Deepika Nagar Autopsy Report: 'कान से खून, छाती-पेट पर खरोंच, दिमाग में ब्लड क्लॉट', बॉडी पर 10 से ज्यादा घाव

Deepika Nagar Autopsy Report: मस्तिष्क में जमा खून का थक्का... फटी हुई तिल्ली... छाती और पेट पर खरोंच... कान से बहता खून... शरीर पर 10 से ज्यादा गहरे और उथले घाव। 25 साल की दीपिका नागर ने मरने से पहले आखिर कितना दर्द सहा होगा, इसका अंदाजा उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़कर लगाया जा सकता है। ग्रेटर नोएडा में ससुराल की तीन मंजिला की छत से गिरने की कहानी के पीछे अब कई ऐसे सवाल खड़े हो गए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया है।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में हुई दीपिका नागर की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं लग रही। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई चोटें किसी भयावह हिंसा की तरफ इशारा कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शरीर के अलग-अलग हिस्सों में गंभीर अंदरूनी और बाहरी चोटें थीं, जबकि दिमाग में ब्लड क्लॉट और तिल्ली फटने जैसी स्थिति ने पूरे केस को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। अंदरूनी अंगों को पहुंचे गंभीर नुकसान ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर उस रात दीपिका के साथ क्या हुआ था?

Deepika Nagar Autopsy Report

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट 19 मई को जारी की गई। यह दो सदस्यीय मेडिकल टीम द्वारा किया गया और पूरी तरह वीडियोग्राफ किया गया था। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि शरीर पर कई गंभीर बाहरी और आंतरिक चोटें पाई गईं, जो उच्च स्तर के आघात (Blunt Trauma) का संकेत देती हैं।

Deepika Nagar Post-Mortem Report: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्दनाक चीखें...

बाहरी चोटें (External Injuries):

  • दाहिने चेहरे पर लगभग 12 सेमी x 9 सेमी की सूजन।
  • बाईं कोहनी पर 9 सेमी x 6 सेमी की सूजन।
  • बाईं कलाई पर 8 सेमी x 5 सेमी की चोट।
  • दाहिनी जांघ पर 38 सेमी x 14 सेमी का बड़ा नीला दबाव निशान (bruise)।
  • बाएं घुटने पर 4 सेमी x 1.5 सेमी का गहरा घाव।
  • पीठ के निचले हिस्से और पेट पर 1.5 सेमी x 1 सेमी का घाव।
  • दाहिनी श्रोणि (iliac crest) पर 25 सेमी x 22 सेमी का बड़ा गोलाकार नीला निशान।
  • दाहिने हाथ के चारों ओर गोलाकार चोट के निशान (जिसे बंधन या पकड़ने के निशान माना जा रहा है)।
  • बाएं कान से खून बह रहा था।
  • छाती और पेट के बाईं ओर गहरे खरोंच और दबाव के निशान।

आंतरिक चोटें (Internal Findings):

  • मस्तिष्क के मध्य और बाएं हिस्से में हेमाटोमा (रक्त का थक्का)।
  • तिल्ली (Spleen) का फटना।
  • बायां गुर्दा पीला पड़ना (Shock या Heavy Blood Loss का संकेत)।
  • हृदय के सभी कक्ष पूरी तरह खाली।
  • शरीर के विभिन्न हिस्सों में व्यापक रक्तस्राव।

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, ये चोटें सामान्य गिरने से होने वाली चोटों से कहीं ज्यादा गंभीर हैं। कान से खून, सिर में ब्लिडिंग और फटी तिल्ली जैसी चोटें तेज आघात या मारपीट का परिणाम हो सकती हैं।

शादी के 17 महीने बाद मौत

दीपिका नागर की शादी रितिक तंवर के साथ अगस्त 2024 में हुई थी। परिवार ने इस भव्य शादी पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए थे। लेकिन शादी के बाद दहेज की मांग और उत्पीड़न शुरू हो गया। दीपिका के पिता संजय नागर का आरोप है कि रितिक और उसके परिवार ने Toyota Fortuner SUV और 45-50 लाख रुपये नकद दहेज की मांग की। उन्होंने कुछ रकम और Scorpio N दी भी, लेकिन मांगें पूरी नहीं हुईं तो अत्याचार बढ़ता गया।

घटना 17 मई रात की है। दीपिका ने रोते हुए फोन पर अपने माता-पिता को बताया कि ससुराल वाले उन पर दहेज को लेकर हमला कर रहे हैं। कुछ घंटों बाद रात करीब 12:30 बजे संजय नागर को ससुराल से फोन आया कि दीपिका छत से गिरकर घायल हो गई हैं। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें मृत पाया गया।

पिता संजय नागर ने कहा, 'मेरी बेटी को मारकर छत से फेंका गया। वे उसे मार डालना चाहते थे। मैंने जितना मांगा उतना दिया, फिर भी उन्होंने मेरी बेटी की हत्या कर दी। मुझे न्याय चाहिए।'

कानूनी कार्रवाई क्या हुई है?

दीपिका के पिता की लिखित शिकायत पर ग्रेटर नोएडा पुलिस ने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। मुख्य रूप से दहेज निषेध अधिनियम, क्रूरता (498A), हत्या (302) और सबूत नष्ट करने संबंधी धाराएं शामिल हैं। पुलिस ने तुरंत रितिक तंवर और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ जारी है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम अब CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन, दीपिका के फोन कॉल्स और पड़ोसियों के बयानों की जांच कर रही है। रिपोर्ट में चोटों की प्रकृति 'Fall From Height' से मैच नहीं करती, बल्कि 'Assault Before Fall' की ओर इशारा करती है।

ग्रेटर नोएडा में दहेज हिंसा सबसे आगे...

यह घटना अगस्त 2025 में हुई, निक्की भाटी हत्याकांड की याद दिलाती है। निक्की को भी कथित तौर पर दहेज की 36 लाख रुपये की मांग को लेकर आग लगा दी गई थी। ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन में पिछले कुछ वर्षों में दहेज संबंधी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां नवविवाहित महिलाओं पर ससुराल में अत्याचार की खबरें आती रही हैं।

दहेज समस्या: सामाजिक और कानूनी पहलू

भारत में दहेज प्रथा अभी भी गहरी जड़ें जमाए हुए है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, हर साल हजारों महिलाएं दहेज के लिए अपनी जान गंवाती हैं। ज्यादातर मामलों में 'आत्महत्या' या 'गिरकर मौत' बताया जाता है, लेकिन पोस्टमॉर्टम और जांच में अक्सर हमले के सबूत मिलते हैं।

केस में उल्लेखनीय बातें:

  • शादी में भारी खर्च के बावजूद मांगें जारी।
  • युवती का रोते हुए फोन करना: डिस्ट्रेस कॉल।
  • चोटों का पैटर्न: गिरने से पहले मारपीट का संकेत।
  • परिवार की त्वरित गिरफ्तारी।

यह मामला महिलाओं की सुरक्षा, इन-लॉज रिलेशनशिप और दहेज उन्मूलन की विफलता को फिर से रेखांकित करता है। दीपिका जैसे कई केस में शुरुआती शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता, जिसका नतीजा जानलेवा होता है।

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