Main Vaapas Aaunga Review: बंटवारे के दर्द में दिखी अधूरे प्यार की टीस, इम्तियाज अली की न भुलाई जाने वाली फिल्
फिल्म: मैं वापस आऊंगा (Main Vaapas Aaunga)
निर्देशक: इम्तियाज अली
स्टारकास्ट: दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, वेदांग रैना और शरवरी वाघ
रन टाइम: 2 घंटे 47 मिनट
कहां देखें: सिनेमाघरों में
रिलीज डेट: 12 जून 2026
स्टार: 4 (****)
Main Vaapas Aaunga Review: 'कुछ लोग सरहद पार कर आते हैं लेकिन उनका दिल कभी सरहद पार नहीं कर पाता', इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा' इसी दर्द, याद और मोहब्बत की कहानी है, जो 1947 के विभाजन के जख्मों को एक बेहद इमोशनल और खूबसूरत अंदाज में पर्दे पर पेश करती है। कैसी है फिल्म और क्या है खास, आइए जानते हैं।

क्या है फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' की कहानी?
फिल्म की कहानी ईशर सिंह ग्रेवाल (नसीरुद्दीन शाह) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो विभाजन के दौरान भारत आ गए थे और यहीं बस गए लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका दिल अपने उस घर में अटका हुआ है, जो अब पाकिस्तान में है। आखिर उनके अतीत में ऐसा क्या हुआ था, जिसकी टीस आज भी बाकी है? इसी सवाल का जवाब खोजने निकलता है उनका पोता निर्वेर (दिलजीत दोसांझ)।
दो कहानियों को आपस में जोड़ा गया है
फिल्म दो अलग-अलग टाइमलाइन्स में चलती है। एक तरफ वर्तमान में निर्वेर की खोज है, तो दूसरी तरफ पार्टिशन के दौर की कहानी, जहां युवा ईशर/कीनू (वेदांग रैना) और जिया/अफसाना (शरवरी) की दुनिया दिखाई जाती है। इम्तियाज अली इन दोनों कहानियों को जिस खूबसूरती से जोड़ते हैं, वह फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है।
फिल्म की स्टारकास्ट और उनका दमदार अभिनय
-अभिनय की बात करें तो फिल्म का हर कलाकार अपना 100 प्रतिशत देता नजर आता है लेकिन नसीरुद्दीन शाह और शरवरी वाघ सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। नसीर साहब एक बार फिर साबित करते हैं कि अभिनय उम्र का नहीं, अनुभव का खेल है। उनकी आंखों में छिपा दर्द और चेहरे पर दिखती अधूरी चाहत कई बार बिना डायलॉग के ही बहुत कुछ कह जाती है।
-वहीं शरवरी वाघ ने जिया के किरदार को जिस नजाकत और खूबसूरती से निभाया है, वह लंबे समय तक याद रहती हैं। कई सीन्स में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस बेहद प्रभावशाली है। वेदांग रैना भी शानदार हैं और पूरी फिल्म में दर्शकों को अपने साथ बांधे रखते हैं। दिलजीत दोसांझ का अभिनय हमेशा की तरह सहज और स्वाभाविक है। उन्हें देखकर कहीं भी अभिनय की कोशिश नजर नहीं आती और यही उनकी सबसे बड़ी खूबी है।
फिल्म का निर्देशन और एडिटिंग
-तकनीकी रूप से भी फिल्म बेहद मजबूत है। एडिटिंग खासतौर पर तारीफ के काबिल है, जहां दोनों टाइमलाइन्स को जोड़ने का तरीका काफी प्रभावशाली लगता है। सिनेमैटोग्राफी, वीएफएक्स और बैकग्राउंड स्कोर कहानी को और ऊंचाई देते हैं। म्यूजिक में फ्यूजन का इस्तेमाल ताजगी लेकर आता है और फिल्म की भावनाओं को और गहरा करता है।
-कुछ सीन्स आपको मुस्कुराने के लिए मजबूर करते हैं, कुछ डराते हैं और कुछ ऐसे हैं जो आंखें नम कर देते हैं। स्क्रीनप्ले, लेखन और संवाद पूरी फिल्म की लय बनाए रखते हैं। साथ ही मुकेश छाबड़ा की कास्टिंग टीम भी विशेष तारीफ की हकदार है क्योंकि फिल्म का हर कलाकार अपने किरदार के लिए बिल्कुल सटीक नजर आता है।
क्यों देखें ये फिल्म?
कुल मिलाकर 'मैं वापस आऊंगा' मूवी सिर्फ विभाजन की कहानी नहीं बल्कि उन यादों की कहानी है जो पीढ़ियों तक जिंदा रहती हैं। इम्तियाज अली ने एक बार फिर साबित किया है कि भावनाओं को पर्दे पर उतारना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। एक खूबसूरत, भावुक और दिल को छू लेने वाली फिल्म, जिसे बड़े पर्दे पर जरूर देखा जाना चाहिए।













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