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करोड़ों की डिजिटल मुद्रा मुफ्त बांट रहा है चीन

तेजी से बढ़ रही है ई-युआन

वुहान, 31 मई। कोविड से प्रभावित अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए चीन डिजिटल करंसी का इस्तेमाल कर रहा है. महामारी के कारण कम हुए उपभोग को बढ़ावा देने के लिए चीन ग्राहकों के वास्ते खरीददारी को आसान बनाना चाहता है, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा चीजें खरीदें और धन खर्च करें. इसके लिए चीन ने डिजिटल करंसी को खासा बढ़ावा दिया है और लोग भी इसे हाथोहाथ ले रहे हैं.

दक्षिणी शहर शेनजेन ने इसी हफ्ते से 3 करोड़ चीनी युआन यानी लगभग 35 करोड़ भारतीय रुपये लोगों के बीच मुफ्त बांटने की योजना शुरू की है. इसका मकसद लोगों को खर्चने के लिए धन देना है ताकि वे उपभोग बढ़ाएं और व्यापार जगत को गति मिले. यह धन डिजिटल करंसी के रूप में दिया जा रहा है. उत्तरी प्रांत हेबेई में भी कुछ दिन पहले शियोंग शहर ने 5 करोड़ युआन मूल्य की डिजिटल करंसी यानी ई-युआन तोहफे के तौर पर लोगों के बीच बांटे थे.

तेजी से बढ़ रही है ई-युआन

चीन उन देशों में अगली पंक्ति में है जो डिजिटल करंसी को बढ़ावा दे रहे हैं. पिछले कुछ समय में कई देशों में डिजिटल करंसी को लेकर रफ्तार तेज हो गई है और चीन सबसे तेजी से बढ़ रहे देशों में है. अब ई-युआन का इस्तेमाल चीन दोहरे फायदे के लिए कर रहा है. एक तो इससे उपभोग बढ़ाने में मदद मिल रही है और दूसरा, डिजिटल करंसी का प्रसार हो रहा है.

देश के केंद्रीय बैंक के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल 26.1 करोड़ चीनियों ने ई-वॉलेट का प्रयोग किया और 87.6 अरब युआन यानी लगभग 10 खरब रुपये का लेनदेने डिजिटल मुद्रा में हुआ. पीडब्लयूसी चाइना नामक संस्था में वरिष्ठ अर्थशास्त्री जी. बिन शाओ कहते हैं कि इससे पारदर्शिता बढ़ी है.

उन्होंने कहा, "पहले जब सरकार सब्सिडी देती थी, तो जरूरतमंदों तक धन पहुंचाने में बहुत सी बाधाएं आती थीं. ई-युआन के रूप में कैश सीधा आपके हाथ में आता है." बिन शाओ कहते हैं कि भविष्य में सरकार पेंशन भुगतान से लेकर ढांचागत विकास परियोजनाओं पर खर्च तक विभिन्न मदों में ई-युआन का प्रयोग कर सकती है.

और तेजी की जरूरत

यिनटेक इनस्टमेंट होल्डिंग कंपनी में मुख्य अर्थशास्त्री शिया चुन का मानना है कि जहां तक सब्सिडी देने का सवाल है तो पारंपरिक तरीकों के मुकाबले ई-युआन ज्यादा फलोत्पादक और तेज है. हालांकि उन्हें लगता है कि सरकार फिलहाल इसे जितना बढ़ावा दे रही है, वह नाकाफी है.

पेकिंग विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले अर्थशास्त्री लिन यीफू ने इसी महीने एक भाषण में कहा था कि चीन को हर उस क्षेत्र के परिवारों को एक-एक हजार युआन (करीब 11,000 रुपये) देने चाहिए, जहां-जहां लॉकडाउन लगा है, और इनमें से आधी रकम डिजिटल मुद्रा में हो सकती है.

यह भी पढ़ेंः क्रिप्टोकरंसी ट्रेडिंग की लत, एक छिपी हुई महामारी?

शेनजेन में जारी अभियान में उपभोक्ताओं को मुफ्त ई-युआन पाने के लिए एक लॉट्री में हिस्सा लेना है. यह मुद्रा दुकानों के अलावा सीधे ऑनलाइन से खरीददारी में भी इस्तेमाल की जा सकती है. शियोंगन इलाके में डिजिटल कैश सब्सिडी का प्रयोग खाने के उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक आइटम और फर्नीचर खरीदने के लिए किया जा सकता है.

भारत में डिजिटल करंसी

इसी साल अपने सालाना बजट में भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया था कि भारत अगले वित्त वर्ष में डिजिटल मुद्रा की शुरुआत करेगा. सेंट्रल बैंक डिजिटल करंसी (सीबीडीसी) नामक इस मुद्रा के जरिए भारत डिजिटल इकॉनमी को बढ़ावा देना चाहता है. साथ ही उसका ध्यान पहले से बाजार में उपलब्ध निजी डिजिटल मुद्राओं का विकल्प उपलब्ध कराने पर भी है, जो हाल के सालों में खासी तेजी से बढ़ी हैं.

एक अनुमान के मुताबिक भारत में 1.5 से दो करोड़ लोग क्रिप्टोकरंसी में निवेश कर चुके हैं जबकि भारत में 400 अरब रुपये से ज्यादा की क्रिप्टोकरंसी मौजूद है. लेकिन भारत का केंद्रीय बैंक फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है.

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने फरवरी में मीडिया से बातचीत में कहा था कि खतरे कई हैं, इसलिए सोच-समझकर कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा था, "सबसे बड़ा खतरा तो साइबर सुरक्षा का है. फिर, नकली मुद्रा का भी खतरा है." उन्होंने कहा था कि भारत खुदरा और थोक दोनों तरीके से डिजिटल मुद्रा लाने के मॉडलों पर विचार कर रहा है.

रिपोर्टः विवेक कुमार (रॉयटर्स)

Source: DW

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