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IED Blast ने पहुंचाया सुरक्षाबलों को सबसे ज्यादा नुकसान, जानिए छत्तीसगढ़ में कब-कब हुई बड़ी नक्सल मुठभेड़?

Chhattisgarh Naxal IED Attack: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सोमवार को एक बड़ा नक्सली हमला हुआ, जिसमें 9 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। नक्सलियों ने सुरक्षाबलों की एक गाड़ी को निशाना बनाते हुए उसे आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से उड़ाया। यह धमाका इतना जोरदार था कि बख्तरबंद गाड़ी के टुकड़े 30 फीट दूर पेड़ पर अटके मिले। यह हमला तब हुआ, जब सुरक्षाबल माओवादियों के खिलाफ चलाए गए एक संयुक्त ऑपरेशन को समाप्त करके बेस कैंप लौट रहे थे।

आईईडी ब्लास्ट से बढ़ा सुरक्षाबलों का नुकसान

गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल 2023 में नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी ब्लास्ट्स में सुरक्षा बलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। इन विस्फोटों ने सुरक्षाकर्मियों की जान ली और उनकी जानमाल की सुरक्षा पर खतरे का संकेत दिया।

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देश के 38 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि देश के 38 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ सबसे अधिक प्रभावित राज्य है। छत्तीसगढ़ के 33 में से 15 जिले सीधे नक्सलवाद की चपेट में हैं। ओडिशा और झारखंड के कुछ जिले भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर, कोंडागांव, राजनांदगांव जैसे जिले वामपंथी उग्रवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

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नक्सलियों की बढ़ती हिंसा, सुरक्षाबलों को भारी नुकसान

नक्सलियों की हिंसा का सिलसिला अब भी जारी है, जबकि सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए कई कदम उठाए हैं। सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई और अभियानों के बावजूद, माओवादियों द्वारा आईईडी ब्लास्ट और एंबुश हमलों ने सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, सरकार की नीतियों और सुरक्षाबलों की कार्रवाई के परिणामस्वरूप कई नक्सली कार्यकर्ता हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं।

छत्तीसगढ़ में साल 2025 की तीसरी बड़ी घटना

यह घटना छत्तीसगढ़ में साल 2025 की तीसरी बड़ी घटना है। इससे पहले 3 जनवरी को गरियाबंद में एक नक्सली मुठभेड़ में 3 नक्सलियों को मार गिराया गया था, जबकि 4 जनवरी को दंतेवाड़ा में एक मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए थे। इसी बीच, दंतेवाड़ा के डीआरजी के प्रधान आरक्षक सन्नूराम कारम भी शहीद हो गए थे।

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नक्सलियों द्वारा किए गए IED विस्फोटों से सुरक्षा बलों को भारी नुकसान

छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में नक्सली अपनी गतिविधियों को लगातार जारी रखे हुए हैं, और सुरक्षा बलों पर हमले करने के लिए उन्होंने प्रमुख रूप से IED का इस्तेमाल किया है। 3 जनवरी 2025 को बीजापुर में हुए इस IED विस्फोट के अलावा, कई अन्य घटनाओं ने सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। 24 नवंबर 2024 को सुकमा जिले में हुए IED विस्फोट में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड के एक आरक्षक घायल हो गए थे, जबकि 29 सितंबर 2024 को बीजापुर जिले में हुए IED विस्फोट में 5 सीआरपीएफ जवान घायल हो गए थे।

इसके अतिरिक्त, 25 फरवरी 2024 को बीजापुर जिले में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) के एक हेड कांस्टेबल की मौत भी IED विस्फोट के कारण हुई थी। इसी तरह, 19 अक्टूबर 2024 को नारायणपुर जिले में माओवादियों द्वारा किए गए IED विस्फोट में दो ITBP के जवान शहीद हो गए और दो अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

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नक्सली हमलों की बढ़ती वारदातें

छत्तीसगढ़ में नक्सली हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, और सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर किए गए इन हमलों में IED एक प्रमुख साधन बन चुका है। इन विस्फोटों में अक्सर सुरक्षा बलों के वाहन और जवानों को टारगेट किया जाता है। 17 जुलाई 2024 को बस्तर के बीजापुर जिले में एक माओवादी विरोधी अभियान के दौरान IED विस्फोट हुआ था, जिसमें दो सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे और चार घायल हो गए थे। इसके अलावा, 26 अप्रैल 2023 को दंतेवाड़ा में हुए IED विस्फोट में 10 जवान और एक सिविल ड्राइवर शहीद हो गए थे।

छत्तीसगढ़ में नक्सली हमलों का सिलसिला दशकों से जारी है, और इस बीच कई बड़ी घटनाएं घटी हैं। आप यहां कुछ प्रमुख हमलों की टाइमलाइन देख सकते है।

1. 20 जून 2009: दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने हमलाकर सीआरपीएफ के 11 जवानों को शहीद किया।
2. 6 अप्रैल 2010: दंतेवाड़ा हमले में 76 जवान शहीद हुए।
3. 29 जून 2010: नारायणपुर में नक्सलियों ने हमला किया, जिसमें 27 जवान शहीद हो गए।
4. 13 मई 2012: एनडीएमसी के प्लांट में ब्लास्ट, जिसमें 6 सीआईएसएफ जवान शहीद हुए।
5. 13 मार्च 2018: सुकमा में आईईडी ब्लास्ट में 9 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए।
6. 24 अप्रैल 2017: सुकमा में हुए हमले में 25 जवान शहीद हुए।
7. 26 अप्रैल 2023:दंतेवाड़ा में आईईडी ब्लास्ट से 10 जवान शहीद हुए।
8. 13 मार्च 2024:छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर मुठभेड़, जिसमें 42 नक्सली मारे गए।
9. 15 अप्रैल 2024: कांकेर में एक ज्वॉइंट ऑपरेशन में 29 नक्सली मारे गए।

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मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प

गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि सरकार अगले कुछ सालों में नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है और मार्च 2026 तक इस समस्या का पूरी तरह से समाधान करने का लक्ष्य रखा गया है।

नक्सलवाद का मुद्दा छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि सुरक्षाबलों और सरकार की लगातार कोशिशों से नक्सलियों के खिलाफ कई सफलता मिल चुकी है, लेकिन माओवादियों द्वारा नई रणनीतियों का पालन और सीमाओं को पार करने के प्रयास उनके सफाए में दिक्कतें पैदा कर रहे हैं। सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षाबलों की कार्रवाई से यह उम्मीद जताई जा रही है कि नक्सलवाद का प्रभाव जल्द समाप्त होगा।

लंबे समय से नक्सलवाद का दंश झेल रहा है छत्तीसगढ़

पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से 1967 में नक्सलवाद की शुरुआत हुई थी। आज यह समस्या छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों में गंभीर हो चुकी है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद का प्रभाव सबसे ज्यादा देखा जाता है, और यह राज्य पिछले 50 वर्षों से नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। नक्सलियों के हमलों में कई जवान शहीद हो चुके हैं, और सुरक्षाबलों ने भी कई बड़े ऑपरेशनों में माओवादियों को मौत के घाट उतारा है।

छत्तीसगढ़ राज्य का बस्तर संभाग नक्सलवाद के लिए सबसे अधिक कुख्यात है। इसके अलावा, राज्य के अन्य जिलों जैसे कि राजनांदगांव, महासमुंद, कवर्धा और बालोद भी नक्सल गतिविधियों से प्रभावित हैं। इन इलाकों में सुरक्षा को बढ़ाने के लिए लगभग 60,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

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