Peddi Movie Review: राम चरण की 'पेड्डी' में दिखा स्पोर्ट्स और इमोशन का तालमेल, मूवी ने जीता दिल, पढ़ें रिव्यू
फिल्म: पेड्डी (Peddi)
स्टारकास्ट: राम चरण, जाह्नवी कपूर, शिव राजकुमार, दिव्येंदु
निर्देशक: बुची बाबू सना
रन टाइम: 3 घंटे 8 मिनट
स्टार: 4 (****)
Peddi Movie Review: बड़े पर्दे पर उम्मीदों, सपनों और कमर्शियल सिनेमा की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत मुख्यधारा के भारतीय सिनेमा में जब भी कोई ऐसी फिल्म आती है जो बॉक्स ऑफिस की सारी सीमाओं को तोड़कर दर्शकों के दिलों पर राज करने लगती है, तो समझ जाना चाहिए कि पर्दे पर कोई जादुई कहानी उतर चुकी है। 'पेड्डी' एक ऐसी ही लाजवाब और शानदार मिसाल है, जो अपने पहले फ्रेम से लेकर आखिरी सेकंड तक दर्शकों को एक बिल्कुल ही अनोखे और नए जोश से सराबोर कर देती है।

दर्शकों को पसंद आ रही है फिल्म 'पेड्डी'
इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबसूरती इसका गजब का आत्मविश्वास और इसके निर्माण की वो बेदाग स्पष्टता है जो सिनेमाघर के भीतर बैठे हर शख्स को एक नए सफर पर ले जाती है। फिल्म का हर एक सीन, हर एक मोड़ और हर एक डायलॉग इतने कमाल के अंदाज में बुना गया है कि दर्शक अपनी पलकें झपकाना तक भूल जाते हैं।
क्या है फिल्म पेड्डी की कहानी?
-पेड्डी (राम चरण) विजयनगरम का एक आटा कूली है, मतलब ऐसा खिलाड़ी जो पैसे लेकर किसी भी टीम के लिए खेल खेलता है। जब भी विजयनगरम का मैच किसी भी टीम से होता है तो वो उसे खरीदने की कोशिश करती है क्योंकि उसके होने से जीत लगभग तय मानी जाती है। पेड्डी खिलाड़ी ही इतना शानदार राहत है।
-फिर भी पेड्डी के लिए ये सब ज्यादा मायने नहीं रखता क्योंकि वह एक ऐसे गांव से आता है जिसका कोई ऑफिशियल नाम नहीं है। न उनके पास वोट डालने का अधिकार है, न रेलवे स्टेशन है और न ही कोई मूलभूत सुविधाएं। ऐसे में ये खेल ही उसके और उसके पूरे समुदाय के लिए पहचान दिलाने का माध्यम बन जाता है लेकिन इसमें कई मुश्किलें भी आती हैं। इसके लिए फिल्म देखना ज्यादा उचित होगा।
फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी एक्टिंग
-इस पूरी फिल्म की रीढ़ और दर्शकों का सबसे पसंदीदा पहलू अभिनेता राम चरण का परफॉर्मेंस है। राम चरण ने इस फिल्म में जो अभिनय किया है, वह उनके पूरे करियर का सबसे बेमिसाल है। उन्होंने अपनी बॉडी पर जितनी मेहनत की है वो भी स्क्रीन में बेहद शानदार नजर आता है।
-जाह्नवी कपूर का काम सिर्फ फिलर के रूप में नर आता है। वो यहां भी अपनी पुरानी फिल्मों जैसे ही एक्टिंग करती दिखती हैं। दिव्येंदु का ये तेलुगू डेब्यू है। इसमें उनका काम भी अच्छा है। रामचरण के सामने वो भी उतने ही मजबूत दिखाई देते हैं। बाकी सपोर्टिंग कास्ट का काम भी अच्छा है
क्यों देखें फिल्म पेड्डी?
-ये फिल्म केवल किसी खिलाड़ी की जीत या हार की आम कहानी नहीं है बल्कि ये इंसानी हौसले, आत्मसम्मान, दृढ़ इच्छाशक्ति और अपने समाज को एक नई दिशा देने के बारे में है। निर्देशक बुची बाबू सना ने इन सभी जरूरी और संजीदा विषयों को कहानी में इतने बेहतरीन और सकारात्मक तरीके से पिरोया है कि ये फिल्म दर्शकों के भीतर जिंदगी जीने का एक नया नजरिया और गजब की एनर्जी भर देती है।
-यही इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है कि ये हमें विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराना और लड़कर जीतना सिखाती है। पेड्डी के जीवन का हर एक संघर्ष और उसकी हर एक शानदार कामयाबी दर्शकों को अपनी खुद की कामयाबी की तरह महसूस होती है क्योंकि पूरी पटकथा को बहुत ही धैर्य, बारीकी और समझदारी के साथ आगे बढ़ाया गया है।
-स्पोर्ट्स ड्रामा के शौकीनों के लिए ये फिल्म किसी बहुत बड़े उत्सव जैसी है क्योंकि इसके भीतर खेल के मैदान और अखाड़े के दृश्यों को जिस जादुई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिल्माया गया है। निर्देशक इस बुनियादी बात को बहुत अच्छी तरह समझते हैं कि खेल का मैदान तब तक दर्शकों के भीतर असली रोमांच पैदा नहीं कर सकता है, जब तक कि उस खेल के पीछे कोई बड़ा भावनात्मक जज्बा न छिपा हो।
-पेड्डी का हर एक मुकाबला, मैदान पर बहने वाला पसीने का हर एक कतरा सिर्फ एक मेडल या ट्रॉफी जीतने की होड़ नहीं लगता बल्कि वह नायक के वजूद और उसके पूरे समाज की उम्मीदों को एक नई उड़ान देने की एक बेहद खूबसूरत कोशिश बन जाती है।
फिल्म का निर्देशन और राइटिंग
-इतने विशाल, भव्य और खूबसूरत सिनेमाई सपने को परदे पर पूरी मुकम्मल कामयाबी के साथ उतारने का श्रेय इसकी पूरी राइटिंग और टेक्निकल टीम को भी जाता है, जिन्होंने हर मोर्चे पर अपना सबसे बेहतरीन और लाजवाब योगदान दिया है। बुची बाबू सना, कृष्ण हरि, नागेंद्र कासी और वारा प्रकाश तोलेटी द्वारा लिखे गए संवाद इतने कड़क, मर्मस्पर्शी और जानदार हैं कि वह फिल्म के हर एक दृश्य के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं।
-ये डायलॉग्स बहुत ही सहज भाषा में होने के बावजूद दर्शकों के दिलों में सीधा रास्ता बना लेते हैं। इसके साथ ही हरि, चिंताकिंदी श्रीनिवास, वेमा रेड्डी और सुनील माधव की पूरी राइटिंग टीम ने मिलकर एक ऐसा चुस्त, मनोरंजक और रफ्तार से भरपूर स्क्रीनप्ले तैयार किया है जो दर्शकों को एक पल के लिए भी कहानी से अलग होने का मौका नहीं देता। फिल्म का प्रवाह इतना सुगम है कि कहानी का हर एक दृश्य दूसरे दृश्य से बहुत ही खूबसूरत ढंग से जुड़ा हुआ लगता है।
फिल्म के म्यूजिक और कोरियोग्राफी ने जीता दिल
-संगीतकार एआर रहमान का म्यूजिक और इसकी धुनें इस पूरी कहानी के बैकग्राउंड में एक ऐसा जादुई और रूहानी माहौल तैयार करती हैं, जो दृश्यों के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। अनंत श्रीराम, बालाजी, गणेश और सालादी के लिखे हुए गीत केवल मनोरंजन के लिए कहानी के बीच में नहीं आते बल्कि वे स्क्रीनप्ले के विस्तार के रूप में काम करते हैं और दृश्यों के भीतर छिपे दर्द और जोश को और उभारते हैं।
-वहीं दूसरी तरफ मशहूर कोरियोग्राफर बोस्को मार्टिस ने फिल्म में बेहद जीवंत, ऊर्जावान और धमाकेदार नृत्य दृश्य तैयार किए हैं, जो राम चरण की अद्भुत और जगजाहिर डांसिंग प्रतिभा का पूरा और सही इस्तेमाल करते हैं। ये संगीत, नृत्य और दमदार दृश्यों का एक ऐसा बेजोड़ मेल है जो दर्शकों को बड़े पर्दे पर एक अनोखा और शुद्ध आनंद देता है।
गंभीर और इमोशनल कहानी के लिए देख सकते हैं फिल्म
अगर कुल मिलाकर बात की जाए तो ये फिल्म इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे एक कमर्शियल फिल्म बेहद समझदार, गंभीर और भावनात्मक होने के साथ-साथ थियेटर में सीटी-ताली बटोरने वाली एक ब्लॉकबस्टर एंटरटेनर भी हो सकती है। ये फिल्म समाज के हर वर्ग के दर्शक को अपनी तरफ आकर्षित करने की ताकत रखती है।













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