वह वही शख्स है जो देश में दाऊद के लिए संपत्ति खरीद रहा था। रऊफ ने ढाका में एक गेस्ट हाउस खरीदा और यही गेस्ट हाउस डी गैंग के लिए बांग्लादेश में इसके संचालन का अहम गढ़ बन गया। जब कभी भी दाऊद ढाका आता तो वह इसी गेस्ट हाउस में रुकता था।
रऊफ से पूछताछ में सामने आए राज
ढाका में पुलिस ने रऊफ से जब पूछताछ की तो जो बातें पता लगीं वह काफी अहम साबित हुईं। यह बात तो सब जानते हैं कि डी गैंग फेक करेंसी के धंधे में एक बड़ा रोल अदा करती है लेकिन इस बात से शायद कम ही लोग वाकिफ हैं कि यह गैंग इस धंधे से हो रही कमाई का एक बड़ा हिस्सा हथियारों को खरीदने में खर्च करता है।
यह हथियार हरकत-उल-जिहादी इस्लामी, जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश, उल्फा और लश्कर-ए-तैयबा को सप्लाई किए जाते हैं। डी कंपनी ने धीरे-धीरे हथियारों के इस काम को बांग्लादेश से करना शुरू कर दिया। पहले यही काम वह पाकिस्तान से कर रही थी।
अमेरिका पर हुए हमले के बाद इसे पूरे काम को बांग्लादेश से अंजाम दिया जाने लगा। चिंटगांव में डी नेटवर्क का सबसे बड़ा कैंप है और खास बात है कि चिटगांव बर्दवान ब्लास्ट के आरोपियों का घर है।












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