Amit Shah का तमिलनाडु और बंगाल में बीजेपी की जीत का दावा, पूर्व से दक्षिण तक कमल खिलाने के दावे में कितना दम?
Amit Shah Claims Victory In Tamil Nadu: बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज की है। बीजेपी पूरे उत्साह में है और अब इस साल बिहार और फिर अगले साल बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव पर फोकस करना चाहती है। गृहमंत्री अमित शाह ने पहले कोलकाता की रैली में और फिर रविवार को मदुरै की रैली में दावा किया है कि दोनों राज्यों में पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनेगी। इन दोनों राज्यों में अब तक एक बार भी कमल नहीं खिल सका है, लेकिन बीजेपी के दावों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। समझें दोनों राज्यों में पार्टी की रणनीति क्या है।
Amit Shah ने मदुरै में किया बड़ा वादा
अमित शाह ने मदुरै की रैली में बड़ा दावा करते हुए कहा कि मैं जनता की नब्ज पहचानता हूं। गृहमंत्री ने कहा, 'स्टालिन सरकार के घोटालों और कुप्रबंधन से जनता तंग आ गई है। अगले साल यहां चुनाव होने वाले हैं। मैं दावे के साथ कह रहा हूं कि बीजेपी और एआईएडीएमके की गठबंधन यहां पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने जा रही है।' इससे पहले शाह ने कोलकाता की रैली में कहा था कि बंगाल की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनेगी और भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाया जाएगा।

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बीजेपी के आत्मविश्वास के पीछे क्या है वजह?
राजनीति के जानकारों का कहना है कि बीजेपी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों ही राज्यों में संगठन से लेकर बूथ स्तर तक मजबूती से काम कर रही है। दोनों राज्यों में अगले साल चुनाव होने वाले हैं और यहां मौजूदा सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का भी माहौल है। इसका फायदा उठाने के लिए भाजपा पूरी मेहनत कर रही है। तमिलनाडु में अपनी स्थिति को समझते हुए पार्टी ने एआईएडीएमके से गठबंधन किया है। पार्टी ने अन्नामलाई की जगह पर नयनार नागेंद्रन को अध्यक्ष बनाया है। नागेंद्रन प्रदेश की महत्वपूर्ण कम्युनिटी थेवर समुदाय से आते हैं। वोट बैंक की राजनीति को समझते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है। बंगाल में संगठन से लेकर पदाधिकारियों की नियुक्ति में अमित शाह खुद नजर रख रहे हैं।
बंगाल में चुनाव जीतना अकेले बीजेपी के लिए नहीं बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए सम्मान का प्रश्न बन गया है। तमिलनाडु में सत्ता में आना बीजेपी के लिए हिंदी हार्ट लैंड से बाहर दक्षिण तक पहुंच बनाने के लिए जरूरी प्रवेश द्वार है। एक दशक पहले तक बीजेपी को दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर से बाहर की पार्टी माना जाता था। हालांकि, अब पूर्वोत्तर में बीजेपी की दमदार मौजूदगी है जबकि दक्षिण भारत में जनाधार बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी केरल में एक लोकसभा सीट भी जीतने में कामयाब रही है।
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जीत के लिए विपक्ष पर प्रहार के साथ संगठन और गठबंधन
इन दोनों राज्यों में जीत के लिए पार्टी सिर्फ विपक्षी दलों पर हमलावर ही नहीं है, बल्कि गठबंधन बनाने पर भी पूरा ध्यान दे रही है। तमिलनाडु में एआईएडीएमके के साथ गठबंधन हो चुका है। बंगाल में पार्टी दूसरे दलों और समुदाय के प्रभावी नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, संगठन में जुझारू और चुनावी राजनीति के धुरंधर चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है। कुल मिलाकर 2026 का साल बीजेपी के लिए बड़ा और अहम रहने वाला है।












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