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Women as Commando: क्या है MARCOS, कैसे होती है इनकी भर्ती और ट्रेनिंग

भारतीय नौसेना के स्पेशल फोर्स MARCOS या मरीन कमांडो फोर्स में अब महिलाओं की भर्तियां भी की जाएगी। अगले साल अग्निवीर के रूप में नौसेना में भर्ती होने वाली महिला अधिकारियों और सेलर के पास MARCOS बनने का विकल्प होगा।

IFA Women as Commando What is MARCOS recruitment and training process

Women as Commando: भारत में तीनों सेनाओं, थलसेना, नौसेना और वायुसेना के पास स्पेशल फोर्स का जत्था मौजूद है, जो सिर्फ स्पेशल ऑपरेशंस के लिए गठित है। जैसे MARCOS भारतीय नौसेना की स्पेशल फोर्स है, वैसे ही भारतीय थलसेना में पेरा स्पेशल फोर्स और भारतीय वायुसेना में गरुड़ कमांडो जैसी भी स्पेशल यूनिट्स हैं। MARCOS एक बहुत ही खतरनाक स्पेशल फोर्स है, इन्हें मगरमच्छ और दाढ़ीवाला फौज भी कहा जाता है।

क्या है MARCOS या मरीन कमांडो फोर्स?

MARCOS स्पेशल ऑपरेशन फोर्स का गठन फरवरी 1987 में किया गया था। दरअसल, भारतीय नौसेना ने अप्रैल 1986 में एक स्पेशल फोर्स को गठित करने की तैयारी शुरू की जो समुद्री वातावरण में जासूसी करने सहित किसी भी तरह के खतरनाक मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम हो। गौरतलब है कि MARCOS भारतीय नौसेना की ट्रेनिंग प्राप्त करते हैं लेकिन वो थलसेना और वायुसेना के ऑपरेशनों में भी सक्षम होते हैं। MARCOS भारतीय नौसेना के स्पेशल ऑपरेशंस को संभालता है जो संघर्ष वाले क्षेत्रों में शांत और गुप्त रूप से अपना मिशन करने, काउंटर टेररिज्म, बचाव कार्यों, आदि के लिए जाने जाते हैं। MARCOS का मोटो 'द फ्यू, द फियरलेस' है, जो उनके ऑपरेशंस में साबित भी होता है और यह भी बताता है कि उनकी ट्रेनिंग कितनी कठिन होती है।

कैसे होती है MARCOS की ट्रेनिंग

MARCOS बनने की सबसे बेसिक रिक्वायरमेंट है कि व्यक्ति सेलर या नौसेना अफसर होने चाहिए, उसकी आयु कम-से-कम 20 वर्ष होनी चाहिए। इन कमांडो की ज्यादातर ट्रेनिंग INS अभिमन्यु पर होती है जोकि MARCOS का बेस भी है। MARCOS कमांडो जबरदस्त गोताखोर भी होते हैं जोकि समुद्र के अंदर कई मील तक तैर सकते हैं।

ट्रेनिंग में एयरबोर्न ऑपरेशन, कॉम्बैट डाइविंग इंस्ट्रक्शन, टेररिज्म के खिलाफ ऑपरेशन, हाईजैकिंग एवं पाइरेसी, डायरेक्ट एक्शन, घुसपैठ और एक्सफिल्ट्रेशन तकनीक शामिल है। MARCOS कमांडो का तीन दिवसीय योग्यता और शारीरिक फिटनेस टेस्ट लिया जाता है। इन कमांडो की कुल 7-8 महीने की ट्रेनिंग होती है जिसमें एक हफ्ते की बहुत ही खतरनाक ट्रेनिंग दी जाती है और यहीं से लगभग 80 प्रतिशत सैनिक बाहर हो जाते हैं।

MARCOS की अहम भूमिकाएं

झेलम नदी और वुलर झील में MARCOS की 2-4 टीमें साल भर दोनों झीलों पर तैनात रहती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्ष 2020 से MARCOS लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC), पूर्वी लद्दाख में चीन की गतिविधियों के खिलाफ मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। MARCOS लद्दाख के पांगोंग लेक के आसपास भी मौजूद हैं और चीन की गतिविधियों पर नजर रखे रहे है। नवंबर 2008 (26/11) में मुंबई पर आतंकी हमलों और कारगिल युद्ध के दौरान भी MARCOS ने बहुत ही अहम भूमिका निभाई थी।

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