चीनी बॉर्डर के समीप भारत ने किया शक्तिप्रदर्शन, राफेल-सुखोई समेत 40 लड़ाकू विमानों से गूंजा आसमान

भारतीय वायुसेना ने राफेल और सुखोई -30 एमकेआई जैसे फ्रंटलाइन लड़ाकू विमानों के साथ हवाई युद्धाभ्यास शुरू किया। इस युद्धाभ्यास में राफेल और सुखोई-30MK समेत भारतीय वायुसेना के लगभग 40 फ्रंट लाइन लड़ाकू विमान शामिल हुए।

command-level exercise in arunachal Pradesh

Image: File

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन और भारत के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने राफेल और सुखोई -30 एमकेआई जैसे फ्रंटलाइन लड़ाकू विमानों के साथ हवाई युद्धाभ्यास शुरू किया। दो दिवसीय यह युद्धाभ्यास गुरुवार को शुरू हुआ। असम और अरुणाचल प्रदेश में हुए इस युद्धाभ्यास में राफेल और सुखोई-30MK समेत भारतीय वायुसेना के लगभग 40 फ्रंट लाइन लड़ाकू विमान शामिल हुए।

चीन को दिया सख्त संदेश

चीन को दिया सख्त संदेश

तवांग सेक्टर में एलएसी (LAC) पर चीनी सैनिकों के साथ झड़प से पैदा हुए स्थिति के बीच भारतीय वायुसेना के इस युद्धाभ्यास को ड्रैगन को दिए जा रहे एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, रक्षा अधिकारियों का कहना है कि ये अभ्यास पहले से ही निर्धारित था। अरुणाचल प्रदेश में हुए हालिया संघर्ष की घटना से इसका कोई लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही इंडियन एयरफोर्स ने ये भी साफ किया है, कि इस अभ्यास का मकसद किसी भी पल युद्ध के लिए तैयार होना सुनिश्चित करना है।

राफेल का अंतिम बेड़ा भी शामिल

राफेल का अंतिम बेड़ा भी शामिल

इस युद्धाभ्यास में सभी फ्रंट लाइन लड़ाकू विमानों के अलावा ग्राउंड से जुड़े कई तरह के सैन्य संसाधनों को भी अभ्यास में शामिल किया गया। खास बात यह भी रही कि पूर्वोत्तर में इस महत्वपूर्ण युद्धाभ्यास के दिन ही भारतीय वायुसेना ने राफेल विमान के अंतिम बेड़े को भी शामिल किया है। वायुसेना ने टवीट कर इसकी जानकारी दी। इंडियन एयरफोर्स ने अपने एक ट्वीट में कहा कि, "36 राफेल जेट विमानों में से अंतिम राफेल भी इंडियन एयरफोर्स में शामिल हो गया है"।

9 दिसंबर को तवांग में हुई थी झड़प

9 दिसंबर को तवांग में हुई थी झड़प

भारतीय और चीनी सैनिक पिछले हफ्ते अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भिड़ गए थे, जो जून 2020 में गलवान घाटी की घातक घटना के बाद पड़ोसियों के बीच इस तरह की पहली मुठभेड़ थी। आपको बता दें कि सेना और वायुसेना पूर्वी लद्दाख के अग्रिम मोर्चो के साथ अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम क्षेत्र में एलएसी पर अपनी ऑपरेशन सक्रियता पिछले दो साल से अधिक समय से लगातार बनाए हुए हैं। भारतीय सेनाओं की यह सर्तकता ही चीनी सैनिकों के मंसूबों को नाकाम कर रही है।

चीन ने घायल सैनिकों का नहीं किया खुलासा

चीन ने घायल सैनिकों का नहीं किया खुलासा

माना जा रहा है, कि 9 दिसंबर को हुई झड़प में कम से कम छह भारतीय सैनिक घायल हुए हैं। इन सैनिकों का सेना के गुवाहाटी अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, चीन के घायल हुए सैनिकों के बारे में पीएलए ने कोई खुलासा नहीं किया है। इस घटना का एक एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें इंडियन आर्मी के जवानों को चीनी सैनिकों की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि यह वीडियो कितना सही है इसके बारे में अब तक पुष्टि नहीं हो पाई है।

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