Cryptocurrency: भारत सहित दुनियाभर में क्या नीति है क्रिप्टो करेंसी को लेकर?

क्रिप्टो करेंसी को लेकर कई देशों की सरकार का नीतिगत निर्णय स्पष्ट है। जबकि भारत में क्रिप्टो करेंसी के बारे में केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक का रुख विरोधाभासी है।

Cryptocurrency policy in world and RBI view on cryptocurrency in India

Cryptocurrency: क्रिप्टो एक डिजिटल और वर्चुअल करेंसी है जो सुरक्षा के लिए क्रिप्टोग्राफी का इस्तेमाल करती है। क्रिप्टो करेंसी किसी भी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत नहीं आती है। बिटकॉइन, पहली और सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली क्रिप्टो करेंसी है, जिसे 2009 में बनाया गया था। वर्ष 2022 में विश्व का क्रिप्टो करेंसी मार्केट $1.86 बिलियन का था।

आतंकी फंडिंग में क्रिप्टो

13 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिप्टो करेंसी और उससे संबंधित मामलों पर एक उच्च स्तरीय मीटिंग की थी। जिसके अनुसार, केंद्र सरकार का कहना है कि क्रिप्टो को लेकर बड़े वादों और गैर-पारदर्शी विज्ञापनों के माध्यम से युवाओं को गुमराह करने के प्रयासों को रोकना होगा। उस मीटिंग में इस बात पर भी चर्चा की गई थी कि अनियंत्रित क्रिप्टो बाजारों को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग का मार्ग नहीं बनने दिया जा सकता।

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा, केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने IMF की एक मीटिंग को संबोधित करते हुए कहा था कि "फिनटेक क्रांति के बीच, क्रिप्टो करेंसी का सबसे बड़ा जोखिम मनी लॉन्ड्रिंग और आतंक के वित्तपोषण के लिए इसका उपयोग हो सकता है।"

वित्त मंत्रालय और RBI का क्या कहना है?

क्रिप्टो को लेकर केंद्र सरकार का वित्त मंत्रालय और RBI दोनों के मत अलग-अलग हैं। जहां एकतरफ केंद्र सरकार इसे रेगुलेशन के साथ जारी रख रही है वही दूसरी तरफ RBI इसपर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही है। इस मत विभाजन को इस तरह भी समझा जा सकता है कि फरवरी 2022 में भारत सरकार के फाइनेंस सेक्रेटरी टीवी सोमनाथन ने कहा कि क्रिप्टो संपत्ति वर्तमान में न तो अवैध है और न ही उन्हें बढ़ावा दिया जा सकता है। जबकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास स्पष्ट कर चुके है कि क्रिप्टो करेंसी पर RBI की स्थिति बहुत स्पष्ट है, उन सभी पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने क्रिप्टो करेंसी को जुआ भी बताया था।

इस बीच, दिसंबर 2021 में केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में एक लिखित जवाब में बताया कि क्रिप्टो करेंसी और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा के रेगुलेशन पर एक विधेयक जल्दी ही सरकार लेकर आएगी। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने डिजिटल संपत्ति के ट्रांसफर से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत की दर से क्रिप्टो टैक्स लगाना शुरू कर दिया है। इसे स्पष्ट करते हुए वित्त मंत्री का कहना है कि "हमने लेन-देन से होने वाले लाभ पर कर लगाया है। इस स्तर पर सरकार इसे वैध बनाने या इसे प्रतिबंधित करने के लिए कुछ भी नहीं कर रही है।"

जुलाई 2022 में लोकसभा में एक लिखित जवाब के साथ निर्मला सीतारमण ने RBI के स्टैंड को स्पष्ट करते हुए कहा था, "किसी देश की मौद्रिक और राजकोषीय स्थिरता पर क्रिप्टो करेंसी के अस्थिर प्रभाव पर RBI द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं के मद्देनजर, RBI ने इस क्षेत्र पर कानून बनाने की सिफारिश की है। RBI का विचार है कि क्रिप्टो करेंसी को बैन किया जाना चाहिए।"

फिलहाल, RBI और केंद्र सरकार के इन दो अलग-अलग मतों के बीच का एक रास्ता निकाला गया है। जैसे पिछले दिनों निर्मला सीतारमण ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में क्रिप्टो करेंसी पर एक इंटरेक्शन के दौरान कहा कि "सरकार क्रिप्टो करेंसी रेगुलेशन पर सोच-समझकर फैसला लेगी, लेकिन इसे जल्दबाजी में नहीं लिया जा सकता है।"

क्रिप्टोकरेंसी पर RBI का क्या कहना?

RBI शुरुआत से ही क्रिप्टो के खिलाफ है। इसलिए RBI ने 2018 में बैंकों और अन्य संस्थाओं को क्रिप्टो लेनदेन का समर्थन करने से बैन कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया। सुनवाई के दौरान RBI ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि क्रिप्टो करेंसी में लेनदेन की अनुमति देने से अवैध लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध की मांग इसलिए कर रहे है क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था की वित्तीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ध्यान रखें कि क्रिप्टो करेंसी का कोई मूल्य नहीं है। ट्यूलिप के फूल जितनी भी नहीं। वहीं, RBI के डिप्टी गवर्नर टी. शंकर ने बताया है कि क्रिप्टो करेंसी पर जो भी डेटा उपलब्ध है, वह भ्रामक है।

दूसरे देशों में क्रिप्टो करेंसी को लेकर स्थिति

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    अमेरिका की इंटरनल रेवेन्यू सर्विसेज ने बिटकॉइन को टैक्स उद्देश्यों के लिए संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया है। अमेरिका के ट्रेजरी फाइनेंशियल क्राइम इंफोर्समेंट नेटवर्क (FinCEN) के अनुसार, बिटकॉइन एक परिवर्तनीय मुद्रा है जो वास्तविक मुद्रा के बराबर मूल्य या वास्तविक मुद्रा के विकल्प के रूप में कार्य कर सकती है।

    चीन में क्रिप्टो करेंसी पूरी तरह से गैरकानूनी और लेनदेन बिलकुल अवैध है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने स्पष्ट कहा है कि वर्चुअल करेंसी से संबंधित व्यावसायिक गतिविधियां अवैध वित्तीय गतिविधियां हैं। चीन में क्रिप्टो करेंसी के खिलाफ कार्यवाही वर्ष 2017 में ही शुरू हो गई थी।

    ऑस्ट्रेलिया में, क्रिप्टो करेंसी को कानूनी मान्यता तो है लेकिन काफी हद तक वह अनियमित भी है। दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई कानून क्रिप्टो करेंसी को धन के रूप में नहीं मानता है। जबकि, वहां क्रिप्टो करेंसी का आपसी व्यापार करना, खर्च करना, प्राप्त करना और स्टोर करना कानूनी है।

    बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टोकरेंसी जैसी डिजिटल मुद्राएं कनाडा में वैध मुद्रा नहीं हैं। कनाडा में केवल कैनेडियन डॉलर को आधिकारिक मुद्रा माना जाता है। डिजिटल करेंसी कनाडा के किसी भी सरकार या प्राइवेट बैंक द्वारा स्वीकारी नहीं जाती।

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