पाली सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी हैट ट्रिक के प्रयास में, चीफ जस्टिस लोढ़ा तीन बार यहां से सांसद रहे
Pali Lok Sabha Seat: पाली-मारवाड़ की यूं तो अनेक विशेषताएं है लेकिन यह क्षेत्र मुख्य दो-तीन संदर्भों के लिए जाना जाता है। एक तो पाली की पंचायती, जिसका कोई तोड़ नहीं है। यह पंचायती पूरे देश में प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां के लोग देश के कोने-कोने में बसे हुए हैं और वे जब भी इकट्ठे होते हैं तो पूरे देश की पंचायती (चर्चा) करते हैं।
दूसरा, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद से सेवानिवृत न्यायमूर्ति गुमानमल लोढ़ा पाली से तीन बार लोकसभा सांसद रहे हैं। तीसरी एक और खास वजह है जो पाली को विशेष बनाती है कि पाली ही राजस्थान का एकमात्र ऐसा शहर है, जहां पर आज भी पानी का संकट है और इस कमी को दूर करने के लिए जोधपुर से वाटर ट्रेन चलाई जाती है। इन सब मुद्दों के बीच वर्तमान लोकसभा चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के दो बार के सांसद रहे पीपी चौधरी व कांग्रेस की संगीता बेनीवाल के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है।
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18 चुनावों में से आठ बार कांग्रेस और सात बार जीती भाजपा
आजादी के बाद से लेकर अब तक हुए 18 लोकसभा चुनावों में 8 बार कांग्रेस और 7 बार बीजेपी जीती है। दो बार निर्दलीय और एक बार जनता पार्टी का प्रत्याशी विजयी रहा है। 1952 में हुए पहले चुनाव को जनरल अजीत सिंह ने निर्दलीय लड़कर जीत लिया। 1957 में कांग्रेस से हरीशचंद्र माथुर, 1962 में जसवंत राज मेहता, 1967 में स्वतंत्र पार्टी से एस. के. तापड़िया यहां से सांसद बने।
1971 में पहली बार पाली के निवासी मूलचंद डागा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। इसके बाद 1977 में जनता पार्टी से अमृतलाल नाहटा, 1980 व 1984 में कांग्रेस आई से मूलचंद डागा, 1988 के उप चुनाव में कांग्रेस से शंकरलाल शर्मा चुने गए। इसके बाद 1989, 1991 व 1996 में जोधपुर के निवासी गुमानमल लोढ़ा यहां से लगातार तीन बार चुनाव जीते।
1978 में राजस्थान उच्च न्यायालय में एडवोकेट कोटे से न्यायाधीश नियुक्त होने से पहले वे 1972 से 1977 तक राजस्थान विधान सभा के सदस्य भी रहे। जस्टिस लोढ़ा सन 1988 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। पद से सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति गुमानमल लोढ़ा सक्रिय राजनीति में लौटे और तीन बार लोकसभा के सदस्य रहे। गौरतलब है कि जस्टिस गुमानमल लोढ़ा के पुत्र मंगलप्रभात लोढ़ा, जो रीयल एस्टेट कंपनी लोढ़ा डेवलपर्स के मालिक हैं, मुंबई के सबसे पॉश विधानसभा क्षेत्र मालाबार हिल से पांच बार विधायक चुने गए हैं।
जस्टिस लोढ़ा के बाद 1998 में कांग्रेस के मीठालाल जैन, तथा 1999 व 2004 में भाजपा के पुष्प जैन ने लोकसभा में पाली का प्रतिनिधित्व किया। इस सीट के परिसीमन में जोधपुर जिले के जाट एवं सीरवी बाहुल्य वाले विधानसभा क्षेत्र बिलाड़ा, भोपालगढ़ और ओसियां पाली लोकसभा सीट में जोड़े जाने के बाद 2009 के चुनाव में कांग्रेस के बद्रीराम जाखड़ चुनाव जीते। लेकिन मोदी लहर में 2014 व 2019 में भाजपा के पीपी चौधरी सांसद चुने गए। भाजपा ने उन्हें तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है। वही कांग्रेस ने राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष, जोधपुर देहात महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष रही संगीता बेनीवाल को उम्मीदवार बनाया है।
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पाली की आठ में से 6 विधानसभा पर भाजपा का कब्जा
पाली संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभाओं में से तीन जोधपुर जिले की है, जिसमें बिलाड़ा, ओसियां और भोपालगढ़ विधानसभा शामिल है। जिसमें बिलाड़ा (एससी) से भाजपा के अर्जुन लाल गर्ग, ओसियां से भाजपा के भैराराम सियोल तथा भोपालगढ़ (एससी) से कांग्रेस की गीता बरवड़ विधायक है।
इसके अलावा पाली जिले की पांच विधानसभाओं में से बाली से भाजपा के पुष्पेंद्र सिंह राणावत, सुमेरपुर से भाजपा के जोराराम कुमावत, सोजत से भाजपा की शोभा चौहान और मारवाड़ जंक्शन से भाजपा के केसाराम चौधरी विधायक हैं। वहीं पाली शहर से कांग्रेस के भीमराज भाटी विधायक हैं। इस प्रकार 8 विधानसभा में से 6 पर भाजपा और दो पर कांग्रेस के विधायक है। गत 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के पीपी चौधरी को 9,00,149 वोट मिले थे और उनकी जीत हुई थी। वहीं कांग्रेस के बद्रीराम जाखड़ को 4,18,552 वोट मिले।
आज भी पाली के लिए जोधपुर से चलती है वाटर ट्रेन
पाली लोकसभा क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या है। कभी पाली जिले में स्थित जवाई बांध से जोधपुर को पीने का पानी पहुंचाया जाता था लेकिन अब गर्मी में पानी के लिए पाली शहर तरसता है। पाली राजस्थान का एक मात्र ऐसा जिला है, जहां गर्मी के दौरान पेयजल की समस्या होने पर जोधपुर से वाटर ट्रेन चलाई जाती है। वहीं प्रदूषण का मुद्दा भी जस का तस बना हुआ है। किसानों और उद्यमियों के साथ जनता के लिए भी यह परेशानी का कारण है। यहां उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित पानी से जमीन खराब होकर बंजर हो रही हैं। मगर लंबे समय से इन समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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