'परिवारवाद' वाले तंज पर क्यों उखड़ गए मल्लिकार्जुन खड़गे? राजनीति में कांग्रेस चीफ के परिवार का क्या है इतिहास
Congress president Mallikarjun Kharge: राज्यसभा में भाजपा सांसद घनश्याम तिवारी ने नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की राजनीति और परिवारवाद को लेकर कुछ तंज कसा तो वे बहुत ही नाराज हुए। उन्होंने सभापति जगदीप धनकड़ से अनुरोध किया कि इन शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाए।
परिवारवाद जैसी टिप्पणियों से कांग्रेस अध्यक्ष इतने आहत हो गए कि एक समय उन्होंने सदन में यहां तक कह दिया कि ऐसे माहौल में वह ज्यादा जीवित नहीं रहना चाहते हैं। हालांकि, सभापति धनकड़ ने 82 वर्षीय नेता विपक्ष की लंबी उम्र की कामना की।

परिवारवाद वाली टिप्पणी पर क्या बोले खड़गे?
खड़गे ने बीजेपी सांसद घनश्याम तिवारी की ओर से उनपर की गई टिप्पणी को लेकर कहा, 'मुझे बुरा लगा......पहला जेनरेशन है मेरा...मैं अकेला ही पॉलिटिक्स में हूं...इसके पीछे मेरे बाप नहीं थे....और मेरी मां नहीं थी...वे तो सब मर गए थे....'
उन्होंने तिवारी की टिप्पणी को लेकर आगे कहा, '...कि इनका पूरा खानदान ही पॉलिटिक्स में है....क्या बोलते हैं...ऐसी उन्होंने टीका की....अगर मैं निकालूंगा तो कितने यहां परिवारवाद बैठे हैं.....उसे हटाना चाहिए (बीजेपी सांसद की टिप्पणी को)...मैं आपसे विनती करता हूं....'
'इस माहौल में और ज्यादा जीना नहीं चाहता'
इससे पहले खड़गे ने अपने परिवार के बारे में बताया कि वह राजनीति में आने वाले पहले व्यक्ति हैं। वे बहुत निचले स्तर से राजनीति में कदम रखकर आज राज्यसभा में विपक्ष के नेता पद पर बैठे हैं। इसी दौरान उन्होंने यहां तक कहा कि 'मेरे पिताजी 85 साल की उम्र में गुजर गए...(बीच में उन्हें रोकते हुए सभापति ने कहा कि मैं चाहता हूं कि आप 95 साल से भी ज्यादा जीएं...)....इस माहौल में और ज्यादा जीना नहीं चाहता....'
खड़गे और परिवारवाद का मुद्दा नया नहीं है
यह बात सही कि खड़गे राजनीति में आने वाले अपने परिवार के पहले सदस्य हैं। यह भी सही है कि उनके पांच बच्चों में से चार बच्चे राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। लेकिन, जबसे उन्होंने अपने बेटे प्रियांक खड़गे को सियासत में आगे बढ़ाया है, उनपर वंशवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगने शुरू हुए हैं।
खड़गे के बेटे कर्नाटक सरकार में कद्दावर मंत्री हैं
प्रियांक अभी कर्नाटक में सिद्दारमैया सरकार में बहुत ही प्रभावशाली कैबिनेट मंत्री हैं। चित्तपुर के एमएलए के पास इलेक्ट्रॉनिक्स,आईटी/बीटी, ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जैसे बड़े विभाग हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की राजनीति में उनका एक दबदबा कायम हो चुका है।
बेटे प्रियांक के लिए खड़गे ने छोड़ी थी चित्तपुर सीट
मल्लिकार्जुन खड़गे ने 2008 में ही चित्तपुर सीट अपने बेटे प्रियांक के लिए छोड़ी थी। हालांकि वे पहला ही चुनाव हार गए थे। लेकिन, 2013, 2018 और 2023 में यहां से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं।
कर्नाटक में पहले जब सिद्दारमैया की सरकार बनी थी तभी मल्लिकार्जुन पर अपने बेटे को मंत्री बनाने के लिए दबाव डालने के आरोप लगे थे। लेकिन, आज प्रियांक कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में एक स्थापित चेहरा बन चुके हैं।
गुलबर्गा लोकसभा सीट से खड़गे के दामाद हैं सांसद
कर्नाटक की गुलबर्गा सुरक्षित लोकसभा सीट को मल्लिकार्जुन खड़गे का गढ़ माना जाता रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें इस सीट पर उनके ही एक पुराने सहयोगी उमेश जाधव ने भाजपा के टिकट पर हरा दिया था। अपने गढ़ में कांग्रेस के दिग्गज नेता की यह पहली हार थी।
इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते इस सीट पर अपनी खोयी हुई प्रतिष्ठा हासिल करना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी।
कांग्रेस पार्टी उनके दामाद राधाकृष्ण डोड्डामणि को उतारा और उन्होंने जाधव से अपने ससुर की हार का बदला ले लिया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी लंबी उम्र की वजह से इस बार खुद को चुनावी राजनीति से दूर रखने का फैसला किया था।












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