Uttar Pradesh: यूपी के दो ‘लड़के’ क्या इस बार कर पाएंगे कोई कमाल?

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां काफी बढ़ गई हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो गया है, तो वहीं राजा भैया जैसे एक क्षेत्र विशेष के नेता को भी अपने साथ मिलाने का दांव बीजेपी और इंडी अलायंस दोनों ओर से चला जा रहा है।

पहले अखिलेश के दूत नरेश उत्तम पटेल और फिर यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी राजा भैया से मिलने पहुंचे थे। फिलहाल बीजेपी और सपा दोनों राजा भैया से राज्यसभा को लेकर सपोर्ट मांग रही हैं। ऐसी भी चर्चा है कि राजा भैया और अखिलेश यादव के बीच जो बातचीत हुईं थी, उसमें लोकसभा चुनाव में गठबंधन भी एक मुद्दा था।

Uttar Pradesh politics

कल के दुश्मन बनेंगे दोस्त?

राजा भैया और अखिलेश यादव 2019 के लोकसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ थे। तब सपा ने बसपा के साथ गठबंधन कर लिया था। विधान सभा की कार्यवाहियों में भी दोनों नेताओं के रिश्तों में खटास देखी जा रही थी। लेकिन एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने तो हाथ मिला ही लिया है अब अखिलेश जातिगत रूप से मजबूत नेताओं को अपने साथ मिलाने के प्रयास में लग गए है। 17 सीटों पर कांग्रेस के साथ समझौते के बाद बची 63 सीटों पर समाजवादी पार्टी कोई भी प्रयोग कर सकती है।

समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में कुल 17 सीटें गठबंधन में दी हैं। सबसे प्रमुख बात यह है कि सपा ने वाराणसी से कांग्रेस उम्मीदवार को लड़ाने के लिए सहमति दे दी है। इस सीट पर कभी अजय राय तो कभी प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ लड़ाने की बात होती रही है। हालांकि अखिलेश यादव वाराणसी से पहले अपने उम्मीदवार को उतारने की बात कह चुके थे। सपा लोकसभा चुनाव को लेकर पांच उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी भी कर चुकी थी।

बीएसपी का क्या होगा?

सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की नजरें 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश पर टिकी हुई हैं। वर्तमान में यहां सबसे अधिक भाजपा के 62 सांसद हैं। उसके बाद बहुजन समाज पार्टी है जिसके 10 सांसद हैं। इस बार बसपा खेमे से उत्साह कम है और पार्टी ने अभी तक किसी के साथ गठबंधन का कोई निर्णय नहीं किया है।

यह भी संभव है कि मौजूदा बसपा सांसद अपना ठिकाना बदल लें और टिकट के लिए किसी और पार्टी का रुख कर लें। दो तो पहले ही अपना नया ठिकाना ढूंढ भी चुके हैं। बसपा ने पहले ही ऐलान कर दिया है किसी भी परिस्थिति में वह सपा के साथ नहीं आने वाली है। अखिलेश यादव ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि बसपा के लिए उनके दरवाजे बंद हो गए हैं।

अखिलेश का क्या है पीडीए फार्मूला

अखिलेश यादव का दावा है कि अधिकांश पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक एकजुट होकर उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी के साथ खड़े होंगे और बीजेपी को हराएंगे और आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के सारे समीकरण और फॉर्मूले इस बार विफल हो जाएंगे। अखिलेश ने इसके लिए पीडीए का नया नारा दिया है। उनके पीडीए का मतलब पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक हैं।

उनका फार्मूला है कि 49 प्रतिशत पिछडों का, 16 प्रतिशत दलितों का और 21 प्रतिशत अल्पसंख्यकों का उनको विश्वास प्राप्त है। अखिलेश ने तो यह भी दावा किया कि इस पीडीए फैक्टर के कारण बीजेपी न तो कोई गणित लगा पा रही है और न ही कोई समीकरण बना पा रही है। उनकी पैरोडी है- 'ली है पीडीए ने अंगड़ाई, भाजपा की शामत आई'।

इन 17 सीटों पर लड़ेगी कांग्रेस

सपा-काँग्रेस समझौते के अनुसार कांग्रेस उत्तर प्रदेश में इन 17 सीटों अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। रायबरेली, अमेठी, कानपुर नगर, फतेहपुर सीकरी, बांसगांव, सहारनपुर, प्रयागराज, महाराजगंज, वाराणसी, अमरोहा, झांसी, बुलंदशहर, मथुरा, गाजियाबाद, सीतापुर, बाराबंकी और देवरिया।

इनमें से पीछे कई सीटों पर कांग्रेस जीतती भी रही है। हाल तक सोनिया गांधी रायबरेली की सांसद रहीं हैं। अब बदली हुईं परिस्थितियों में रायबरेली से प्रियंका गांधी चुनाव लड़ सकती हैं। अमेठी में गांधी परिवार कई चुनाव जीत चुका है। हालांकि 1977 में संजय गांधी और 2019 में राहुल गांधी अमेठी से हार भी चुके हैं।

अब नए बने समीकरण के बाद जल्दी ही राहुल गांधी और अखिलेश यादव एक मंच पर नजर आ सकते हैं। कहा जा रहा है कि 24 फरवरी को मुरादाबाद में जब राहुल गांधी की नयाय यात्रा पहुंचेगी तो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी शामिल होंगे। यूपी के अलावा मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट पर सपा उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा और कांग्रेस उसका समर्थन करेगी तो बाकी सीटों पर समाजवादी पार्टी कांग्रेस का समर्थन करेगी। क्या यूपी के दो "लड़कों" को सफलता इस बार मिलेगी, यह तो आने वाला चुनाव परिणाम ही बताएगा।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+