Jaspal Rana Passes Away: दोहा में जसपाल राणा ने 102° बुखार में रचा था इतिहास, वर्ल्ड रिकॉर्ड से जीता था सोना
Jaspal Rana: भारतीय खेल जगत ने आज एक महान निशानेबाज को खो दिया है। मनु भाकर के कोच और भारत के दिग्गज शूटर जसपाल राणा के निधन की खबर ने खेल प्रेमियों को भावुक कर दिया है। उनके शानदार करियर का एक ऐसा अध्याय है, जिसे भारतीय खेल इतिहास कभी नहीं भूल पाएगा।
यह कहानी है साल 2006 के दोहा एशियाई खेलों की, जब जसपाल राणा ने 102-103 डिग्री बुखार के बावजूद ऐसा कारनामा कर दिखाया था, जिसे आज भी जज्बे और जुनून की मिसाल माना जाता है। उन्होंने उस कंडीशन में ऐसा काम किया था, जिसे हमेशा याद किया जाएगा।

बुखार से तप रहा था शरीर, लेकिन नहीं डिगा निशाना
दिसंबर 2006 में दोहा एशियाई खेलों के दौरान जसपाल राणा कई दिनों से वायरल बुखार से जूझ रहे थे। हालत ऐसी थी कि उन्हें चक्कर आ रहे थे और शरीर पूरी तरह कमजोर पड़ चुका था। इवेंट वाले दिन शरीर का तापमान करीबन 103 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया था। इसके बावजूद उन्होंने मुकाबले से हटने का फैसला नहीं किया।
उस समय कई लोग मान रहे थे कि राणा का सर्वश्रेष्ठ दौर पीछे छूट चुका है। आलोचक उनकी फॉर्म पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन भारतीय निशानेबाज ने जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि अपने प्रदर्शन से दिया।
दोहा में बरसा सोना, खत्म हुआ 12 साल का इंतजार
जसपाल राणा ने सबसे पहले पुरुषों की 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को 12 साल बाद एशियाई खेलों में शूटिंग का स्वर्ण पदक दिलाया। उन्होंने 574 अंक हासिल कर अपने पुराने दबदबे की याद दिला दी। इतना ही नहीं, टीम इवेंट में भारत को रजत पदक भी मिला लेकिन असली इतिहास तो अभी लिखा जाना बाकी था।
बुखार में Jaspal Rana ने की वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी
इसके अगले ही दिन जसपाल राणा पुरुषों की 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में उतरे। कमजोरी और बुखार के बावजूद उनका फोकस अटूट रहा। उन्होंने 590 अंकों का शानदार स्कोर बनाया और विश्व रिकॉर्ड की बराबरी कर दी। यह रिकॉर्ड 1989 में बनाया गया था और उस समय दुनिया के चुनिंदा निशानेबाज ही इस आंकड़े तक पहुंच पाए थे।
राणा ने न सिर्फ व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता, बल्कि भारत को टीम गोल्ड भी दिलाया। दोहा की शूटिंग रेंज पर उस दिन भारतीय तिरंगा सबसे ऊंचा लहरा रहा था और उसके केंद्र में जसपाल राणा थे।
भारतीय शूटिंग के महानायक थे Jaspal Rana
जसपाल राणा का करियर उपलब्धियों से भरा रहा। एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और विश्व स्तर पर उन्होंने भारत को कई पदक दिलाए। बाद में कोच के रूप में भी उन्होंने भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और मनु भाकर जैसे खिलाड़ियों को तराशा।
आज जब पूरा खेल जगत उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है, तब दोहा 2006 की वह कहानी फिर सामने आ रही है, जब एक खिलाड़ी ने बुखार को हराया, दर्द को हराया और इतिहास के पन्नों में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा दिया। 102 डिग्री बुखार में जीता गया गोल्ड मेडल आने वाले समय में भारतीय शूटिंग में एक प्रेरणा के रूप में याद किया जाएगा।













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