Bharat Bandh: आज 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों ने क्यों की है हड़ताल? क्या है इनकी मांग?
Bharat Bandh: श्रमिक संगठनों ने आज (9 जुलाई) को भारत बंद बुलाया है, बुधवार को 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी देशव्यापी आम हड़ताल पर जाने वाले हैं। 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों और उनकी सहयोगी इकाइयों ने यह हड़ताल बुलाई है। दूसरी ओर केरल बीजेपी प्रेसिडेंट राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि यह भारत बंद नहीं है और न इसे सभी संगठनों से समर्थन मिला है। यह सीपीआई (एम) समर्थित हड़ताल है।
संगठनों का कहना है कि सरकार की मजदूर, किसान और राष्ट्र विरोधी नीतियों के विरोध में देशव्यापी हड़ताल की जा रही है। इसका असर सभी क्षेत्र की जरूरी सेवाओं पर पड़ सकता है। जानें बैंकिंग, बीमा, रेलवे से लेकर अन्य क्षेत्रों पर कैसा असर होगा।

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Bharat Bandh: हड़ताल को दिया इन संगठनों ने समर्थन
हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा कि भारत बंद का असर पूरे देश पर पड़ सकता है। बैंकिंग, डाक सेवाएं, कोयला खनन, राज्य परिवहन, फैक्ट्रियां और अन्य जरूरी सेवाएं इस हड़ताल की वजह से प्रभावित हो सकती हैं। अगर आपको जरूरी बैंक या डाकघर से जुड़े काम निपटाने हैं, तो आज ही उसे पूरा कर लें।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की अमरजीत कौर ने बताया कि हड़ताल को प्रभावी बनाने के लिए अब तक कई बड़े किसान और श्रमिक संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। किसानों और ग्रामीण श्रमिकों ने भी देश के अलग-अलग हिस्सों में हड़ताल के समर्थन का ऐलान किया है। एनएमडीसी लिमिटेड, अन्य खनिज, इस्पात कंपनियों, राज्य सरकार के विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल में शामिल होने की पुष्टि की है। किसानों के प्रमुख संगठन संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक संगठन भी इसमें शामिल हो रहे हैं। इससे पहले आखिरी बार 16 फरवरी, 2024 को देशव्यापी हड़ताल बुलाई गई थी।
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श्रमिक संगठनों ने सरकार को दिया था 17 सूत्री मांगों का ज्ञापन
श्रमिक संगठनों के मंच ने कहा कि उन्होंने पिछले साल श्रम मंत्री को 17 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा था। उनकी मुख्य शिकायतें हैं:
- सरकार पिछले 10 वर्षों से वार्षिक श्रम सम्मेलन आयोजित नहीं कर रही है।
- चार नई श्रम संहिताएं लागू कर सरकार श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर कर रही है।
- सामूहिक सौदेबाजी, हड़ताल के अधिकार, और श्रम कानूनों का उल्लंघन अपराध न मानने जैसी नीतियां मजदूरों के लिए घातक हैं।
- नौकरियों की कमी, मंहगाई, और मजदूरी में गिरावट जैसे मुद्दे बढ़ते जा रहे हैं।












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