Pakistan Media: पाकिस्तानी मीडिया में दाऊद को जहर देने के दावों की भरमार
पाकिस्तान की सरकार या सेना भले ही दाऊद इब्राहिम को जहर दिए जाने की खबर पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दे रही है, लेकिन वहाँ के पब्लिक प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनल पर दाऊद की खबरों की भरमार है।
कोई दाऊद के मरने की खबर को सही बता रहा है तो कोई उसके कराची में रहने पर पाकिस्तान सरकार को ही कोस रहा है। पाकिस्तान में पब्लिक मीडिया प्लेटफॉर्म पर दाऊद के बारे में खबरें देने वालों में आरजू काजमी, ज़फ़र इकबाल, अजाज सैयद और कमर चीमा प्रमुख हैं। ये सभी पाकिस्तान के मीडिया में बड़े नाम हैं।

आरजू ने सबसे पहले खबर दी
आरजू काजमी ने सबसे पहले इस खबर को अपने निजी चैनल भेजा फ्राई के जरिए ब्रेक किया। उन्होंने ही बताया कि दाऊद को जहर दे दिया गया है और वह कराची के एक अस्पताल में भर्ती है। आरजू ने यह भी आशंका जाहिर की कि दाऊद की खबर बाहर ना आ पाए इसलिए पाकिस्तान में 18 दिसम्बर को इंटरनेट बंद कर दिया गया था। हालांकि पाकिस्तान के मीडिया चैनल ने इसके लिए इमरान की पार्टी का वर्चुअल मीडिया कॉन्फ्रेंस को कारण बताया।
पाकिस्तान के बैरिस्टर ने ही सवाल उठाया
बैरिस्टर हमीद बशानी ने कमर चीमा से बातचीत में कहा कि हाल ही में पाकिस्तान में 12-13 लोग मारे गए, वे लोग निश्चित रूप से भारत के खिलाफ दहशतगर्दी में शामिल थे। इसमें दाऊद भी है। वह जहर खा कर अस्पताल में पड़ा है। अब जबकि पाकितान यह मानता ही नहीं कि दाऊद यहाँ है, तो यह कैसे मान सकता है कि वह बीमार है या मर गया है। पाकिस्तान मीडिया जो खामोश है वह ठीक नहीं है। पाकिस्तान को चाहिए कि इंटरनेशनल मीडिया को अस्पताल में ले जाए और सच बताए।
पब्लिक की राय में पाकिस्तान ही दोषी
सना अमजद ने अपने शो में दाऊद के मुद्दे पर पाकिस्तान की अवाम से प्रतिक्रिया ली। सना के चैनल के साथ 10 लाख लोग जुड़े हैं। सना से बातचीत में पाकिस्तान के लेखक नबील ने कहा कि इस खबर को हल्के में नहीं ले सकते। ओसामा बिन लादेन के बारे में भी ऐसा ही कहा था, लेकिन वह यहीं मिला। यदि अब भी हम सच ना बोले तो दुनिया में हमारी साख और मिट जाएगी। अगर किसी दहशतगर्द को हम पनाह दे रहे हैं तो हम अपने लिए ही गड्ढा खोद रहे हैं।
आलिया शाह ने अपने चैनल पर एक प्रोग्राम में कहा कि नवंबर के महीने में दाऊद को लेकर एक बड़ी घटना हुई थी। एक कॉल ट्रेस हुई थी। उस फोन कॉल में यह कहते हुए सुना गया कि जेद्दा से जूते लेकर आए। नवंबर में ही एक आदमी और पकड़ा गया, जो दाऊद को खत्म करना चाहता था। आलिया के अनुसार ऐसा ही कोई और आदमी आया होगा और जहर देने में सफल हुआ है। अभी इस खबर को इसलिए छुपाया जा रहा है कि पहले मामले को शांत होने दिया जाए। आलिया के अनुसार पाकिस्तान की यह खामोशी नीम रजामंदी का सबूत है।
पाकिस्तान ले रहा है कनाडा की आड़
भले ही पाकिस्तान के आका दाऊद पर खामोश हों लेकिन एक के बाद एक आतंकवादियों के मारे जाने को लेकर पकिस्तान की सेना बेचैन है। पाकिस्तान के मीडिया में इस बात की अब चर्चा हो रही है कि जिस तरह से पाकिस्तान के अंदर आतंकवादी नेताओं की गुपचुप हत्या हो रही है, उससे यही लगता है कि इसमें मोदी सरकार की कहीं ना कहीं भूमिका हो सकती है। अपनी बात पर वज़न डालने के लिए पाकिस्तानी कनाडा और अमेरिका के आरोपों की आड़ ले रहे हैं।
16 दिसम्बर को डॉन अखबार में प्रकाशित एक लेख में पाकिस्तानी लेखक शहजाद शरजील ने लिखा है कि भारतीय कहते हैं कि दाऊद इब्राहिम मुंबई पर 2008 के आतंकी हमले के काफी समय बाद तक पहले दुबई में और अब कराची में विलासिता की जिंदगी जी रहा है। वे उसी लेख में हाफिज सईद का भी नाम लेते हैं और कहते हैं कि अपने विरोधियों की हत्या किसी और देश में जायज नहीं ठहरा सकते। कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हंगामा मचा दिया था, जिन्होंने भारत सरकार पर इस साल जून में वैंकूवर के पास भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक हरदीप निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था। आरोप सितंबर में लगे, लेकिन नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में दोनों के बीच मतभेद स्पष्ट दिखे, जहां ट्रूडो ने मेज़बान सरकार द्वारा व्यवस्थित होटल सुइट में रुकने से स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया।
शहजाद शरजील ने आगे लिखा है- मोदी की प्रसिद्ध 56 इंच की छाती फूल गई। राजनयिकों को बाहर निकाल दिया गया और वीज़ा सेवाएँ निलंबित कर दी गईं। जब मामला शांत हो रहा था और निज्जर हत्या की जांच पर सहयोग पर काम किया जा रहा था, तभी अमेरिकियों ने सार्वजनिक रूप से भारतीय अधिकारियों पर भारतीय मूल के अमेरिकी गुरपतवंत पन्नू की अमेरिकी धरती पर हत्या कराने की साजिश रचने का आरोप लगाकर पूरे मामले को फिर से हवा दे दी है।
भारत अपने दावे पर कायम
पाकिस्तान का मीडिया जो भी कहे भारत नियमित रूप से पाकिस्तान पर भारत के सर्वाधिक वांछित भगोड़ों में से एक दाऊद को शरण देने का आरोप लगाता रहा है। तत्कालीन भारतीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा था कि भारत के पास दाऊद इब्राहिम की पाकिस्तान में मौजूदगी के सबूत हैं, और वह उसे "चाहे कुछ भी हो" वापस लाएगा। पाकिस्तान भारत के इस आरोप से इंकार करता रहा है कि वह भारत के सबसे वांछित व्यक्तियों में से एक दाऊद इब्राहिम को तब से शरण देता रहा है, जब 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के बाद वह भगोड़ा बन गया था।












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