वो दमदार फैक्ट्स जो बनाते हैं भारत के Rafale को चीन के JF-17 और पाकिस्तान के F-16 से ज्यादा ताकतवर
2015 में भारत सरकार ने फ्रांस से 36 राफेल खरीदने की एक डील की थी। 15 दिसंबर 2022 को भारत को इस डील का आखिरी 36वां राफेल मिल गया है।

दुनिया के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में एक नाम राफेल का भी शुमार है। अब यह भारत के रक्षा बेड़े में भी शामिल हो गया है। भारतीय सेना के पास ऐसे 36 विमान हैं जो किसी भी परिस्थिति में दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में एकदम काबिल हैं। आइए जानते है राफेल के ऐसे फैक्ट्स के बारे में जो इसे चीन के JF-17 और पाकिस्तान के F-16 से ताकतवर बनाते हैं।
वजन में दमदार
राफेल 24,500 किलो भार ढोने की क्षमता रखता है। जबकि बिना किसी भार के इसका वजन 9,500 किलोग्राम रहता हैं। वही चीन का JF-17 खाली होने पर लगभग 6,500 किलोग्राम और पूरा स्टॉक व सशस्त्र होने पर अधिकतम सिर्फ 12,300 किलोग्राम वजन ढो सकता। उधर अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिया गया F-16 पूरी तरह स्टॉक होने और सशस्त्र होने पर लगभग 21,000 किलो का भर उठा सकता हैं।
कॉम्बेट रेडियस में भी राफेल एक कदम आगे
कॉम्बेट रेडियस एक अधिकतम दूरी होती है, जो कोई लड़ाकू विमान सामान्य भार के साथ अपने बेस से दूर उड़ सकता है और बिना ईंधन भरे वापस आ सकता है। इसमें सभी सुरक्षा और परिचालन ज़रूरतों को ध्यान रखा जाता है। भारतीय वायु सेना द्वारा खरीदे गए राफेल की कॉम्बैट रेडियस 1,850 किलोमीटर के आसपास है, वहीं चीन के JF-17 की कॉम्बैट रेडियस 1,350 किलोमीटर और पाकिस्तान के F-16 की कॉम्बैट रेडियस 1370 किलोमीटर है।
इजन और थ्रस्ट में भी राफेल का मुकाबला नहीं
लड़ाकू विमानों में इंजन पावरफुल होना बहुत ही जरूरी होता है। बात की जाए राफेल की तो इसमें ट्विन इंजन है जो प्रति इंजन 50 किलोन्यूटन से 75 किलोन्यूटन अर्थात कुल 100 से 150 किलोन्यूटन थ्रस्ट पैदा करने में सक्षम है। इसके मुकाबले चीन के JF-17 और पाकिस्तान के F-16 सिंगल इंजन लड़ाकू विमान है, जोकि बेशक कम थ्रस्ट पैदा कर पाते हैं। चीन का JF-17 80-85 किलोन्यूटन और पाकिस्तान का F-16 लगभग 100 किलोन्यूटन थ्रस्ट ही पैदा कर पाते है।
रडार में भी राफेल दूसरों से इक्कीस
भारतीय वायुसेना के राफेल SPECTRA नामक तकनीक से लैस है जो एक बार में 40 टारगेट को आइडेंटिफाई कर सकता है। राफेल का देखने का रेडियस 90 मील है। वहीं पाकिस्तान का F-16 लड़ाकू विमान राफेल के आधे यानी 20 टारगेट को ही निशाना बना सकता है और F-16 का रेडियस 85 मील है। और इस मुकाबले चीन के JF-17 में NRIET KLJ-7 रडार है जो सिर्फ 10 टारगेट को ही एक बार में पहचान पाता है।
रेट ऑफ क्लाइंब में राफेल का मुकाबला नहीं
रेट ऑफ क्लाइंब एक वैल्यू होती है जो दर्शाती है कि एक सेकंड में कोई भी लड़ाकू विमान कितने मीटर जमीन से आसमान में ऊपर जाता है। राफेल की रेट ऑफ क्लाइंब 350 मीटर प्रति सेकंड है वहीं पाकिस्तान के F-16 की रेट ऑफ क्लाइंब 250 मीटर प्रति सेकंड है, और चीन के JF-17 लड़ाकू विमान का रेट ऑफ क्लाइंब 300 मीटर प्रति सेकंड है।
फ्यूल कैपेसिटी भी बेजोड़
फ्यूल कैपेसिटी किसी भी लड़ाकू विमान में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत के राफेल की इंटरनल फ्यूल कैपेसिटी 4.7 टन और एक्सटर्नल फ्यूल कैपेसिटी 6.7 टन तक है जो लंबी उड़ान भरने के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके मुकाबले चीन के JF- 17 की बात की जाए तो उसकी इंटरनल फ्यूल कैपेसिटी रफेल से लगभग आधी यानी 2.3 टन है और पाकिस्तान के F-16 की एक्सटर्नल फ्यूल कैपेसिटी 1.3 टन और इंटरनल फ्यूल कैपेसिटी 3.1 टन है।
रेट ऑफ फायर में दुश्मनों के छक्के छुड़ा देगा राफेल
रेट ऑफ फायर यह दर्शाती है कि प्रति मिनट कोई भी लड़ाकू विमान गोलियों के कितने राउंड दाग सकता है। भारत द्वारा फ्रांस से खरीदे गए डसॉल्ट राफेल प्रति मिनट 2500 राउंड्स फायर कर सकते हैं। वही चीन का JF-17 2000 राउंड्स प्रति मिनट फायर कर सकता है। किसी भी युद्ध में राउंड्स प्रति मिनट (RPM) बहुत ज्यादा अहम भूमिका निभाता है।
फैरी रेंज में राफेल ने किया चीन को पीछे
आसान भाषा में फैरी रेंज का मतलब होता है एक विमान दिए गए ईंधन के साथ अधिकतम कितनी दूरी तक उड़ सकता है बिना रिफ्यूल कराए। राफेल की फैरी रेंज 3,700 किलोमीटर है और वहीं चीन के JF-17 की फैरी रेंज 3,500 किलोमीटर है।
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