आजादी के कई साल बाद मिली सड़क , उम्मीद जगाती है छत्तीसगढ़ के कुमगांव की कहानी
छत्तीसगढ़ का नक्सल प्रभावित नारायणपुर के घने जंगलों की तरफ बढ़ें, तो 20 किलोमीटर दूर पहाड़ों से घिरा कुमगांव दिखाई देगा ।
नारायणपुर, 23 जून। छत्तीसगढ़ का नक्सल प्रभावित वनांचल क्षेत्र बस्तर तेजी से बदल रहा है। बस्तर संभाग के सभी जिलों में अब विकास की बयार बहाने से तस्वीर बदलने लगी है। राज्य के वनांचल जिले नारायणपुर के घने जंगलों की तरफ बढ़ें, तो 20 किलोमीटर दूर पहाड़ों से घिरा कुमगांव दिखाई देगा । पहाड़ों से घिरे इस गांव में 20-25 परिवारों के 120 ग्रामीण रहते हैं। क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता आकर्षित कर लेती है, लेकिन यह सुंदरता स्थानीय लोगों को नहीं लुभाती ,क्योंकि यहां जीवन कभी सरल नहीं रहा है, लेकिन अब कुमगांव के ग्रामीणों में भी उम्मीद जागी है।

अनसर्वेड गांव का मसाहती सर्वे
नारायणपुर के पहाड़ों की तराई में बसे कुमगांव में रहने वाले लोग कुछ समय पूर्व तक बहुत कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजारते थे। गांव में पहुंचने के लिए केवल एक पगडंडी थी, जिसमें दुपहिया वाहनों से चलना कठिन था। इस गांव तक पक्के रास्ते के अभाव में विकास की बात करना महज कोरी कल्पना सी थी,लेकिन समय बदला और नारायणपुर जिला प्रशासन ने इस गांव के लोगों की समस्याओं को दूर करते हुए आवागमन की अच्छी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इलाके में सड़क बनाने का कठिन काम सच कर दिखाया। साथ अलावा अनसर्वेड गांव का मसाहती सर्वे भी कराया गया।

बदले हालात ,बन गई सड़क
छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार के इस प्रयास से अब यहां आवश्यक सुविधायें पहुंचने लगी हैं।इस नक्सल प्रभावित सुदूर वनांचल के रहवासी सड़क ना होने से बरसों से सरकार की योजनाओं से जुड़ नही पा रहे थे। अब यहां मसाहती सर्वे पूरा कराने के बाद सड़क बन चुकी है ,जिससे परिस्थितियां अब पूरी तरह बदल गई हैं। गौरतलब है कि नारायणपुर के अबुझमाड़ क्षेत्र के गांवों में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आदेश के बाद मसाहती सर्वे करवाया गया है। जिससे गांवों के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा है।

मिलने लगा सरकारी योजनाओं का लाभ
कभी आम दुनिया से कटे हुए कुमगांव में अब सड़क, बिजली साफ़ पेयजल और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं । ग्रामीणों के इस सपने को हकीकत में बदलने का प्रयास नारायणपुर के कलेक्टर ऋतुराज रघुवंशी की टीम ने किया है । कुमगांव तक सड़क बन जाने से अब स्वास्थ्य अमला अपनी एम्बुलेंस और बाकि बुनियादी सुविधायें को लेकर गांव तक पहुंचने लगा है । सरकार के इस काम से ग्रामवासी बेहद उत्साहित है। उनका विश्वास सरकार के प्रति बढ़ा है। नक्सल क्षेत्र के ग्रामीणों का सरकार के प्रति विश्वास का बढ़ना भी एक बड़ी उपलब्धि है।

पहली बार कुमगांव पंहुचा कोई कलेक्टर
कुमगांव निवासी रानो दुग्गा और मंगाया दुग्गा का कहना है कि हमारे गांव में लगभग 120 लोग रहते हैं। पहले गांव तक पहुंचने के लिए एकमात्र साधन पगडंडी थी,जिसमे लोग लाठी का सहारा लेकर ही यहां से आते जाते थे। उन्होंने बताया कि पहले ग्रामीणों को शासन की योजना का लाभ नही मिल पाता था, लेकिन अब गांव में सर्वे पूर्ण हो गया है । रानो दुग्गा कहती हैं कि सर्वे के बाद कलेक्टर साहब हमारे गांव आये थे, वह ऐसे पहले कलेक्टर थे, जो हमारे गांव आये और पूरा गांव देखा।
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