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Naegleria Fowleri: कोरोना के बाद आया मस्तिष्क खाने वाला ‘अमीबा’, मरीज का बचना हो जायेगा मुश्किल

दुनियाभर में कोरोना का खौफ अभी खत्म भी नहीं हुआ है कि बीते दिन एक और नई किस्म की बीमारी ने वैज्ञानिकों और लोगों को चिंता में डाल दिया है। इस बीमारी का नाम है ‘नाइग्रीलिया फॉलेरी’।

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Naegleria Fowleri: नाइग्रीलिया फॉलेरी के बारे में ज्यादा जानकारी किसी संस्था या सरकार के पास नहीं है लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बीमारी के बारे में 1937 में पहली बार अमेरिका में पता चला था। यह एक ऐसी बीमारी है जो मनुष्य के मस्तिष्क को खत्म कर देती है। इस बीमारी का ताजा एक मामला दक्षिण कोरिया में सामने आया है। कोरिया रोग नियंत्रण और रोकथाम एजेंसी (केडीसीए) ने बीते दिनों बताया कि एक 50 वर्षीय शख्स थाईलैंड में तकरीबन 4 महीने बिताने के बाद 10 दिसंबर 2022 को दक्षिण कोरिया आया था। उसके लौटने के 11 दिन बाद यानि 21 दिसंबर को एक दुर्लभ संक्रमण नाइग्रीलिया फॉलेरी, जोकि एक अमीबा है, के कारण उसकी मौत हो गयी।

दिमाग खाने वाला यह अमीबा क्या है?

नाइग्रीलिया फॉलेरी सिंगल सेल वाला सूक्ष्मजीव है, जिसे दिमाग खाने वाला अमीबा भी कहा जाता है। अमेरिका स्वास्थ्य एजेंसी CDC के मुताबिक, यह सूक्ष्मजीव नदी, झील और तालाब के साफ पानी में पाया जाता है। दुनिया में इसका पहला मामला वैज्ञानिक जानकारी के साथ साल 1965 में ऑस्ट्रेलिया में सामने आया था। कहा जाता है कि यह नाक के जरिये इंसान के शरीर में पहुंचता है और दिमाग तक जाकर उसे संक्रमित करने लगता है। ऐसे मामले खासतौर पर तब सामने आते हैं जब इंसान स्विमिंग करता है, पानी में समय बिताता है या डुबकी लगाता है। कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि दूषित पानी से नाक की सफाई करते वक्त भी यह शरीर में पहुंच जाता है। संक्रमण के बाद यह अमीबा ब्रेन तक पहुंचता है और ब्रेन के हिस्सों को डैमेज करने लगता है। कुछ ही दिनों में मरीज की जान चली जाती है।

कोरिया ने जारी की चेतावनी

कोरिया में यह मामला सामने आने के बाद Korea Disease Control and Prevention Agency (KDCA) ने कहा कि नाइग्रीलिया फॉलेरी के मानव-से-मानव संक्रमण की संभावनाएं कम हैं। हालांकि, स्थानीय निवासियों को उन क्षेत्रों में जाने से परहेज करने के लिए कहा गया है, जहां बीमारी फैल गई है। अमेरिका, भारत और थाईलैंड सहित दुनिया में 2018 तक नाइग्रीलिया फॉलेरी के कुल 381 मामले सामने आये हैं।

क्या है लक्षण और कितनी खतरनाक है ये बीमारी?

अमेरिका स्वास्थ्य एजेंसी CDC (Centers for Disease Control) के मुताबिक, संक्रमण होने के बाद एक से 12 दिन के अंदर इसके लक्षण दिखने शुरू होते हैं। संक्रमण के शुरुआती दौर में इसके लक्षण मेनिनजाइटिस जैसे नजर आते हैं। क्योंकि इसमें मरीज को सिरदर्द, उल्टी और बुखार जैसे लक्षण दिखते हैं। जो आम बीमारियों में भी होती है। वहीं इस बीमारी के गंभीर होने पर गर्दन में अकड़न, मिर्गी के दौरे भी पड़ने लगते हैं। कई मामलों में इससे संक्रमित मरीज कोमा में भी जा सकता है।

सीडीसी के अनुसार, यह संक्रमण आमतौर पर तब होता है जब उस क्षेत्र का तापमान या पानी का तापमान गर्म हो और पानी का लेवल कम होता है। जैसे थाईलैंड और मालदीव के द्वीपों के किनारों पर, पानी का लेवल कम होने के साथ-साथ दोपहर के वक्त वहां का पानी गर्म हो जाता है।

मात्र पांच दिन में भी हो सकती है मौत

सीडीसी के अनुसार कई बार इस बीमारी के मरीजों के बीच ऐसा देखा गया है कि अगर संक्रमण तेजी से फैलता है तो औसतन 5-6 दिन के अंदर ही इंसान की मौत हो जाती है। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितनी खतरनाक बीमारी है। जब तक डॉक्टर या लोगों को बीमारी का पता चलता है, तब तक देर हो चुकी होती है। बेशक यह दुर्लभ संक्रमण है, लेकिन इसकी मृत्यु दर लगभग 97 प्रतिशत है।

यहां आपको बता दें कि सिर्फ अमेरिका में साल 1962 से लेकर 2021 के बीच इसके 154 मामले सामने आ चुके हैं। जिसमें सबसे ज्यादा टेक्सस में 39 और फ्लोरिडा में 37 मरीज मिले हैं बाकी जगहों पर 10 से कम मरीज हैं। हालांकि, इन सब में अभी तक केवल 4 मरीज ही बच पाये हैं। अभी तक डॉक्टरों ने इसका कोई सटीक इलाज या दवाई नहीं खोजी है। वैसे इस बीमारी के दौरान डॉक्टर मरीजों को एजिथ्रोमायसिन, डेक्सामेथासोन, फ्लुकोनाज़ोल, रिफैम्पिन, मिल्टेफोसिन जैसी दवाएं देते हैं।

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    नाइग्रीलिया फॉलेरी से बचाव

    नाइग्रीलिया फॉलेरी को लेकर अभी तक एक भी ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता या संक्रमित करता है। वहीं इससे बचाव की बात करें तो डॉक्टर कई दवाइयों को एक साथ मिलाकर संक्रमित व्यक्ति को देते हैं, लेकिन इससे बचने की संभावना काफी कम होती है। इसलिये बेहतर होगा कि Korea Disease Control and Prevention Agency (KDCA) ने जो एडवाइजरी जारी कर कहा है कि जहां यह बीमारी फैलती है, वहां के सार्वजनिक पानी में तैरने या उसके इस्तेमाल से बचें।

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