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Delhi Chunav 2025: कैस हर रोज बढ़ती जा रही है AAP की मुश्किल? कौन से 5 संकटों का करना पड़ रहा सामना?

Delhi Chunav 2025: दिल्ली और पंजाब दो राज्यों में आम आदमी पार्टी (AAP) की बंपर बहुमत वाली सरकारें हैं। मुश्किल से एक दशक पुरानी पार्टी के संसद में 13 सांसद भी हैं। दिल्ली में पार्टी पिछले दो विधानसभा चुनावों से एकतरफा जीत हासिल कर रही है। लेकिन, 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी एक के बाद एक कई संकटों से जूझती नजर आ रही है।

पंजाब और दिल्ली में 'आप' की बड़ी बहुमत वाली सरकारें जरूर हैं लेकिन, पंजाब में विधानसभा चुनाव 2022 में हुए थे और दिल्ली में 2020 में। इस साल जो लोकसभा चुनाव हुए हैं, उसमें दोनों ही राज्यों में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रहा है।

delhi chunav 2025

Delhi Chunav 2025: 1) लोकसभा चुनावों में बहुत बुरा प्रदर्शन

2024 के लोकसभा चुनावों में अपनी सरकारों वाली राज्यों में भी आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन अप्रत्याशित रूप से खराब रहा है। पार्टी के जो 13 सांसद हैं, उनमें से 10 राज्यसभा के और 3 ही लोकसभा से चुने गए हैं। तीन में भी सभी पंजाब से जीते हैं। दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की सहयोगी कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर भी पार्टी खाता नहीं खोल सकी। लोकसभा सभा चुनावों पार्टी को कुल मिलाकर मात्र 1.11% वोट मिले हैं।

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पंजाब में 2022 के असेंबली चुनावों में जीत के सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाली पार्टी लोकसभा की 13 सीटों में से सिर्फ 3 पर ही झाड़ू चलाने में सफल हो सकी और 2019 के मुकाबले सिर्फ एक सीट बढ़ा सकी। ऐसे में लोक-लुभावन वादों की राजनीति करने वाली पार्टी के लिए 2029 के चुनावों तक सियासी तौर पर प्रासंगिक बने रहना बड़ी चुनौती है।

Delhi Chunav 2025: 2) हरियाणा विधानसभा चुनाव में मिट्टी पलीद

वैसे आम आदमी पार्टी इस साल ओडिशा में भी भाग्य आजमा कर देख चुकी है। लेकिन, हरियाणा विधानसभा चुनावों में उसकी जिस तरह से मिट्टी पलीद हुई है, वह पार्टी के गहराते संकट के लिए बहुत बड़ा आईना है। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद वहां धमाकेदार प्रचार किया था। हरियाणा के 'लाल'के नाम पर सहानुभूति मिलने का भरोसा था। लेकिन, कांग्रेस से लोकसभा चुनाव वाला गठबंधन टूट गया और 90 सीटों में से 88 पर पार्टी को अपने प्रत्याशी उतारने पड़े।

अंजाम ये हुआ कि हरियाणा में खुद को हमेशा से एक बड़ी ताकत समझने वाली आम आदमी पार्टी की 88 में से 87 सीटों पर जमानत भी जब्त हो गई और वह सिर्फ 1.8% वोट जुटा सकी। पार्टी के दिग्गज नेता भी चौथे-पांचवें नंबर पर अपना नाम तलाशने को मजबूर हो गए।

अलबत्ता जम्मू और कश्मीर से पार्टी को जरूर एक खुशखबरी मिली, लेकिन डोडा में मेहराज मलिक की जीत को शायद आम आदमी पार्टी भी सरप्राइज ही मान रही होगी।

Delhi Chunav 2025: 3) गारंटियों पर क्यों घिर रही'आप'?

आप के लिए हरियाणा, हरियाणा है और दिल्ली, दिल्ली! यहां पार्टी 10 साल से सत्ता में है और उसके सामने तीसरी बार सत्ता में आने की चुनौती है। यहां पार्टी किसी से हिसाब मांगने की स्थिति में नहीं है, बल्कि मतदाताओं को उसे अपने एक दशक के कामों का हिसाब-किताब देना है।

पार्टी नेतृत्व को एक दशक की एंटी-इंकंबेंसी के जोखिम का पुख्ता अंदाजा है। शायद इसी डैमेज कंट्रोल के लिए लगभग एक-तिहाई विधायकों का टिकट बंटवारे में पत्ता काट दिया गया है। लेकिन, फिर भी उसे जनता को अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाना ही पड़ेगा।

ईटी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि आम आदमी पार्टी ने 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में 10 गारंटियों का वादा किया था। लेकिन, 2024 के दिसंबर तक जब चुनाव होने में मात्र दो महीने बच गए हैं, आप सरकार ने अपनी दूसरी गारंटी को ही हाथ लगाया है, जिसके तहत राजिंदर नगर में 'सभी घरों में 25 घंटे पाइप से शुद्ध जल पहंचाया'जाना है।

'दिल्ली को कचरा और मलबे से मुक्त किया जाएगा','प्रदूषण को मौजूदा स्तर से एक -तिहाई तक कम किया जाएगा'और 'दिल्ली के झुग्गी वालों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे', ये तीन गारंटियां अभी तक वादे ही बने हुए हैं।

दूसरी तरफ चुनाव से ठीक पहले 'महिला सम्मान योजना' और बुजुर्गों के मुफ्त इलाज के लिए 'संजीवनी योजना' के लिए फॉर्म भरवाने शुरू कर दिए, जबकि महिला एवं समाज कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने इन योजनाओं को फर्जी बताकर दिल्ली के लोगों के लिए अखबारों में एडवाइजरी के तौर पर बड़े-बड़े विज्ञापन जारी कर दिए हैं। इस मामले में पार्टी के खिलाफ कांग्रेस की ओर से एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है।

Delhi Chunav 2025: 4) दिल्ली की जनता को कौन देगा जवाब

आज की तारीख में वादों, दावों और आश्वासनों के बावजूद दिल्ली की जनता को सड़कों में गड्ढों का सामना करना पड़ रहा है, कूड़े के ढेर से छुटकारा नहीं मिल रहा,यमुना मैली थी, अब जहरीली हो चुकी है,आवारा पशुओं का खतरा बढ़ता गया है और प्रदूषण और यातायात की समस्या तो लगभग बेकाबू ही हो चुकी है।

आम आदमी पार्टी दिल्ली के लोगों को कबतक कहती रहेगी कि 'केंद्र, दिल्ली सरकार को काम नहीं करने दे रहा जी'। 2022 में दिल्ली की जनता दिल्ली नगर निगम (MCD) भी 'आप' के हवाले कर चुकी है। वह दिल्ली के लोगों के रोजाना के दिक्कतों से कबतक मुंह मोड़ती रहेगी। उस दिल्ली में जहां के वोटरों ने 2015 में आप को अपनी बेहतरी के लिए 70 में 67 सीटें दीं और 2020 में भी 62 सीटों तक पहुंचा दिया था।

Delhi Chunav 2025: 5) मुसलमानों ने भी खोलना शुरू कर दिया है मोर्चा

दिल्ली की आम आदमी पार्टी को बीजेपी इन आरोपों के साथ निशाना बनाती रही है कि वह मुस्लिम तुष्टिकरण में लगी रहती है। लेकिन,जिन लोगों की वजह से पार्टी को यह आरोप झेलने पड़ते हैं,उन्होंने ही दिल्ली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

गुरुवार को सुबह-सुबह ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रासिदी की अगुवाई में दिल्ली वक्फ के इमामों ने पूर्व सीएम और आप पार्टी के संयोजक अरविंद केजीवाल के घर पर जाकर मोर्चा खोल दिया। उनकी शिकायत है कि दिल्ली सरकार पिछले 17 महीनों से उनकी सैलरी नहीं दे रही है।

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दिलचस्प बात ये है कि दिल्ली के करीब 250 इमामों का यह कहना है कि 'आप' सरकार मजदूरों को तो 21,000 रुपए वेतन देती है, लेकिन इमामों को वह मात्र 18,000 रुपए देकर उनके साथ बड़ी नाइंसाफी कर रही है। दिल्ली चुनाव में इस बार जिस तरह से कांग्रेस पार्टी सक्रिय नजर आ रही है, उससे आने वाले दिनों में मुस्लिम वोट बैंक को जुटाए रखना भी आप के लिए एक बड़ा संकट साबित हो सकता है।

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