Bihar Politics: जीतन राम मांझी को आंकने में बहुत जल्दबाजी कर गया विपक्ष? उन्होंने तो पूरी बाजी ही पलट दी
Bihar Politics: केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर-HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी को लेकर दो दिनों तक पटना से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में सनसनी मची रही। उनके बारे में खबरें थीं कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट छोड़ने जा रहे हैं। विपक्ष को मानों बैठे-बिठाए मुद्दा हाथ लगने वाला था। बिहार में इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं,इस वजह से इस खबर को और हवा भी मिली।
लेकिन, जब मांझी मीडिया के सामने आए तो उन्होंने मीडिया के साथ-साथ उनके इस्तीफे के इंतजार में बैठे विपक्षी दलों को भी लपेटना शुरू कर दिया। मांझी ने उनको लेकर चल रही सारी अटकलबाजियों को सिरे से खारिज कर दिया है।

Bihar Politics: हम एनडीए में हैं रहेंगे, मोदी जी के साथ हैं और रहेंगे- जीतन राम मांझी
एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "मांझी जी मैं अपने विजन का विभाग आपको दे रहा हूं...यह कहकर के उन्होंने (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने) इतना बड़ा जो विश्वास जताया है, वह मामूली बात नहीं है। हम गरीब हो सकते हैं, हम लोग बेईमान नहीं होते हैं...हमारी जाति का संस्कार है...हम एनडीए में हैं रहेंगे, मोदी जी के साथ हैं और रहेंगे..."
Bihar Politics: बिहार में नीतीश की अगुवाई में चुनाव लड़ने की कही बात
उन्होंने आगे कहा, 'हमने मीडिया से कभी बात नहीं की...हमने अपने कार्यकर्ताओं से कहा...कि आप ही मेरी ताकत हो...इसका झारखंड में उपयोग नहीं किया गया..अगर करते तो वहां एनडीए को ज्यादा सीट मिलती...हमने दिल्ली में भी नड्डा साहब से कहा था कि सेवा का मौका दीजिएगा...तो हमारे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा...वैसे भी काम करेगा,लेकिन एक-दो सीट दे दीजिएगा तो लगकर ज्यादा उत्साह के साथ काम करेगा..अगर सेवा नहीं लीजिएगा, तो एनडीए को घाटा होगा, जो मैं नहीं चाहता। क्योंकि एनडीए के लीडर नरेंद्र मोदी जी हैं।'
इसके साथ ही उन्होंने बिहार चुनाव पूरी तरह से नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ने की बात कहकर सभी तरह की अटकलबाजियों पर विराम लगा दिया है।
Bihar Politics: आरजेडी ने मांझी को ऑफर देने में कर दी बड़ी जल्दबाजी?
दरअसल, जैसे ही मांझी की नाराजगी की अटकलें शुरू हुईं तो राजद ने उन्हें पार्टी में शामिल होने का ऑफर दे दिया था। आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने यहां तक कहा कि 'अब वो रो रहे हैं। जीतन राम मांझी को इस स्थिति में कुर्सी छोड़कर तेजस्वी यादव के साथ आ जाना चाहिए। वह लालू यूनिवर्सिटी से ही निकले हैं। वह किस चक्कर में हैं,बीजेपी उनकी पार्टी को तोड़ देगी।'
आरजेडी नेता से मांझी की नाराजगी की खबरें सुनकर ऑफर देने में जरा जल्दबाजी हो गई। अगर वह हकीकत को समझने की कोशिश करते तो उन्हें भी पता चल सकता था कि उनके पास ऐसा करने की फिलहाल कोई वजह नहीं है। क्योंकि, एनडीए के उम्मीदवार के तौर पर वह अपनी पार्टी से एकमात्र लोकसभा सांसद चुने गए हैं और उन्हें पहली बार मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने का मौका मिला है।
बिहार में उनकी पार्टी के चार एमएलए हैं और उनके बेटे संतोष मांझी उसमें कैबिनेट मंत्री भी हैं। अगर वह अभी पाला बदलते हैं तो क्या राजद या इंडिया ब्लॉक उन्हें इस तरह के पदों की गारंटी देने की स्थिति में है? बिहार में भले ही इसी साल चुनाव होने हैं, लेकिन केंद्र में तो पांच साल के लिए वैकेंसी फुल है।
Bihar Politics: एनडीए में रहकर ही सीटों के लिए अभी से बार्गेनिंग करने की कोशिश में हैं मांझी?
बिहार में जातीय जनगणना से मांझी की मुसहर जाति की आबादी को लेकर तरह-तरह के अनुमान लगाए जाते थे। लेकिन, अब यह साफ हो चुका है कि इसकी आबादी बिहार की कुल 19% दलित जनसंख्या में मात्र 3% के करीब है।
जबकि, पासवान जाति की जनसंख्या 5% से ज्यादा है, जिसकी वजह से एलजेपी (राम विलास पासवान) की पूछ ज्यादा बढ़ी हुई है। ऐसे में मांझी के सामने अपने बेटे संतोष सुमन को बिहार की राजनीति में उनके मुकाबले पूरी तरह से सेट करने की भी चुनौती है। उनकी ओर से बिहार में 40 सीटें मांगने की जो बातें सामने आ रही है, वह उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि उनकी पार्टी को पूरी तरह से नजरअंदाज न कर दिया जाए।
वनइंडिया ने बिहार बीजेपी के एक नेता से बात की है और उनका भी अनुमान है कि मांझी अभी से माहौल बना रहे हैं ताकि बिहार में सीटों के बंटवारे के दौरान उनका ख्याल रखा जाए। क्योंकि, झारखंड और दिल्ली में सिर्फ जेडीयू और एलजेपी को ही मौका मिल पाया है।
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