ऑस्ट्रेलिया से भारत के लिए आया चुपचाप एक तोहफा, चीन को लगेगी मिर्ची!
नई दिल्ली। जहां एक तरफ चीन, डोकलाम के जरिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा हैं तो वहीं दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया ने भारत को चुपचाप यूरेनियम की पहली खेप भेज दी है। चीन को इस खबर से मिर्ची इसलिए भी लग सकती है क्योंकि चीन हमेशा भारत की न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में एंट्री को बैन करने की मांग करता आया है। भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक और सामरिक सफलता मानी जा रही है।

कुछ माह पहले भारत आए थे ऑस्ट्रेलियाई पीएम
जहां इस समय ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली बिशप भारत में हैं तो वहीं कुछ माह पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल भारत की यात्रा पर आए थे। यूरेनियम एटम बम बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। साथ इसका प्रयोग परमाणु ऊर्जा तैयार करने के लिए भी होता है। भारत ने ऑस्ट्रेलिया को भरोसा दिलाया है कि वह इस यूरेनियम का प्रयोग शांतिपूर्ण मकसद के लिए करेगा।

तीन वर्ष पहले हुई थी डील
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली बिशप ने कहा है कि भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यावसायिक समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की पहली खेप भारत के लिए रवाना हो चुकी है। ऑस्ट्रेलिया में यूरेनियम की सप्लाई के लिए संसदीय अनुमति पहले ही मिल गई थी। सिंतबर 2014 को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच उस समय सिविल न्यूक्लियर डील साइन हुई थी जब पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट भारत की यात्रा पर आए थे। भारत यूरेनियम का इस्तेमाल देश में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए करने वाला है।

भारत को है रिएक्टर्स की जरूरत
भारत अभी सात शहरों में 21 लेकिन छोटे रिएक्टर्स का संचालन कर रहा है। इनकी कैपसिटी 5,780 मेगावॉट है। सरकार वर्ष 2032 तक देश में 30 रिएक्टर्स और न्यूक्लियर कैपेसिटी को 63,000 मेगावॉट करने की उम्मीद रखे हैं। इस उम्मीद को पूरा करने में करीब 85 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा।

भारत को यूरेनियम की सख्त जरूरत
5,780 मेगावॉट में से 3 हजार 380 मेगावाट बिजली पैदा करने वाले 13 रियेक्टर अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की निगरानी में हैं और आयात किये हुए यूरेनियम पर निर्भर हैं। भारत अपनी न्यूक्लियर ऊर्जा बनाने की क्षमता को बढ़ाना चाहता है, लेकिन कच्चे माल की कमी वजह से इसमें बाधा आ रही है। 2008 में अमेरिका से सिविल न्यूक्लियर डील करने के बाद भारत ने ब्रिटेन, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया से भी समझौता किया है।
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बिजली संकट से राहत
नरेंद्र मोदी वर्ष 2019 तक देश को सर्वश्रेष्ठ देश बनाने का सपना देख चुके हैं। उनके इस सपने के तहत हर घर में बिजली होना काफी अहमियत रखता है। ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का मतलब है कि भारत में बड़े पैमाने पर बिजली संकट का हल हो सकता है।

जॉन हॉवर्ड ने बढ़ाईं थीं भारत की बढ़ी मुश्किलें
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड ने वर्ष 2007 में भारत को यूरेनियम फ्यूल देने से साफ इंकार कर दिया था। हॉर्वड का मानना था कि क्योंकि भारत ने एनपीटी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, ऐसे में वह भारत को यूरेनियम की आपूर्ति नहीं कर सकते हैं।

भारत की सख्त जरूरत
वर्ष 2012 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के लिए अपनी नीति में परिवर्तन किया। उस समय ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री केविन रुड ने सलाह दी थी कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ ही अमेरिका के बीच एक सुरक्षा संधि हो जाए। लेकिन भारत ने इससे साफ इंकार कर दिया।

वर्ष 2011-2012 7,529 टन यूरेनियम
ऑस्ट्रेलिया जिसके पास कोई भी न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं है, दुनिया की यूरेनियम सप्लाई करने वाला अग्रणी देश है। वर्ष 2011-2012 के आंकड़ों पर अगर यकीन करें तो ऑस्ट्रेलिया के पास 7,529 टन यूरेनियम है। इसकी कीमत करीब 782 बिलियन डॉलर थी।

अमेरिका बना वजह
वर्ष 2008 में अमेरिका ने भारत के साथ डील साइन की जिसमें भारत को अमेरिका से न्यूक्लियर फ्यूल और टेक्नोलॉजी आयात करने की मंजूरी मिली। इस डील के बाद ही ऑस्ट्रेलिया, भारत पर लगे बैन को हटाने के लिए मजबूर हो सका। भारत ने इसी तरह का करार जापान के साथ भी किया हुआ है। नवंबर 2016 में जब पीएम मोदी, जापान की यात्रा पर गए थे तो भारत और और जापान के बीच अहम असैन्य परमाणु डील हुई थी।

भारत एक बेहतर प्रतिद्वंदी
ऑस्ट्रेलिया का भारत के साथ व्यापार प्रतिवर्ष करीब 15 बिलियन डॉलर का है और यह चीन की तुलना में दस गुना कम है। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम जब भारत आए थे तो उनका मकसर था कि भारत के साथ भी व्यापारिक रिश्ते मजबूत हों। इसलिए ही वह किसी भी कीमत पर इस डील को सील करना चाहते थे। एबॉट यह भी मानते थे कि भारत कभी भी नॉर्थ एशिया के बाजार के लिए बड़ी मुसीबत नहीं बन सकता है।

भारत का मजबूत न्यूक्लियर प्रोग्राम
पूर्व पीएम एबॉट ने भारत में कहा था कि भारत के पास एक मजबूत न्यूक्लियर प्रोग्राम है और ऑस्ट्र्रेलिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर भंडार है। साथ ही वह मानते थे कि ऑस्ट्रेलिया के पास कोयले और नैचुरल गैस का भी अच्छा भंडार है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया और भारत को साथ आना ही होगा।

100 मिलियन भारतीयों को मिलेगी रोशनी
जिस समय एबॉट भारत पहुंचे थे उन्होंने कहा था कि ऑस्ट्रेलिया इस बात को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि वह 100 मिलियन भारतीयों की जिंदगी में रोशनी लाकर ही रहेंगे। एबॉट ने यह बात कही थी कि ऑस्ट्रेलिया का कोयला करीब 100 मिलियन भारतीयों की तकदीर बदल सकता है।
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