सदा के लिए थम गई, छत्तीसगढ़ की लोक गायिका लता खापर्डे की आवाज, सीएम भूपेश बघेल ने दी श्रद्धांजलि
राजनांदगांव, 22 सितम्बर। छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका लता खापर्डे की आवाज अब कभी नही सुनाई देगी। क्योंकि लोक गायिका लता खापर्डे का बुधवार को निधन हो गया। गुरुवार को राजनांदगांव के भरकापारा स्थित उनके आवास में अंतिम विदाई देने बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दुखद घटना की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लोक गायिका लता खापर्डे के निधन पर शोक व्यक्त किया है। सीएम भूपेश ने ट्वीट करते हुए कहा कि लता जी ने छत्तीसगढ़ी बोली और लोक संगीत के उत्थान के लिए जो किया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

लोक कला के लिए जीवन किया समर्पित
छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़ी सुप्रसिद्ध कलाकार लता ने 6 साल की उम्र से ही लोक कलाकार दाऊ रामचंद्र देशमुख के सान्निध्य में रहकर छत्तीसगढ़ी लोक कला के क्षेत्र की विधा में निपुण हुई। इसके बाद उन्होंने खुमान साव और हबीब तनवीर जैसी मशहूर शख्सियतों के साथ काम किया। हबीब तनवीर के 'नया थिएटर' से वे लंबे समय तक जुड़ी रहीं। हबीब तनवीर के कई नाटकों में लता खापर्डे का बेहतरीन अभिनय उस जमाने के लोग आज भी याद करते हैं। इस तरह लोक संस्कृति और कला के लिए गायिका Lata Khaprde ने अपना जीवन समर्पित कर दिया।

विदेशों में पहुंचाई छत्तीसगढ़ की संस्कृति
छत्तीसगढ़ी लोक गीतों से प्रसिद्धि हासिल करने वाली लता ने अपनी गायकी से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई थी। भारत के साथ साथ रूस, बेल्जियम, कनाडा जैसे देशों में उन्होंने कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। इसके साथ ही लता खापर्डे को आमिर खान के पीपली लाइव फिल्म मैं सह कलाकार की भूमिका निभाने का अवसर मिला, इस फ़िल्म से उन्होंने देशभर में पहचान मिली।

सीएम भूपेश ने दी श्रद्धांजलि, कहा योगदान को नही भुलाया जा सकता
लोक गायिका लता खापर्डे के निधन की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गहरा शोक व्यक्त किया। सीएम ने उनकी आत्मा के शांति की कामना की। इसके साथ ही उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि लता जी ने छत्तीसगढ़ी बोली और लोक संगीत के उत्थान के लिए जो किया, उसे भुलाया नहीं जा सकता।

भारत सरकार से मिली थी फैलोशिप
लता खापर्डे ने लगभग सभी लोक गायक व कलाकार के साथ काम किया। इस दौरान उन्होंने 80 के दशक से लेकर आज के आधुनिक कला संस्कृति के अनुसार लगभग 400 से अधिक गानों की रिकॉर्डिंग की है। लता खापर्डे ने लोक मंचो के साथ साथ छत्तीसगढ़ आकाशवाणी और दूरदर्शन में भी काम किया और अपनी गायिकी के जरिए नया मुकाम हासिल किया। विवाह गीतों पर रिसर्च करने के लिए भारत सरकार ने उन्हें फैलोशिप भी दी थी। लता खापर्डे ने दो दिन पहले ही अपने 2 गाने रिकॉर्ड किए थे।

लोक गायिका को अचानक पड़ा दिल का दौरा
लोक संस्कृति से जुड़ी और गोदना सांस्कृतिक मंच की गायिका के रूप में पहचान बनाने वाली लता खापर्डे का स्वास्थ्य कुछ दिनों से खराब चल रहा था। जिसके लिए वे पहले से ही दवाइयां ले रहीं थी। बुधवार की दोपहर उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। लोक गायिका भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, पर उनकी मधुर आवाज हमेशा लोगों के मन में हमेशा जिंदा रहेगी। आज उनका राजनांदगांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया।












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