Delhi News: सड़कों-पेड़ों के नीचे नहीं दिखेंगे भगवान! खंडित मूर्तियों के लिए सरकार का प्लान, ऐसे होगा विसर्जन
अक्सर हमारे घरों में जब भगवान की मूर्तियां या तस्वीरें खंडित (टूटी-फूटी) हो जाती हैं, तो हम उन्हें आदर के साथ किसी पेड़ के नीचे, पार्क के कोने में, सड़क किनारे रख देते हैं या फिर नदियों में प्रवाहित कर देते हैं। इससे हमारी धार्मिक भावनाएं तो आहत होती ही हैं साथ ही सार्वजनिक जगहों पर गंदगी भी फैलती है। इसी समस्या का एक गरिमापूर्ण समाधान निकालते हुए दिल्ली सरकार ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 19 मई को ऐलान किया है कि सरकार अब ऐसी टूटी-फूटी मूर्तियों के सम्मानजनक विसर्जन और रीसाइक्लिंग के लिए पूरी दिल्ली में विशेष कलेक्शन सेंटर (संग्रहण केंद्र) स्थापित करने जा रही है।

आस्था का सम्मान और पर्यावरण की सुरक्षा दोनों एक साथ
इस योजना की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर लिखा कि दिल्ली सरकार हमारी श्रद्धेय मूर्तियों को पूरे आदर-सत्कार के साथ रीसायकल करने के लिए ये समर्पित सेंटर शुरू कर रही है। मुख्यमंत्री ने इसे एक स्वच्छ, सुंदर और सांस्कृतिक रूप से जागरूक 'विकसित दिल्ली' की दिशा में एक दिल से उठाया गया कदम बताया है।
इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि सरकार इसे पूरी तरह से जनता की सहभागिता के साथ जमीन पर उतारना चाहती है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली के नागरिकों से खुद अपील की है कि वे अपने-अपने इलाकों में इन कलेक्शन सेंटर्स को बनाने के लिए सही और उपयुक्त जगहों के सुझाव (फीडबैक) सरकार के साथ साझा करें।
इस नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?
- धार्मिक मर्यादा: अक्सर सड़कों या पेड़ों के नीचे रखी मूर्तियों का अनादर होता है, जो अब इन सेंटर्स के बनने से पूरी तरह रुक जाएगा।
- स्वच्छता को बढ़ावा: पार्कों, फुटपाथों और सड़कों के किनारे मूर्तियों के जमा होने से जो गंदगी दिखती थी, उससे दिल्ली को मुक्ति मिलेगी।
- नदियों का संरक्षण: लोग मूर्तियों को सीधे यमुना या अन्य जल स्रोतों में नहीं फेंकेंगे, जिससे पानी में केमिकल और प्रदूषण फैलने का खतरा कम होगा।
- सम्मानजनक रीसाइक्लिंग: इन केंद्रों पर जमा होने वाली मूर्तियों को धार्मिक नियमों को ध्यान में रखते हुए आदरपूर्वक रीसायकल (पुनर्चक्रण) किया जाएगा।













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