Flight Ticket Prices: ईरान संकट के बीच क्या बढ़ने वाले हैं एयर टिकट के दाम? एयरलाइंस का आया बड़ा बयान
Flight Ticket Prices:भारत में हवाई यात्रा करने वाले लोगों जल्द ही हवाई टिकटों की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और चेतावनी दी है कि एयरलाइंस इस बढ़ते बोझ से निपटने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
बता दें वैश्विक तेल के दाम सोमवार को लगभग $120 प्रति बैरल तक पहुँचने के बाद, $93 के आसपास आने के बावजूद, विमानन उद्योग एक कठिन दौर से गुजर रहा है।

महंगे हो सकते हैं हवाई टिकट
स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचती हैं तो भारतीय एयरलाइंस के लिए संचालन करना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि एयरलाइंस के खर्चों में सबसे बड़ा हिस्सा ईंधन का होता है और मौजूदा कीमतों पर इसे संभालना कंपनियों के लिए "असहनीय" हो गया है। ऐसे में साफ संकेत है कि आने वाले महीनों में हवाई टिकट महंगे हो सकते हैं, क्योंकि एयरलाइंस बढ़ती लागत को लंबे समय तक खुद वहन नहीं कर सकतीं।
पहले ही बढ़ चुके है हवाई टिकट के दाम
एयरलाइंस ने लंबी दूरी की उड़ानों के किराए में करीब 15% तक बढ़ोतरी भी कर दी है और आगे और बढ़ोतरी पर विचार किया जा रहा है। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा। छुट्टियां मनाने वाले परिवारों, तीर्थ यात्रा की योजना बनाने वालों और बिजनेस ट्रैवल करने वालों को पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। कई कंपनियां लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की यात्राओं में कटौती भी कर सकती हैं।
एयरलाइंस की योजनाओं पर असर
बढ़ती ईंधन कीमतों का असर एयरलाइंस की भविष्य की योजनाओं पर भी पड़ सकता है। नई उड़ानें शुरू करने, नए विमान खरीदने या नए रूट जोड़ने की योजनाएं धीमी पड़ सकती हैं। महामारी के बाद जिस तेजी से विमानन क्षेत्र उबरने की कोशिश कर रहा था, उस पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
सिर्फ भारत ही नहीं, एशिया भी दबाव में
यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। एशिया की कई एयरलाइंस भी ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रही हैं। यूरोप और अमेरिका की तुलना में एशियाई कंपनियों की ईंधन हेजिंग रणनीतियां कमजोर मानी जाती हैं, इसलिए अचानक कीमत बढ़ने का असर यहां ज्यादा महसूस होता है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को भी तेल की कीमतों में उछाल की बड़ी वजह माना जा रहा है।
आम यात्रियों की टूटेगी कमर
बढ़ती तेल कीमतों का असर सिर्फ एयरलाइंस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। बस किराए से लेकर रोजमर्रा के सामान तक सब महंगा हो सकता है। लेकिन विमानन क्षेत्र में इसका असर सबसे पहले और सबसे साफ दिखाई देता है। उदाहरण के तौर पर, जो टिकट पिछले साल करीब ₹5,000 में मिल जाता था, वह जल्द ही ₹6,000 या उससे ज्यादा का हो सकता है। ऐसे में यात्रियों को आने वाले समय में महंगे टिकट, कम छूट और कुछ रूटों के विस्तार में धीमापन देखने के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।












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