Delhi Chunav 2025: इमामों को छोड़कर परेशान, पुजारियों पर केजरीवाल क्यों मेहरबान? पढ़िए 5 वजह
Delhi Chunav 2025: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार (30 दिसंबर, 2024) को एक और चुनावी धमाका कर दिया। उन्होंने दिल्ली में मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारों के ग्रंथियों को हर महीने 18,000 रुपए सैलरी की तरह देने का वादा किया है।
पिछले हफ्ते ही दिल्ली वक्फ बोर्ड से जुड़े इमामों ने केजरीवाल के घर पर बकाए वेतन को लेकर प्रदर्शन किया था। खैर, दिल्ली पुलिस ने उन्हें किसी तरह से समझा-बुझा कर उनके आवास तक पहुंचने से पहले ही हटा दिया। ऐसे में उन्होंने पुजारियों और ग्रंथियों को भी वेतन देने की घोषणा करके एक नया चुनावी दांव खेलने की कोशिश की है।

Delhi Chunav 2025: क्या है पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना?
केजरीवाल ने 'पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना' (Pujari Granthi Samman Yojana) का वादा कर कहा है, 'हमारी सरकार बनने के बाद करीब 18,000 रुपए हर महीने दिए जाएंगे। भारत में यह पहली बार हो रहा है। मुझे उम्मीद है कि बीजेपी और कांग्रेस अपने राज्यों में भी ऐसा ही करेगी।'
Delhi Chunav 2025: 1) पुजारी तो बहाना है, भाजपा पर निशाना है?
दिल्ली में ऑन रिकॉर्ड करीब 600 मंदिर हैं। छोटे मंदिरों को जोड़ें तो यह संख्या हजार पार कर सकती है। अरविंद केजरीवाल ने सिर्फ यह वादा किया है कि पुजारियों को वेतन दिया जाएगा। इसकी पूरी डिटेल अभी साझा नहीं की है।
लेकिन, एक अनुमान के मुताबिक किसी भी बड़े मंदिर से पुजारियों की एक श्रृंखला जुड़ी होती है। इस तरह से उन्होंने एक ही दांव में मंदिरों से जुड़े तमाम लोगों में एक उम्मीद पैदा करने की कोशिश की है कि आम आदमी पार्टी उनकी हर महीने की'दक्षिणा' फिक्स कर सकती है।
आमतौर पर मंदिरों में पूजा-पाठ करवाने वाले पंडित और पुजारी खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं। यह बात भी सही है कि मंदिरों को ट्रस्ट के माध्यम से अपने नियंत्रण में रखने वाली सरकारों ने समाज के इस वर्ग पर कभी ध्यान भी नहीं दिया है, क्योंकि यह कोई वोट बैंक नहीं है। लेकिन, केजरीवाल अपने इस दांव से पुजारियों के कल्याण से ज्यादा भाजपा पर एक राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
Delhi Chunav 2025: 2) एक वादे से दिल्ली से पंजाब तक को संदेश!
राजधानी दिल्ली में 9 बड़े गुरद्वारे हैं। केजरीवाल ने ग्रंथियों को वेतन देने का वादा करके सिर्फ इस वर्ग को टारगेट करने की कोशिश नहीं की है, बल्कि दिल्ली के सिख मतदाताओं के लिए भी एक भावनात्मक जाल फेंकने की कोशिश की है।
दिल्ली में 8 लाख से ज्यादा या करीब 4% सिख वोटर हैं। कम से कम 9 विधानसभा सीटों पर यह निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राजौरी गार्डन,तिलक नगर,जनकपुरी,मोती नगर,राजेंद्र नगर और ग्रेटर कैलाश जैसी सीटों पर यह बहुत प्रभावशाली हैं।
केजरीवाल अपने वादे से इन वोटरों पर निशाना साधने की कोशिश तो कर ही रहे हैं, इसके माध्यम से पंजाब तक संदेश देना चाहते हैं, जहां उनकी ही पार्टी की सरकार है।
Delhi Chunav 2025: 3) इमामों को लेकर है भरोसा, कहीं नहीं जाएंगे?
पिछले हफ्ते गुरुवार (26 दिसंबर,2024) को दिल्ली वक्फ बोर्ड से जुड़े इमामों ने केजरीवाल के घर के आगे प्रदर्शन किया था। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के प्रेसिडेंट मौलाना साजिद रासिद के अगुवाई में जुटे प्रदर्शनकारियों की शिकायत थी कि दिल्ली सरकार ने 17 महीनों से उनका वेतन रोक रखा है। दिल्ली सरकार इन इमामों को भी 18,000 रुपए महीने बतौर सैलरी देती है।
प्रदर्शनकारी इमामों की यह भी शिकायत है कि आप की सरकार मजदूरों को तो 21,000 रुपए देती है, लेकिन इमामों को 18,000 रुपए ही दे रही है और वह भी रोक चुकी है।
ऐसे में अगर केजरीवाल ने पुजारियों-ग्रंथियों के लिए जो वादा किया है, उससे लगता है कि दिल्ली चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी के वादों की सीरीज में एक नया वादा जोड़ा है, जिसे लागू करने की जिम्मेदारी तब आएगी, जब सत्ता में वापस लौटकर आएंगे! शायद आप को यह भी लगता है कि इमामों के पास उसके अलावा कोई दूसरा बेहतर विकल्प भी नहीं है।
Delhi Chunav 2025: 4) मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों की काट
पुजारियों और ग्रंथियों के लिए मासिक मानदेय का वादा करते हुए केजरीवाल ने यह भी कहा है, 'मैं कनॉट प्लेस में हनुमान मंदिर जाऊंगा और वहां के पुजारियों का रजिस्ट्रेशन करूंगा। हमारे एमएलए, उम्मीदवार और कार्यकर्ता कल से सभी मंदिरों और गुरुद्वारों में पुजारियों और ग्रंथियों का रजिस्ट्रेशन करेंगे।'
दरअसल, इमामों को सैलरी देने को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार बीजेपी के निशाने पर रहती आई है। पार्टी उसपर मुस्लिम वोट बैंक के लिए उनके तुष्टिकरण का आरोप लगाती है। आप पर वोट बैंक के लिए रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने का आरोप भी लग रहा है। केजरीवाल ने यह दांव चलकर विपक्ष के उन आरोपों की काट निकालने की कोशिश की है।
Delhi Chunav 2025: 5) कांग्रेस की उभार की आशंका में बैलेंसिंग एक्ट!
दिल्ली विधानसभा चुनावों में इस बार कांग्रेस पार्टी जिस आक्रमकता के साथ मैदान में उतर चुकी है, उससे कहीं न कहीं आम आदमी पार्टी को अपनी रणनीति पर विचार करने को मजबूर होना पड़ रहा है। आशंका है कि अगर कांग्रेस ने मतदान वाले दिन तक पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा तो आम आदमी पार्टी के लिए उसके मुस्लिम वोट बैंक का खतरा पैदा हो सकता है। क्योंकि, लोकसभा चुनावों के बाद से यह ट्रेंड देखा जा रहा है कि मुसलमान वोटर फिर से कांग्रेस को गले लगाने के लिए तैयार हैं।
शायद इसी वजह से केजरीवाल हिंदू और सिख समुदाय में एकमात्र मुसलमानों के हित में काम करने वाली पार्टी की छवि बरकरार नहीं रहने देना चाहते हैं। ताकि, अगर बीजेपी का ध्रुवीकरण वाला कार्ड चलने लगा तो वह अपने जनाधार को भी बैंलेंस रख सकें!












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