'हर चुनाव से पहले हो मतदाता सूची का हो पुनरीक्षण', बिहार में जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

Bihar Voter List Controversy: बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर उठे विवाद ने अब राष्ट्रीय बहस का रूप ले लिया है। विपक्ष जहां इसे दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और गरीबों के मताधिकार पर सुनियोजित हमला बता रहा है, वहीं अब यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े तक पहुंच गया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर देशभर में हर चुनाव से पहले मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) कराने की मांग की गई है।

यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई है, जिसमें यह सुनिश्चित करने की अपील की गई है कि केवल भारतीय नागरिकों को ही मतदान का अधिकार मिले और फर्जी या अवैध घुसपैठिए वोटिंग प्रक्रिया से बाहर रहें।

याचिका में क्या कहा गया है?

याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि चुनावों से पहले SIR को अनिवार्य किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सिर्फ भारतीय नागरिक ही देश की राजनीति और नीति निर्धारण में भाग लें, न कि कोई अवैध विदेशी घुसपैठिए। याचिका में दावा किया गया है कि देश की लगभग 200 ज़िलों और 1,500 तहसीलों की जनसांख्यिकी आज़ादी के बाद अवैध घुसपैठ, छलपूर्वक धर्मांतरण और जनसंख्या विस्फोट के चलते काफी बदल चुकी है।

याचिका में लिखा गया है कि, जनसांख्यिकी ही भविष्य तय करती है, और कई जिलों की किस्मत अब उन लोगों द्वारा लिखी जा रही है जो भारतीय नागरिक नहीं हैं।

Voter List Revision Controversy

बिहार की स्थिति पर विशेष ज़ोर

बिहार की 243 विधानसभा सीटों में हर क्षेत्र में अनुमानत 8,000-10,000 अवैध, डुप्लिकेट या फर्जी नाम वोटर लिस्ट में शामिल हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि सिर्फ 2,000-3,000 वोटों का अंतर हो तो वह चुनाव परिणाम को पूरी तरह पलट सकता है।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार में SIR के खिलाफ दायर याचिकाओं के एक समूह को 10 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने अश्विनी उपाध्याय से प्रक्रिया संबंधी कमियों को दूर करने को कहा ताकि उनकी याचिका भी उसी दिन सुनी जा सके।

विपक्षी दलों की याचिकाएं भी दायर

कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), समाजवादी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, CPI और CPI (ML) समेत कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग द्वारा बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा को चुनौती दी है और सुप्रीम कोर्ट में इसे रद्द करने की मांग की है।

ये भी पढ़ें 9 जुलाई को विपक्षी दलों ने क्यों बुलाया बिहार बंद? राहुल गांधी- तेजस्वी यादव पटना में करेंगे शक्ति प्रदर्शन

याचिका में मुख्य मांगें

  • हर चुनाव से पहले मतदाता सूचियों की गहन जांच और पुनरीक्षण हो।
  • वोट देने का अधिकार सिर्फ वास्तविक भारतीय नागरिकों को मिले।
  • अवैध घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं को सूची से हटाया जाए।
  • संविधान के अनुच्छेदों के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किए जाएं।

यह मामला अब देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाता सूची की पवित्रता को लेकर बड़ी बहस बनता जा रहा है। 10 जुलाई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का रुख अहम साबित हो सकता है।

ये भी पढ़ें Bihar Voter List Update: वोटर लिस्ट संशोधन पर जनता ने उठाए सवाल, क्या है लोगों की सबसे बड़ी चिंता?, जानिए

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+