Vikram-S की लॉन्चिंग से भारत को क्या होगा फायदा? रॉकेट की खूबियों से लेकर भारत के अंतरिक्ष सफर पर एक नजर
Vikram-S: अंतरिक्ष में भारत के लिए नए युग की शुरुआत हुई है। देश में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी निजी स्पेस कंपनी की ओर से बनाए गए रॉकेट को अपनी ही धरती से लॉन्च किया गया। ये बड़ी खुशखबरी देश को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से मिली, क्योंकि जैसे ही इस रॉकेट ने उड़ान भरी तो वहां मौजूद सभी लोगों के साथ केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने खड़े होकर तालियां बजाईं।

भारत अब उन चंद देशों में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां भी अपने बड़े रॉकेट लॉन्च करती हैं। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी ख़ुशी जताई और इसे ऐतिहासिक पल बताया। जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार ने ही साल 2020 में निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष के रास्ते खोले थे।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास से ही यह संभव हो पाया। उनकी वजह से अंतरिक्ष भी पब्लिक-प्राइवेट सेक्टर के लिए खुल पाया। साथ ही उन्होंने भारत को अग्रणी देश बनाए रखने के लिए ISRO का भी धन्यवाद किया।
रॉकेट के बारे में जानिए
इस रॉकेट का नाम 'विक्रम-एस' है। इसे हैदराबाद की निजी स्पेस कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने बनाया है और इसे ISRO की मदद से लॉन्च किया गया। निजी रॉकेट लॉन्च करने के इस मिशन को 'प्रारंभ' नाम दिया गया है। रॉकेट के साथ दो घरेलू और एक विदेशी ग्राहक के तीन पेलोड को ले जाया गया।
इस रॉकेट का वज़न 545 किलो है और इससे छोटे सैटेलाइटों को अंतरिक्ष में स्थापित किया जा सकेगा। राकेट की लंबाई 6 मीटर है। इसमें घुमाव में स्थिरता के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
इसमें चेन्नई और आंध्र प्रदेश के एक-एक और आर्मेनिया का एक पेलोड ले जाया गया। खास बात ये भी है कि विक्रम एस की लॉन्चिंग बेहद सस्ती रही। सस्ती लॉन्चिंग की वजह इसके ईंधन में किया गया बदलाव भी है। आम ईंधन के बजाय इसमें LNG यानी लिक्विड नेचुरल गैस और लिक्विड ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया गया। ये ईंधन किफायती होने के साथ साथ प्रदूषण मुक्त भी है।
स्काईरूट एयरोस्पेस की क्या है कहानी
महज 4 साल पुराने स्टार्ट अप स्काईरूट एयरोस्पेस की शुरुआत की गई थी। बता दें कि पवन कुमार चांदना और नागा भारत डाका ने इसरो की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर स्पेस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। साल 2020 में केंद्र सरकार के स्पेस इंडस्ट्री को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोले जाने के बाद स्काईरूट ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में कदम रखा था। इससे पहले भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में सिर्फ इसरो ही सक्रिय था।
स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक पवन चांदना का मानना है कि GPS, TV, कम्यूनिकेशन समेत कई तकनीकों ने लोगों की जिंदगी को बदल दिया है। मीडिया से बात करते हुए पवन ने कहा कि अभी भी स्पेस सेक्टर में काफी कुछ किया जाना बाकी है। वे रॉकेट लॉन्च को अब अधिक विश्वसनीय और सस्ता बनाने के काम में लगे हैं।
अंतरिक्ष में भारत के सफर पर एक नजर
देश ने अंतरिक्ष की ओर कदम रखने के बारे में 60 के दशक में तेजी से सोचना शुरू किया। उस दौरान डॉ. विक्रम साराभाई ने इस मिशन की कमान संभाली। तब 1962 में एक संस्था की स्थापना हुई। इसका नाम इंडियन नैशनल कमिटी फ़ॉर स्पेस रिसर्च था। इसके बाद भारतीय ज़मीन से पहला रॉकेट 21 नवंबर 1963 को लॉन्च किया गया। तब ये जगह केरल के तिरुवनंतपुरम के पास थी।
हालांकि ये रॉकेट अमेरिका से लिया गया था। इसी के चार साल बाद 1967 में भारत ने अपने रॉकेट बनाने शुरू किए। फिर 15 अगस्त 1969 को ISRO यानी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन - ISRO की स्थापना हुई।
इसके बाद डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस 1972 में बनाया गया। कामयाबी का ये सफर इस दौरान और तेजी से आगे बढ़ा और फिर साल 1975 में भारत की अपनी पहली सैटेलाइट लॉन्च की गई। इसका नाम था आर्यभट्ट। हालांकि तब इसे सोवियत संघ से लॉन्च किया गया। इसके बाद भारत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी धरती से भी सैटेलाइट छोड़ने शुरू कर दिए।
निजी क्षेत्र से क्या होगा लाभ?
स्पेस के क्षेत्र में निजी कंपनियों की गतिविधि बढ़ने से कई लाभ हैं, जैसे:
1. अंतरिक्ष में अमेरिका जैसे बड़े देशों का एकाधिकार खत्म होने लगेगा। उनकी कंपनियों को भारत से टक्कर मिलेगी। अमेरिका की प्राइवेट कंपनियों जैसे एलन मस्क की स्पेस एक्स और जेफ बेजोस की ब्लू रीफ से अब भारतीय कंपनियां प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं।।
2. पिछले कुछ समय से अंतरिक्ष में चीन और अमेरिका एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते रहे हैं लेकिन अब भारत भी निजी क्षेत्र में अपनी एक बड़ी उपस्थिति दर्ज करवाने से इस क्षेत्र में भारत को भी पहचान बनेगी।
3. अब भारत से भी विदेशी रॉकेट या भारतीयों के रॉकेट लॉन्च होने लगेंगे। एक तरह से भारत ऐसे मामलों में आगे चलकर एक स्पेस हब बन सकता हैं।
4. भारतीय अर्थव्यवस्था को इससे बहुत बड़ा फायदा हो सकता है। क्योंकि भारत में कई विदेशी कंपनियां आने लगेंगी।
5. ऐसा अनुमान भी है कि जल्द अंतरराष्ट्रीय स्पेस उद्योग का आकार एक ट्रिलियन डॉलर तक हो जाएगा। भारतीय रुपयों में ये करीब एक लाख करोड़ हो जाता है।
6. निजी क्षेत्र को मौका मिलने से भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। युवाओं के सामने नई संभावनाएं उभरेंगी। अंतरिक्ष तकनीकी में निवेश बढ़ेगा, नई तकनीकी का विकास होगा।
यह भी पढ़ें: Vikram-S Rocket वाली साइंटिस्ट्स की वो टीम, जिनके दम पर भारत ने रचा इतिहास, दिन- रात कर दिया था एक
-
Ishan Kishan ने आंसुओं को दबाकर फहराया तिरंगा, घर से आई दो मौतों की खबर फिर भी नहीं हारी हिम्मत, जज्बे को सलाम -
संजू सैमसन पर हुई नोटों की बारिश! प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने पर मिली इतनी प्राइज मनी? -
जश्न या अश्लीलता? हार्दिक पांड्या की इस हरकत पर फूटा फैंस का गुस्सा, सोशल मीडिया पर लगा 'छपरी' का टैग -
T20 World Cup फाइनल से पहले न्यूजीलैंड के खिलाड़ी ने लिया संन्यास, क्रिकेट जगत में मची खलबली, फैंस हैरान -
IND vs NZ Final: फाइनल से पहले सन्नाटे में क्रिकेट फैंस! आज अपना आखिरी मैच खेलेंगे कप्तान सूर्यकुमार यादव? -
T20 World Cup 2026: धोनी के 'कोच साहब' कहने पर गंभीर ने दिया ऐसा जवाब, लोग रह गए हैरान, जानें क्या कहा? -
कौन थीं Ishan Kishan की बहन वैष्णवी सिंह? खुद के दम पर बनाई थी अपनी पहचान, करती थी ये काम -
IAS IPS Love Story: 'ट्रेनिंग के दौरान कर बैठे इश्क',कौन हैं ये IAS जिसने देश सेवा के लिए छोड़ी 30 लाख की Job? -
Mojtaba Khamenei Wife: ईरानी नए नेता की बीवी कौन? 10वीं के बाद बनीं दुल्हन-निकाह में दी ये चीजें, कितने बच्चे? -
'आपके पापा से शादी करूं, चाहे कितने भी मर्दों के साथ', मुसलमानों पर कमेंट करते ही एक्ट्रेस का कर दिया ऐसा हाल -
Trump Netanyahu Clash: Iran से जंग के बीच आपस में भिड़े ट्रंप-नेतन्याहू! Khamenei की मौत के बाद पड़ी फूट? -
T20 World Cup जीतने के बाद अब सूर्यकुमार यादव लेंगे संन्यास? प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया फ्यूचर प्लान












Click it and Unblock the Notifications