Iran War Update: ईरान पर घर में घिरे ट्रंप, रिपब्लिकन सांसदों ने खिलाफ किया वोट, अब रुकेगी जंग?
Iran War Update: बिना सीनेट को भरोसे में लिए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने जंग तो छेड़ दी लेकिन अब मामला उनके हाथ से बाहर जाता दिख रहा है। क्योंकि ईरान पर ट्रंप के हमले वाले आदेशों को रोकने के लिए अमेरिकी सीनेट (अमेरिकी संसद) ने एक प्रस्ताव को आगे बढ़ा दिया है। इस प्रस्ताव का मकसद राष्ट्रपति के युद्ध संबंधी अधिकारों पर रोक लगाना है। खास तौर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या कांग्रेस की मंजूरी के बिना अमेरिका किसी दूसरे देश के खिलाफ लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई जारी रख सकता है।
इस प्रस्ताव में युद्ध की लागत, उसकी रणनीति, अमेरिका के अंतिम लक्ष्य और लगातार बढ़ते सैन्य तनाव जैसे मुद्दों पर बहस की मांग की गई है। हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस प्रस्ताव को पूरी तरह पारित कराना अभी भी बेहद मुश्किल है। जानेंगे इसके पीछे का गणित

सीनेट में हुई वोटिंग, क्या रहा नतीजा?
मंगलवार को सीनेट में इस युद्ध शक्ति प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए वोटिंग हुई। इसमें 50 सांसदों ने समर्थन में और 47 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। यदि यह प्रस्ताव आगे चलकर पारित हो जाता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ चल रहे मिलिट्री ऑपरेशन्स रोकने पड़ने या फिर उन्हें बंद करने की भी नौबत आ सकती है। फरवरी के बाद पहला मौका है जब ट्रंप वाकई में घिरते दिखे। ट्रंप के अपने सांसद भी उनका साथ छोड़ने लगे हैं।
चार रिपब्लिकन सांसद भी गए खिलाफ
इस प्रस्ताव को समर्थन देने वालों में सिर्फ डेमोक्रेट ही नहीं थे, बल्कि चार रिपब्लिकन सांसद भी सामने आए। इनमें लुइसियाना के बिल कैसिडी, केंटकी के रैंड पॉल, मेन की सुसान कॉलिन्स और अलास्का की लिसा मुर्कोव्स्की शामिल रहीं। इन चारों रिपब्लिकन नेताओं ने लगभग सभी डेमोक्रेट सांसदों के साथ मिलकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं पेन्सिल्वेनिया के सीनेटर John Fetterman अकेले ऐसे डेमोक्रेट रहे जिन्होंने इसके खिलाफ वोट दिया। इसके अलावा तीन रिपब्लिकन सांसद वोटिंग में शामिल ही नहीं हुए।
प्रस्ताव पास होना अभी भी मुश्किल
हालांकि यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में आगे बढ़ गया है, लेकिन इसके कानून बनने की राह अब भी बेहद कठिन मानी जा रही है। सबसे पहले इसे सीनेट में अंतिम मतदान का सामना करना होगा। उसके बाद रिपब्लिकन-कंट्रोल्ड हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी इसे मंजूरी चाहिए होगी।
अगर यह दोनों सदनों से पास होकर राष्ट्रपति ट्रंप तक पहुंचता भी है, तो ट्रंप द्वारा इसे वीटो किए जाने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। यानी राष्ट्रपति अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल कर इस प्रस्ताव को रोक सकते हैं।
डेमोक्रेट्स ने क्यों बताया इसे राजनीतिक रूप से अहम?
डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि भले ही यह प्रस्ताव कानून न बन पाए, लेकिन राजनीतिक रूप से इसका बड़ा असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि इससे रिपब्लिकन सांसदों को सार्वजनिक तौर पर यह बताना पड़ेगा कि वे ईरान के खिलाफ इस महंगे युद्ध के पक्ष में हैं या विरोध में।
क्या है 1973 का युद्ध शक्ति कानून?
यह पूरा विवाद 1973 में बने अमेरिकी युद्ध शक्ति प्रस्ताव यानी War Powers Resolution से जुड़ा हुआ है। इस कानून के मुताबिक अगर अमेरिकी राष्ट्रपति किसी जंग में सेना भेजते हैं, तो उन्हें 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से इसकी मंजूरी लेनी होती है।
अगर कांग्रेस मंजूरी नहीं देती, तो राष्ट्रपति को सैन्य अभियान खत्म करना पड़ता है। इसके अलावा सेना की वापसी के लिए अतिरिक्त 30 दिनों का समय भी दिया जा सकता है। ईरान युद्ध के मामले में यह 60 दिन की समय-सीमा 1 मई को खत्म हो चुकी थी, जबकि सेना की वापसी की सीमा 1 जून को पूरी हो रही है। लिहाजा ट्रंप पर दबाव बढ़ता जा रहा था।
क्या हो सकता है आगे?
अगर ट्रंप ने समय रहते ईरान से बातचीत कर मामला हल नहीं किया तो अमेरिकी संसद के रास्ते उनका आगे युद्ध लड़ना मुश्किल हो सकता है। अगर वह वीटो भी लगाते हैं तब भी उनके सामने बहुत ज्यादा विकल्प नहीं होंगे। ऐसे में ट्रंप खुद ही अपने जाल में फंसते नजर आ रहे हैं।
इस मामले पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।














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