Tax on Political Parties: राजनीतिक पार्टियों के लिए क्या हैं टैक्स के नियम?
Tax on Political Parties: कांग्रेस ने 21 फरवरी को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पर पार्टी के बैंक खातों से 65 करोड़ रुपये निकाल लेने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस पार्टी पर 115 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया था।
इस पर कांग्रेस ने कहा कि टैक्स रिटर्न का मामला इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित है। आईटी डिपार्टमेंट ने गैर लोकतांत्रिक तरीके से मंगलवार (20 फरवरी) को पार्टी के खाते से पैसे निकाले हैं।

वैसे बीते दिनों इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कांग्रेस के चार बैंक खातों को सीज कर दिया था लेकिन इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल ने कांग्रेस को राहत देते हुए इन खातों से फ्रीज हटवा दिया था। अब कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आईटी विभाग ने उनके खाते से 65 करोड़ निकाल लिए हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि राजनीतिक पार्टियों के लिए आखिर क्या हैं इनकम टैक्स के नियम? क्या इनकम टैक्स के दायरे में आती हैं ये राजनीतिक पार्टियां?
राजनीतिक दलों को टैक्स से मिली है छूट?
देश में पंजीकृत राजनीतिक दलों को आयकर कानून-1961 की धारा 13-ए के तहत टैक्स में छूट मिली हुई है। इन्हें हाउस प्रॉपर्टी, कैपिटल गेन, चंदा और अन्य स्रोत से आय पर टैक्स नहीं देना पड़ता। यहां तक कि ये राजनीतिक दल हजारों करोड़ रुपये की आय को अपने इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाते हैं, पर इनकम टैक्स नहीं देते हैं।
हालांकि, इन टैक्स को लेकर छूट तभी मिलती है, जब राजनीतिक दल चुनावी चंदे का ब्योरा चुनाव आयोग को देता है। राजनीतिक पार्टियों को हर असेसमेंट ईयर के लिए आईटीआर के साथ अकाउंट ऑडिट, इनकम, खर्च और बैलेंस शीट की जानकारी देनी होती है। साथ ही ये भी प्रावधान है कि अगर सेक्शन 29-सी के सबसेक्शन (3) के तहत अपनी रिपोर्ट नहीं देते हैं तो उन्हें दी गई छूट लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) के तहत वापस ले ली जाएगी।
वैसे देश के पंजीकृत राजनीतिक दलों को 20,000 रुपये से कम डोनेशन का कोई हिसाब नहीं देना होता है। इससे ज्यादा डोनेशन चेक या ड्राफ्ट के जरिए होना चाहिए। इसी बात का फायदा ज्यादातर पार्टियां उठाती हैं। खासकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जैसी पार्टी ये साफ कहती है कि मुझे कोई चंदा नहीं मिला क्योंकि कानूनन 20 हजार रुपये से कम के चंदे का हिसाब पार्टी को किसी को नहीं देना होता। वहीं पार्टी के अकाउंट में जमा इस राशि पर कोई टैक्स भी नहीं लगता है।
कांग्रेस आखिर कैसे टैक्स के दायरे में फंसी?
कांग्रेस द्वारा इनकम टैक्स को लेकर दिए गए बयानों को लेकर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला बताते हैं कि आयकर विभाग ने कांग्रेस पार्टी पर 135 करोड़ रुपये के टैक्स की गणना की थी। क्योंकि, साल 2018-19 में 103 करोड़ रुपये टैक्स जमा करना था। वो जमा नहीं किए तो 32 करोड़ का इंटरेस्ट कम्पोनेंट जुड़ गया। इसलिए अब कांग्रेस पार्टी को कुल 135 करोड़ रुपये टैक्स के रुप में जमा करना था। यह इनकम टैक्स असेममेंट 6 जुलाई 2021 को हुआ था।
उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि राजनीतिक पार्टी को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन-13 (ए) के तहत टैक्स नहीं देना पड़ता है, लेकिन, 13-डी और कुछ अन्य सेक्शन में यह भी बताया गया है कि किन परिस्थितियों में टैक्स देना पड़ सकता है।
कांग्रेस ने इस डिमांड के खिलाफ अपील की और अपील करने पर नियमों के तहत उन्हें 20 प्रतिशत राशि जमा करनी थी, लेकिन यहां भी कांग्रेस ने नियमों का पालन नहीं करते हुए सिर्फ 78 लाख रुपये ही जमा कराए। कांग्रेस को कानून के अनुसार तकरीबन 21 करोड़ रुपये सुनवाई से पहले जमा करना था, भले ही सुनवाई में कोई भी फैसला आए। इसलिए इनकम टैक्स अपीलिएंट कमीशनर ने 2022 में ही कांग्रेस की अपील को रद्द कर दिया था।
इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने मई, 2023 में इनकम टैक्स के अपीलिएंट अथॉरिटी के पास दूसरी बार अपील की और कोई स्टे की मांग नहीं की। इसलिए अब कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार इनकम टैक्स विभाग के अधिकारियों के पास है।
किस पार्टी को कितना मिला चंदा?
एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी को 2022-23 के बीच में 7,945 डोनेशन से तकरीबन 719.08 करोड़ रुपये मिले हैं। कांग्रेस पार्टी को 894 डोनेशन में 79.92 करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ दिल्ली से राष्ट्रीय पार्टियों को कुल 276.202 करोड़ रुपये का चंदा मिला, इसके बाद गुजरात से 160.509 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र से 96.273 करोड़ रुपये का चंदा मिला। वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान राष्ट्रीय पार्टियों का कुल चंदा 91.701 करोड़ रुपये बढ़ा है, जो पिछले वित्त वर्ष 2021-22 से 12.09 फीसदी ज्यादा है।
एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक, 2021-22 के दौरान बीजेपी को 614.626 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि कांग्रेस पार्टी को 95.459 करोड़ रुपये चंदा मिला था। बताते चले कि ये वो चंदे का हिसाब है जो 20,000 रुपये से अधिक का चंदा मिला है। उससे कम राशि के चंदे का कोई हिसाब नहीं है। राजनीतिक दलों को कैश में मिलने वाला सारा काला धन इसी नियम की आड़ में छुपा लिया जाता है।
वहीं चुनाव आयोग के हवाले से ये जानकारी दी गई है कि भाजपा को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 2022-23 में कुल 1300 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है। जबकि इन्हीं बॉन्ड के जरिए कांग्रेस को महज 171 करोड़ रुपये का फंड मिला था।
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