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धारा-370: कुछ ही हफ्तों में कैसे पैदल हो गए कश्मीर के बड़े-बड़े VIPs,जानिए

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नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार के ऐक्शन से सिर्फ वहां संवैधानिक और राजनीतिक जमीन ही नहीं बदली है, बल्कि एक ही झटके में वहां के तमाम वीआईपी का रुतबा भी बदल गया है। कश्मीर को मिले विशेषाधिकारों लाभ अबतक जिन लोगों ने उठाया था, सबसे बड़ा परिवर्तन उन्हीं के जीवन में दिखाई दे रहा है। इसका सबसे बड़ा गवाह है श्रीनगर का सेंटूर होटल, जहां 50 से ज्यादा प्रभावशाली लोगों को हिरासत में रखा गया है।

दशकों की ठसक बेअसर

दशकों की ठसक बेअसर

श्रीनगर के सेंटूर होटल में हिरासत में रखे गए जम्मू-कश्मीर के 50 से ज्यादा प्रभावशाली लोगों से मिलने आने वाले परिवार के लोगों और रिश्तेदारों का दिनभर तांता लगा रहता है। कोई किसी बंदी की मां है, कोई पत्नी या बहन या फिर बच्चे। 5 अगस्त से पहले इन सारे लोगों का कश्मीर की राजनीतिक व्यवस्था में काफी दबदबा हुआ करता था। नेता तो वीआईपी थे है, उनके नाते-रिश्तेदार भी वीआईपी बने हुए थे। लेकिन, आज उन रिश्तेदारों को पुलिस अफसरों की इजाजत के बिना हिरासत में रखे गए अपने रिश्तेदारों से मिलने तक की अनुमति नहीं है। कभी वीआईपी रहे इन लोगों को अब सेंटूर होटल की लॉबी तक पहुंचने के लिए कई तरह की जांच, पूछताछ से गुजरना पड़ता है। अपने साथ लाए हर एक छोटी-मोटी चीजों की भी जांच करवानी पड़ती है।

जो बॉडी गार्ड थे, अब गार्ड बन चुके हैं

जो बॉडी गार्ड थे, अब गार्ड बन चुके हैं

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के जो राजनीतिक दिग्गज पहले चौबीसों घंटे सुरक्षाकर्मियों के पहरे में रहते थे, अब वही सुरक्षाकर्मी उनके जेल गार्ड का रोल निभा रहे हैं। यानि अब वे उनकी निगरानी रख रहे हैं, जिनकी पहले वह दूसरों से हिफाजत करते थे और उनकी शान को चार चांद लगाते थे। अपने किसी रिश्तेदार से मिलने आए एक शख्स ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि, "हमनें कभी ऐसे अनुभव के बारे में सोचा भी नहीं था। यह असली जेल नहीं है, लेकिन मैं समझ सकता हूं कि जेल के अंदर रहना कितना मुश्किल है।" एक मुलाकाती ने बताया कि 'पहले हफ्ते में तो बंदियों को एक-दूसरे से मिलने की इजाजत भी नहीं थी। वे लोग ज्यादातर खाना खाने के समय ही मिल पाते थे, क्योंकि इतने सारे लोगों को अलग-अलग खाना खिलाना मुश्किल है। यह इन लोगों के लिए बहुत ही कठिन है कि कुछ को छोड़कर किसी को भी कैद में रहने का कभी अनुभव नहीं रहा।'

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सिर्फ तीन पूर्व सीएम सेंटूर में नहीं हैं

सिर्फ तीन पूर्व सीएम सेंटूर में नहीं हैं

श्रीनगर के सेंटूर सब-जेल में 50 से ज्यादा जो लोग हिरासत में रखे गए हैं, उनमें प्रदेश की सभी मुख्यधारा की पार्टियों के दर्जनों विधायक, मंत्री और नेता शामिल हैं। सिर्फ तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को छोड़कर लगभग सभी बड़े नेताओं को यहीं पर रखा गया है। गौरतलब है कि पीडीपी की महबूबा मुफ्ती चश्मे शाही कॉटेज में, नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला हरि निवास में रह रहे हैं। जबकि उनके पिता फारूक अब्दुल्ला कुछ दिन पहले अपने घर से ही निकलकर मीडिया से बातचीत करने आए थे और केंद्रीय गृहमंत्री ने लोकसभा में कहा था कि वे अपनी मर्जी से घर में रह रहे हैं।

जेल नहीं जाने का सुकून भी है

जेल नहीं जाने का सुकून भी है

सेंटूर में रखे गए कुछ नेताओं को यह सुकून भी है कि उन्हें यहां रखा गया है, क्योंकि जेल में ज्यादा दिक्कत हो सकती थी। एक रिश्तेदार ने बताया कि "यह असली जेल से थोड़ा बेहतर है। हर एक को एक हेल्पर रखने की इजाजत मिली हुई है। बंदी थोड़े व्यवस्थित होते दिख रहे हैं, लेकिन नई वास्तविकता को लेकर बेचैनी भी है.... " बता दें कि जम्मू-कश्मीर के राजनीतिज्ञों तो श्रीनगर में ही रखा गया है, लेकिन ज्यादातर अलगाववादियों और संदिग्धों को आगरा और वाराणसी के जेलों में रखा गया है।

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English summary
Article 370:Know how the VIPs of Kashmir became normal citizens in a few weeks
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