अयोध्या में मस्जिद के लिए आवंटित हुई जमीन किसकी है? क्या एक महिला के दावे की वजह से रुक गया निर्माण?
अयोध्या में पवित्र रामजन्मभूमि के बदले मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए यूपी सरकार से आवंटित हुई जमीन के पांच साल पूरे होने को हैं, लेकिन अभी तक उसका निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। अब दिल्ली की एक महिला ने दावा किया है कि वह जमीन उसके परिवार की है और वह इसे लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
वैसे इस मस्जिद के निर्माण के लिए बने इंडो-इस्लामिक कल्चर फाउंडेशन के प्रमुख जुफुर फारूकी ने रानी पंजाबी नाम की महिला के दावे को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उसका यह दावा इलाहाबाद हाईकोर्ट 2021 में ही खारिज कर चुका है।

दिल्ली की महिला जमीन पर दावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने को तैयार
दिल्ली की निवासी रानी पंजाबी का दावा है कि उत्तर प्रदेश प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अयोध्या के धन्नीपुर गांव में मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को जो पांच एकड़ जमीन दी है, वह उसके परिवार के 28.35 एकड़ जमीन का हिस्सा है। रानी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया है कि उनके पास इस जमीन के मालिकाना हक के सारे दस्तावेज मौजूद हैं और वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगी।
रानी पंजाबी क्यों कर रही है मस्जिद वाली जमीन पर दावा?
रानी पंजाबी ने बताया कि उनके पिता ज्ञान चंद पंजाबी बंटवारे के समय पाकिस्तानी हिस्से वाले पंजाब छोड़कर और फैजाबाद चले आए थे, जहां उन्हें पाकिस्तान में छोड़ी गई जमीन की जगह 28.35 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी।
उनका दावा है कि परिवार ने 1983 तक उस जमीन पर खेती की, लेकिन पिता की तबीयत बिगड़ने पर यह परिवार उनके इलाज के लिए दिल्ली आया तो यहीं रह गया। तबसे उनकी जमीन का तेजी से अतिक्रमण होता चला गया। रानी का कहना है कि उन्हें मस्जिद बनने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन चाहती हैं कि प्रशासन उनके साथ न्याय करे।
क्या महिला के दावे की वजह से मस्जिद निर्माण में हो रही है देरी?
कहा जाता है कि इस्लाम में विवादित जमीन पर मस्जिद निर्माण की इजाजत नहीं है। इस वजह से निर्माण कार्य शुरू होने में देरी को लेकर संदेह उठना लाजिमी है। हालांकि फारूकी जो कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के भी अध्यक्ष हैं, उनके मुताबिक 'प्रोजेक्ट में कोई रुकावट नहीं है।' उनका दावा है कि मस्जिद समेत पूरे प्रोजेक्ट पर इसी साल अक्टूबर से काम शुरू हो जाएगा।
अक्टूबर से शुरू होगा मस्जिद का निर्माण- फारूकी
महिला के दावे पर वे कहते हैं, 'जहां तक जमीन पर महिला के दावे की बात है तो इलाहाबाद हाई कोर्ट 2021 में ही इसे खारिज कर चुका है। कुछ छोटे-मोटे मुद्दे हैं, जिसका समाधान किया जा रहा है और अक्टूबर से काम शुरू हो जाने की संभावना है।'
जब उनसे सवाल किया गया कि यह काम तो इसी साल मई से ही शुरू होना था, तो उन्होंने कहा, 'हां, इसमें थोड़ी देरी हुई है, क्योंकि पूरे प्रोजेक्ट की डिजाइन नए सिरे से तैयार की जा रही है।' इसके अलावा फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेग्युलेशन एक्ट (FCRA) सर्टिफिकेट भी अभी तक नहीं मिला है।
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क्या है महिला के दावे का सच?
लेकिन, इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर कहा है कि वह रानी पंजाबी से कई बार मिल चुके हैं, क्योंकि इस्लाम में विवादित जमीन पर मस्जिद बनाना मुमकिन नहीं है। 'अगर उनके पास अपने दावे को लेकर कोई पुख्ता सबूत हैं तो उन्हें इसे सामने रखना चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकीं।' (इनपुट-पीटीआई)












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