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Harivansh Rai Bachchan: बेटे की तरह फिल्म में अभिनय भी किया था कवि हरिवंश राय बच्चन ने

प्रसिद्ध कविता मधुशाला को लिखने वाले कवि व लेखक हरिवंश राय बच्चन 18 जनवरी 2003 को दुनिया को अलविदा कह गए थे।

death anniversary of hindi poet harivanshrai bachchan also played role in film

हिंदी के प्रसिद्द कवि, हरिवंश राय "बच्चन" का जन्म 27 नवंबर 1907 को इलाहाबाद के पास प्रतापगढ़ जिले के छोटे से गाँव बाबूपट्टी में हुआ। 19 वर्ष की आयु में उनका विवाह श्यामा से हुआ जो उस समय 14 वर्ष की थी। दस वर्ष बाद ही 1936 में बीमारी के कारण श्यामा का निधन हो गया। उसके पांच साल बाद बच्चन ने तेजी सूरी से विवाह किया जो रंगमंच तथा गायन से जुड़ी हुई थी। हरिवंश राय बच्चन ने दर्जनों कविताओं की रचना की जिसमें, मधुशाला (1935), मधुबाला (1936), आकुल अंतर (1943), सतरंगिनी (1945), हलाहल (1946), बंगाल का काल (1946), आरती और अंगारे (1958), बुद्ध और नाचघर (1958), त्रिभंगिमा (1961), और चार खेमे चौंसठ खूंटे (1962) शामिल हैं।

हरिवंश राय बच्चन के लिखे कुल 26 काव्‍य संग्रह हैं। अंग्रेजी अध्यापन के अलावा उन्होंने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिंदी अनुवादक के रूप में भी काम किया। साहित्य में योगदान के लिए उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया गया। 1976 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण दिया। इससे पहले उनको '2 चट्टानों' के लिए 1968 में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला था।

हिंदी फिल्म में किया अभिनय

साल 1971 में एक फिल्म आई थी, जिसका नाम था "कभी-कभी"। इस फिल्म का गाना 'कभी-कभी मेरे दिल में, खयाल आता है', एक पॉपुलर रोमांटिक सॉन्ग बन गया था। आज भी यह गाना काफी लोकप्रिय है। इसी फिल्म में अमिताभ बच्चन के माता-पिता तेजी बच्चन और हरिवंश राय बच्चन एक्ट्रेस राखी के माता-पिता की भूमिका में नजर आए थे। इसमें राखी और शशि कपूर के साथ शादी का एक सीन फिल्माया गया था। फिल्म 'कभी-कभी' साल 1976 में रिलीज हुई थी। फिल्म में अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, राखी, वहीदा रहमान, ऋषि कपूर, नीतू सिंह, सिमी ग्रेवाल आदि मुख्य रोल में थे।

श्रीवास्तव से बच्चन बनने का सफर

बहुत से लोगों को तो यह मालूम ही नहीं होगा कि हरिवंश राय बच्चन का असली नाम हरिवंश राय श्रीवास्तव था। दरअसल, बचपन में गांव वाले उन्हें प्यार से 'बच्चन' कहकर बुलाते थे। क्योंकि 'बच्चन' का मतलब 'बच्चा' होता है। फिर बाद में कवि हरिवंश राय श्रीवास्तव न रहकर हरिवंश राय बच्चन के नाम से ही मशहूर हुए।

बेटे की फिल्मों के लिए लिखे गाने

हरिवंश राय बच्चन ने अपने बेटे अमिताभ की कई फिल्मों के गाने लिखे थे। इनमें सबसे ज्यादा पॉपुलर रहा उनका होली गीत 'रंग बरसे'। यह गाना अमिताभ बच्चन की फिल्म 'सिलसिला' में फिल्माया गया था। अपने पिता के इस सुपरहिट गाने को अमिताभ ने गाया था। हरिवंश राय ने 'मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है' (लावारिस), 'कोई गाता मैं सो जाता' (अलाप), और 'सांझ खिले भोर झड़े' (फिर भी) जैसे गाने लिखे। इसके साथ ही हरिवंश द्वारा लिखी गई कविता 'कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती' बॉलीवुड फिल्म 'मैंने गांधी को नहीं मारा' में ली गई थी।

मधुशाला लिखने पर पिता हुए थे नाराज

मधुशाला पढ़ने वालों को लगता था कि इसके रचयिता शराब के बहुत शौकीन होंगे। हकीकत तो यह थी कि हरिवंश राय बच्चन ने अपने जीवन में कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया। बच्चन के पिता प्रताप नारायण श्रीवास्तव को लगता था कि इस कविता संग्रह से देश के युवाओं पर गलत असर पड़ रहा है और वह शराब की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके चलते वो हरिवंश राय बच्चन से काफी नाराज भी हो गए थे। उस दौर में मधुशाला का और भी कई जगह विरोध हुआ था। लेकिन कवि बच्चन की यही सबसे बड़ी पहचान बनी।

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