Delhi Chunav: कांग्रेस और AAP के अकेले लड़ने से दिल्ली में किसे होगा ज्यादा नुकसान?
Delhi Chunav 2025: 2024 के लोकसभा चुनावों में दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच जो चुनावी गठबंधन हुआ था, वह 6 महीने में ही टूट चुका है। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल घोषणा कर चुके हैं कि उनकी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ेगी। मतलब, दिल्ली विधानसभा चुनावों में एक बार फिर से वही समीकरण होगा, जो 2013 के चुनावों से लगातार बनता आ रहा है।
हालांकि, लोकसभा चुनावों में आप-कांग्रेस में गठबंधन के बावजूद बीजेपी न सिर्फ सातों लोकसभा सीटें जीती, बल्कि उसके प्रत्याशियों ने दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 52 पर बढ़त भी बना ली थी, जो कि बहुमत के जादुई आंकड़े (36) से कहीं ज्यादा है।

लोकसभा चुनावों में सीधी लड़ाई में भी बीजेपी की एकतरफा जीत
इस बार के लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की सात में से चार और कांग्रेस ने तीन सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसके बावजूद बीजेपी का वोट शेयर 54.4% और आप-कांग्रेस गठबंधन का संयुक्त वोट शेयर 43.1% था। इस तरह से लोकसभा चुनावों में सीधी लड़ाई के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने राजधानी दिल्ली में एकतरफा जीत दर्ज की।
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दिल्ली में विधानसभा चुनावों में आप रही है बड़ी ताकत
अब अगर 2013 के विधानसभा चुनावों से 2020 तक के विधानसभा चुनावों का विश्लेषण करें,तो आप ने हर चुनाव में कांग्रेस को ही ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। आम आदमी पार्टी 2013 से ही चुनावी राजनीति में उतरी है और दिल्ली की एक सियासी ताकत बन चुकी है। उसने पहले चुनाव से ही हर बार कांग्रेस के वोट बैंक में ही ज्यादा सेंध लगाई है।
केजरीवाल ने दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है
इसलिए, अगर केजरीवाल जैसे सियासत के चतुर खिलाड़ी ने कांग्रेस से एक तरह से दिल्ली में हरियाणा का बदला लेने की घोषणा की है तो उसके पीछे राजधानी का चुनावी समीकरण ही छिपा हुआ है। 2013 में आप दिल्ली में अपना पहला चुनाव लड़ी थी तो उसे 29.5% वोट मिले थे और कांग्रेस को 24.6% वोट आए थे। तब बीजेपी को 33.1% वोट मिले थे और वह सबसे बड़ी पार्टी थी।
2015 में आप को मिले सबसे ज्यादा वोट
2015 के विधानसभा चुनाव में आप का वोट शेयर उछलकर 54.6% हो गया और कांग्रेस 9.7% तक गिर गई। नुकसान भाजपा को भी हुआ और वह और उसे 32.8% वोट ही मिले।
2020 में आप का गिर गया ग्राफ और कांग्रेस सफाए के निकट पहुंची
लेकिन, 2020 के विधानसभा चुनाव से बीजेपी ने थोड़ी वापसी शुरू की और उसका वोट शेयर बढ़कर 38.5% पहुंच गया। वहीं विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के वोट शेयर में पहली बार गिरावट देखी गई जो कि 53.6% थी। लेकिन, कांग्रेस पार्टी मात्र 4.3% वोट जुटाकर अस्तित्व के संकट से जूझती नजर आई।
2024 का लोकसभा चुनाव केजरीवाल के फैसले की वजह?
अगर 2024 के लोकसभा चुनावों को देखें तो आप और कांग्रेस गठबंधन को जो 43.1% वोट मिले हैं, उनमें 24.2% आप को और 18.9% कांग्रेस के खाते में गए हैं। शायद केजरीवाल के फैसले में इस आंकड़े का बड़ा रोल रहा है, जिससे लगता है कि गठबंधन से कांग्रेस को जितना फायदा मिला, उतना आम आदमी पार्टी को नहीं मिला। दोनों ने मिलकर दिल्ली में सिर्फ 18 विधानसभा सीटों पर ही बढ़त हासिल की है।
हम किसी अन्य पार्टी को जगह क्यों दें- आप नेता
टीओआई ने आम आदमी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से कहा है, '....हमारे आंतरिक सर्वे से पता चलता है कि इस चुनाव में भी हम आसान जीत दर्ज करने जा रहे हैं। हम किसी अन्य पार्टी को जगह क्यों दें?'
उन्होंने कहा, 'लोकसभा से अलग जहां वोट बंटवारा रोकने के लिए गठबंधन समय की मांग थी, विधानसभा चुनावों में आप को कांग्रेस के सहयोग की कोई जरूरत नहीं है। शहर में कांग्रेस अपने वोट वाले जनाधार को एकजट नहीं रख सकी है और हम बीजेपी को खुद अपने दम पर हराने में सक्षम हैं। कांग्रेस को समर्थन देकर हम उसके जनाधार को फिर से तैयार करने में क्यों मदद करें?'
आप ने दिल्ली में लिया कांग्रेस से हरियाणा का बदला!
दरअसल, लोकसभा चुनावों में हरियाणा में भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन हुआ था। लेकिन, जब विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस आप के लिए सीटें छोड़ने से पीछे हट गई। अब आम आदमी पार्टी ने एक तरह से दिल्ली में उससे बदला ले लिया है।
दिल्ली में जाकिर हुसैन कॉलेज के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रवि रंजन का भी मानना है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन से आम आदमी पार्टी को फायदा नहीं मिलने वाला था। उनके मुताबिक, 'अब एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में आप जहां वे राजनीतिक रूप से मजबूत हैं, वह अपनी जगह साझा करना पसंद नहीं करेगी।'
गठबंधन टूटने से कांग्रेस को होगा ज्यादा नुकसान!
उन्होंने आगे इसके कारण को और विस्तार से बताया, 'आप मुख्य रूप से कांग्रेस पार्टी पर ही खड़ी हुई है और आंशिक रूप से बीजेपी के वोट बैंक पर। अगर कांग्रेस और कमजोर होती है तो इससे बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों को मदद मिलेगी।'
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वैसे एक कांग्रेस पदाधिकारी ने यह दिखाने की कोशिश की है कि उसके लिए भी आप से गठबंधन नहीं होना सही ही है। उन्होंने कहा,'एक स्वतंत्र राजनीतिक खिलाड़ी के तौर पर कांग्रेस के फिर से उभरने और कुछ सीटें जीतने की संभावना ज्यादा है। इस गठबंधन से हम दिल्ली में पूरी तरह से खत्म हो जाते।'
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